नूंह में जलभराव से किसान परेशान, खेतों में फसल नहीं अब मछली पकड़ने को मजबूर, सरकार से मुआवजे की मांग
नूंह के लाहाबास और मुंढेता में किसानों को खेतों में जलभराव के चलते काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.


Published : January 8, 2026 at 11:33 AM IST
|Updated : January 8, 2026 at 12:54 PM IST
नूंह: हरियाणा के नूंह में लाहाबास और मुंढेता गांवों में लगातार बने जलभराव ने किसानों की कमर तोड़ दी है. हालात ऐसे हैं कि जहां कभी गेहूं, सरसों, ज्वार और बाजरे की फसलें लहलहाती थी, आज वहीं खेतों में लबालब पानी भरा हुआ है. आलम ये है कि किसान अब फसल उगाने की बजाय मछली पकड़ने को मजबूर हैं. दोनों गांवों में दो दर्जन से अधिक एकड़ भूमि जलमग्न पड़ी है.
जलभराव से किसान परेशान: प्रभावित जमीन पर रबी सीजन में गेहूं और सरसों की बुवाई नहीं हो सकती. किसानों का कहना है कि "बरसात का मौसम तो कब का गुजर गया, लेकिन जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है. वर्षा के समय जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण ज्वार और बाजरे की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं. जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. अब रबी की फसल भी हाथ से निकल जाने से किसानों की परेशानियां और बढ़ गई है".
किसानों को खरीदना पड़ रहा अनाज: किसानों ने बताया कि "ग्राम पंचायत लाहाबास और मुंढेता के करीब 20-25 एकड़ खेतों में अभी भी बारिश का पानी भरा है. कई किसानों ने अपने स्तर पर पानी की निकासी कराने का प्रयास किया. लेकिन स्थायी समाधान के अभाव में समस्या दोबारा खड़ी हो गई. फसलों से वंचित किसान आज अनाज मंडी से गेहूं खरीदकर अपने परिवार का पेट भरने को मजबूर हैं".
"कोई नहीं सुन रहा": किसानों ने बताया कि "हमारी कोई नहीं सुनता. सरकार से मांग है कि हमें मुआवजा दिया जाए. जल निकासी के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएं. ताकि आने वाले सीजन में वे फिर से अपने खेतों में फसल उगा सके".
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