वाराणसी में 19 हेक्टेयर में तैयार होगा वेटलैंड, इको टूरिज्म को बढ़ाने में मिलेगी मदद, प्राधिकरण से मिली मंजूरी
कठिरांव स्थित 19.06 हेक्टेयर वेटलैंड को वन विभाग विश्व पर्यावरण दिवस पर संरक्षित आर्द्रभूमि घोषित करेगा.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : June 1, 2026 at 3:22 PM IST
वाराणसी : योगी सरकार कठिरांव वेटलैंड (आर्द्रभूमि) को नया और सुरक्षित जीवन देने जा रही है. कुल 19.06 हेक्टेयर में फैले इस प्राकृतिक जल स्रोत को संरक्षित और विकसित करने की वैधानिक तैयारी कर ली गई है. इस पहल का उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए मानव जीवन की गुणवत्ता को भी मजबूत करना है.
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) को उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा वेटलैंड्स को "वेटलैंड प्रबंधन" नियमों के अंतर्गत अधिसूचित किया जाना प्रस्तावित है. सरकार का यह कदम वाराणसी के विकास को दिशा देने वाला माना जा रहा है, जो आधुनिकता के साथ-साथ प्रकृति और मानव जीवन के सह-अस्तित्व को मजबूत करेगा.
प्राधिकरण से मिला अनुमोदन : प्रभागीय वन अधिकारी स्वाति श्रीवास्तव ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग द्वारा वेटलैंड को “आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017” के अंतर्गत अधिसूचित किया जाना प्रस्तावित है. इसके लिए कठिरांव वेटलैंड का चयन किया गया है. वन विभाग ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से आवश्यक अभिलेख और तकनीकी विवरण तैयार किए हैं, जिन्हें जिला आर्द्रभूमि प्राधिकरण से अनुमोदन भी मिल चुका है.
स्थानीय पर्यावरण रहेगा सही : डीएफओ ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद इस क्षेत्र को विशेष कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा. इसके तहत वेटलैंड क्षेत्र में अतिक्रमण, ठोस अपशिष्ट फेंकना, प्रदूषण फैलाना, अवैध निर्माण और प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा. इससे न केवल जलधारण क्षमता और जैव विविधता का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय पर्यावरण को भी मजबूती मिलेगी.
पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण : पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वेटलैंड प्राकृतिक जल संरक्षण, भूजल स्तर को बनाए रखने, बाढ़ नियंत्रण, पक्षियों एवं अन्य जीव-जंतुओं के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं.
कठिरांव वेटलैंड का संरक्षण स्वास्थ्य, आजीविका और पर्यावरण सुरक्षा से भी जुड़ा है...
- जल संरक्षण : यह भूगर्भ जल स्तर को रिचार्ज करेगा, जिससे आने वाले समय में क्षेत्र में पानी का संकट नहीं होगा.
- स्वच्छ हवा और बेहतर स्वास्थ्य : 19 हेक्टेयर में फैला यह हरित और जलीय क्षेत्र वाराणसी की हवा को शुद्ध करने में 'फेफड़े' की तरह काम करेगा, जिससे नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर होगा.
- जैव विविधता की रक्षा : प्रवासी पक्षियों और जलीय जीवों को प्राकृतिक आवास वापस मिलेगा, जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहेगा.
कानूनी प्रक्रिया के बाद वेटलैंड संरक्षित और व्यवस्थित ढंग से विकसित किया जाना प्रास्तवित है, जिससे यह क्षेत्र पर्यावरण, जैव विविधता संरक्षण और इको-टूरिज्म के लिए भी उपयोगी होगा. इससे पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में सकारात्मक संदेश जाएगा.
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