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सरगुजा में डॉग बाइट के चौंकाने वाले आंकड़े, जानिए रेबीज के जबड़े से बचने के उपाय

सरगुजा में रोजाना डॉग बाइट के सामने आ रहे हैं.ऐसे में हमने एक्सपर्ट से जाना कि डॉग बाइट के बाद क्या सावधानी बरतें.

WAYS TO AVOID RABIES JAWS
सरगुजा में डॉग बाइट के चौंकाने वाले आंकड़े (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 20, 2026 at 1:20 PM IST

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Updated : February 20, 2026 at 2:23 PM IST

6 Min Read
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देशदीपक गुप्ता,संवाददाता

सरगुजा : एक तरफ सरकार से लेकर अदालत स्ट्रीट डॉग्स के मामले को लेकर गंभीर है.वहीं दूसरी तरफ सरगुजा में इस गंभीरता पर ठीक ढंग से अमल नहीं हो रहा है.ये हम नहीं बल्कि वो आंकड़े बता रहे हैं,जिनमें डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं. सरगुजा जिले में न सिर्फ आवारा कुत्तों की संख्या में इजाफा हुआ है बल्कि हर दिन करीब 12 लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं. ये स्थिति मानव जाति के लिए खतरनाक है. पशु प्रेम के कानूनों ने इंसानों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. डॉग बाइट और रेबीज को पशु एवं स्वास्थ्य विभाग ने समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा बताया है.फिर भी इस ओर सरगुजा में कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है.



पिछले 5 साल के डॉग बाइट के मामले

सरगुजा जिले में बीते 5 साल के डॉग बाइट प्रकरणों पर नजर डाले तो साल दर साल ये आंकड़े बढ़ रहे हैं. इसे रोकने के लिए ना तो कुत्तों की नसबंदी की जा रही है और ना ही कोई अन्य उपाय होते नजर आ रहे है. आंकड़ो की बात करे तो वर्ष 2021 में 3345 लोग डॉग बाइट का शिकार हुए. इसी तरह 2022 में 3540 साल 2023 में 3920 और साल 2024 में 4190 लोग डॉग बाइट का शिकार हुए.वहीं 2025 में 4649 लोग डॉग बाइट का शिकार हुए हैं.

WAYS TO AVOID RABIES JAWS
सरगुजा में डॉग बाइट के आंकड़ें (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

डॉग बाइट कहां पर ज्यादा खतरनाक ?

इस विषय पर सिविल सर्जन डॉ जेके रेलवानी ने बताया कि डॉग बाइट के केसेस पिछले एक से डेढ़ वर्ष के बीच तुलनात्मक रूप से बढ़े हैं. इसमें विशेष ध्यान ये देना रहता है कि जब कभी भी डॉग बाइट होता है तो निर्भर करता है उसकी सीवियरिटी कि कहां पर काटा है. पैर में काटा है, पेट पर काटा है, पीठ पर काटा है या चेहरे पर काटा है.

सरगुजा में डॉग बाइट के चौंकाने वाले आंकड़े (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

चेहरे पर जो डॉग बाइट रहता है वह सर्वाधिक गंभीरतम स्थिति वाला माना जाता है. क्योंकि वहां से ब्रेन की दूरी बहुत कम रहती है. वायरस को ब्रेन तक ट्रेवल करने में समय कम लगता है . ये जीवन के लिए अत्यंत घातक है. ऐसी स्थिति में डॉग बाइट के केसेस को तत्काल अस्पताल में जाना चाहिए. वहां पर दिखाना चाहिए- डॉ जेके रेलवानी, सिविल सर्जन

Full dose of rabies vaccine is necessary
रेबीज वैक्सीन का पूरा डोज जरुरी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

वैक्सीन में पांच डोज का होता है शेड्यूल

डॉ रेलवानी के मुताबिक घाव को पानी या साबुन पानी से धो लेना चाहिए. यदि घाव बहुत ज्यादा बड़ा हो तो हॉस्पिटल में पहुंचकर वहां पर उसे चिकित्सकीय देखरेख में घाव को क्लीनिंग कराना चाहिए और उसके बाद तत्काल एंटी रेबीज वैक्सीन के टीके लगाए जाने चाहिए. जब कभी भी घाव चेहरे पर या चेस्ट पर पेट पर रहते हैं तो ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि इम्यूनोग्लोबुलिंस नाम की एंटी रेबीज वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाए. एआरवी के जो डोज रहते हैं यूजली जो अभी तक शासन के द्वारा प्रदान किए जा रहे हैं.

