3500 किसानों की तकदीर नाशपाती की खेती से बदली
नाशपाती की खेती करने वाले किसानों की संख्या जिले में 3500 के पार पहुंच चुकी है. तरुण शर्मा की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 4, 2026 at 2:13 PM IST
जशपुर: जिला जशपुर को सिर्फ नागलोक के रूप में ही नहीं जाना जाता है, जशपुर जिले को यहां के मेहनतकश किसानों के लिए भी जाना जाता है. यहां के ज्यादातर किसान धान और सब्जियों की खेती करते हैं. लेकिन कम और ज्यादा बारिश की वजह से कई बार इनको फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है, जिसके चलते यहां के किसान अब तेजी से फलों के खेती की ओर अपना रुख कर रहे हैं. बीते कुछ सालों से उद्यानिकी विभाग की मदद से यहां के किसानों ने नाशपाती की फसल लगाने की शुरुआत की है.
नाशपाती की खेती से बदल रही किसानों की तकदीर
छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी कोने पर बसा जशपुर अंतिम छोर का जिला है. जशपुर के बाद झारखंड की सीमा शुरू हो जाती है. यहां से ओडिशा राज्य की सीमा भी करीब है. इसलिए लोग जशपुर को झारखंड और ओडिशा के बीच का प्रवेश द्वार भी कहते हैं. जशपुर के किसानों को अब इसी प्रवेश द्वार का फायदा भी तेजी से मिल रहा है. यहां उगाई जाने वाली रसीली नाशपाती बड़ी मात्रा में बिकने के लिए ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक पहुंच रही है. नाशपाती की खेती करने वाले किसान कहते हैं कि उनकी आय तो बढ़ ही रही है, उनकी फसल की डिमांड भी कई राज्यों तक पहुंच चुकी है.
किसानों को प्रोत्साहित करने का काम शासन को करना चाहिए. फलों की अच्छी बिक्री हो और किसानों की आय बढ़े इसके लिए जैम और जेली के लिए यहां प्लांट लगाना चाहिए: राम प्रकाश पांडेय, किसान
किसानों की आय हुई दोगुनी
किसान बताते हैं कि जशपुर का मौसम नाशपाती की खेती के लिए बेहतरीन है. इस साल भी अच्छी फसल हुई है और रिकार्ड स्तर पर नाशपाती का उत्पादन हुआ है. किसान कहते हैं कि बड़ी बड़ी संख्या में व्यापारी पड़ोसी राज्य झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से नाशपाती खरीदने के लिए आ रहे हैं. नाशपाती की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि अब उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बाजारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. झारखंड और अन्य राज्यों से आने वाले थोक व्यापारी सीधे बागानों तक पहुंचकर पूरी फसल का सौदा कर लेते हैं और मौके पर ही नगद भुगतान कर नाशपाती ले जाते हैं. इससे किसानों को बेहतर दाम तो मिलता ही है, फसल बेचने के लिए खरीदार नहीं खोजने पड़ते.


हर साल 2 से ढाई लाख तक की हमें आमदनी इस फल से हो जाती है. इस फसल को लगाने से हमें अच्छा मुनाफा होता है: भवठा राम, किसान
इस बार भी हमने छह से 7 एकड़ में नाशपाती की फसल लगाई है. व्यापारी खेत पर आते हैं और यहां से फसल खरीदकर ओडिशा और झारखंड तक ले जाते हैं: उमेश भगत किसान
3500 किसान जुड़े, हर साल 1500 टन उत्पादन
उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक करन सोनकर कहते हैं, ''जशपुर जिले की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां नाशपाती उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल है. वर्तमान में जिले के लगभग 3500 किसान नाशपाती की खेती से जुड़े हुए हैं और जिले में हर साल करीब 1500 टन नाशपाती का उत्पादन हो रहा है. किसानों को राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पौधारोपण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है. विभाग के आकलन के अनुसार नाशपाती की खेती से किसानों को प्रति एकड़ एक लाख से डेढ़ लाख तक की आय प्राप्त हो रही है, जो पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक है.''

दिल्ली तक पहुंच रही जशपुर की नाशपाती
किसान बताते हैं कि जशपुर की नाशपाती अब केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं है, इसकी आपूर्ति ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक हो रही है. बेहतर गुणवत्ता, प्राकृतिक मिठास और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. किसानों के अनुसार बीते 3 से 4 सालों से नाशपाती की खेती से उन्हें लगातार अच्छा लाभ मिल रहा है. लेकिन इस वर्ष उन्हें अब तक की सबसे अधिक आय प्राप्त हुई है. अच्छी कीमत मिलने से क्षेत्र के अन्य किसान भी अब इस बागवानी फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

नाशपाती की खेती में काफी फायदा और मुनाफा है. किसानों का इस फसल की ओर तेजी से रुझान बढ़ रहा है. हम किसानों को समय समय पर गाइड भी करते हैं. फसल ज्यादा हो इसके लिए खेती की नई-नई तकनीक भी बताते रहते हैं: करन सोनकर सहायक संचालक, उद्यानिकी विभाग
जैम एंड जेली प्लांट लगाने की मांग
विशेषज्ञों के अनुसार नाशपाती की बढ़ती मांग के पीछे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की बड़ी भूमिका है. देशभर में तेजी से बढ़ रहे जैम, जेली, फ्रूट स्प्रेड, जूस और अन्य प्रोसेस्ड फूड उद्योगों में नाशपाती के गूदे का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है. इसके साथ ही होटल, बेकरी, फूड चेन और आधुनिक रिटेल बाजारों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. बच्चों को नाशपाती से बने जैम एंडी जेली खूब पसंद आते हैं. उद्यानिकी विभाग का मानना है कि जैसे-जैसे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विस्तार होगा, जशपुर की नाशपाती की मांग भी उसी अनुपात में बढ़ती जाएगी, इससे किसानों को भविष्य में और बेहतर कीमत भी मिलेगी.

धान का बेहतर विकल्प बना नाशपाती
जशपुर में लगातार बढ़ रहे धान के रकबे को संतुलित करने के लिए प्रशासन और उद्यानिकी विभाग किसानों को नकदी फसलों की ओर प्रोत्साहित कर रहे हैं. विभाग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि जशपुर, मनोरा, सन्ना और बगीचा क्षेत्र में नाशपाती धान की तुलना में अधिक लाभ देने वाली फसल साबित हो सकती है. यदि किसानों को आधुनिक तकनीक, सिंचाई, प्रसंस्करण और विपणन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नकदी बागवानी का विस्तार और ज्यादा संभव है. इस विस्तार से किसानों की आय दोगुनी होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जबूती मिलेगी.

नागलोक बना नाशपाती लोक
नाशपाती की खेती करने वाले किसानों की लगातार बढ़ती जा रही संख्या, यह बताती है कि कैसे नाशपाती की खेती से यहां के किसान अपनी आमदनी दोगुनी करने में सफल साबित हो रहे हैं. फसल तैयार होते ही व्यापारी सीधे बगीचे से ही नाशपाती ले जाते हैं. इससे किसानों को समय और लागत दोनों की बचत हो रही है.


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