रेबीज है खतरनाक वायरस
वहीं डॉग बाइट के मामलों को लेकर पशु चिकित्सक डॉ. सीके मिश्रा ने बताया कि कुत्ते के काटने से रेबीज नाम की बीमारी होती है.रेबीज वायरस से फैलने वाली बीमारी है. ये जूनोटिक है और जूनोटिक होने का यह तात्पर्य है कि यह जानवरों से मनुष्यों को प्रभावित करती है. रेबीज एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है. यदि एक बार इसके लक्षण शरीर में प्रदर्शित हो जाए तो इसका उपचार संभव नहीं है . अंततः जो व्यक्ति इससे संक्रमित हुआ है उसकी मृत्यु हो जाती है. तो यह भयावह है और बहुत ही ज्यादा खतरनाक बीमारी है.

very important to control dogs
डॉग्स को कंट्रोल करना बेहद जरुरी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

अंधविश्वास के चक्कर में ना करें देरी

डॉ सीके मिश्रा के मुताबिक हम रेबीज से बचाव कर सकते हैं. ऐसा नहीं है कि बचाव का कोई साधन नहीं है. यदि हम समय पर निर्धारित समय पर निश्चित अवधि में चिकित्सक के परामर्श से टीकाकरण कराते हैं तो हम पूरी तरह से अपने आप को सुरक्षित कर सकते हैं. लेकिन प्राय: देखने में आया है कि कई बार जागरुकता के अभाव में लोग अंधविश्वास झाड़ फूंक इन सभी चक्करों में पड़ जाते हैं. इसी वजह से बीमारी के लक्षण उनमें आ जाते हैं जिसके कारण से मृत्यु होती है. एक पशु चिकित्सक होने के नाते जो मेरी लोगों से अपील है कि जागरूकता बढ़ाए और रेबीज को हल्के में ना लें.

Ways to avoid rabies jaws
सरगुजा में डॉग बाइट के चौंकाने वाले आंकड़े (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

हम अंधविश्वास को कम करें ताकि लोग कभी किसी भी प्रकार के अंधविश्वास में ना आए और चिकित्सक से संपर्क करके उनसे सलाह लेके उनसे वैक्सीन के डोज लें. यदि कुत्ते का नाखून लग गया है और यदि व्यक्ति का जो स्किन है जो चमड़ी है वो यदि टूटी है स्क्रैच गहरा है ब्लड निकला है तो मैं इस बात को जरूर कहूंगा कि चिकित्सक से परामर्श लेके निर्धारित अवधि में वैक्सीन जरूर लें क्योंकि कुत्ता जो है अपने पैर को चाटते रहता है अपने नाखून को चाटते रहता है और यह जो चाटने के बाद यदि वो स्क्रैच करता है तो वायरस के उस स्क्रैच के स्थान पर घुसने की संभावना रहती है- डॉ सीके मिश्रा, वेटनरी डॉक्टर

नाखून से खरोंच लगने पर भी लगवाएं वैक्सीन

डॉ सीके मिश्रा के मुताबिक कई बार लोग देखते हैं कि दांत लगा है तो सुई लगवाएंगे और यदि नाखून से स्क्रैच लग गया है तो नहीं लगवाएंगे. हमारा यह कहना है कि दोनों ही परिस्थितियों में आप टीकाकरण अवश्य कराएं ताकि आपकी जान को सुरक्षा मिल सके.

Ways to avoid rabies jaws
रेबीज को नियंत्रित करने के उपाय (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

रेबीज को नियंत्रित करने के उपाय

वेटनरी डॉक्टर के मुताबिक हम रेबीज को नियंत्रित कर सकते हैं.इसके लिए आवारा डॉग्स को रेबीज का टीका लगाना होगा.साथ ही डॉग्स की संख्या को नियंत्रित करके भी रेबीज के प्रभाव को कम किया जा सकता है.इसके लिए फीमेल डॉग्स का बधियाकरण किया जा सकता है.साथ ही साथ आवारा डॉग्स की ब्रीडिंग को नियंत्रित करके इनकी संख्या बढ़ने से रोकी जा सकती है.


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Last Updated : February 20, 2026 at 2:23 PM IST