धनबाद में चार हजार करोड़ की जलापूर्ति योजनाएं लंबित, कोयलांचल की जनता प्यासी
धनबाद में करीब चार हजार करोड़ की जलापूर्ति योजनाएं लंबित पड़ी हुई हैं. इससे जिले के लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ता है.

Published : March 2, 2026 at 8:56 PM IST
रिपोर्ट - नरेंद्र निषाद
धनबाद: जिले में पेयजल आपूर्ति की तस्वीर चौंकाने वाली है. बीते एक दशक में चार हजार करोड़ की विभिन्न शहरी और ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं लंबित हैं. पाइपलाइन बिछी, जलमीनारें खड़ी हुईं, ट्रीटमेंट प्लांट बने, लेकिन बड़ी आबादी अब भी नियमित जलापूर्ति से वंचित है. कई इलाकों में नल तो लगे हैं, पर पानी नहीं पहुंचा.
जिले में चल रही कई योजनाएं 70 से 85 प्रतिशत तक पूरी बताई जा रही हैं. लक्ष्य तिथि भी बीत चुकी है, फिर भी आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी. कहीं इंटेक वेल अधूरा है, कहीं पंप हाउस का काम लंबित है तो कहीं बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाया. परिणामस्वरूप, पूरी संरचना खड़ी होने के बावजूद जलापूर्ति ठप है.
करीब 750 करोड़ रुपये की लागत से शुरू इस योजना का उद्देश्य सैकड़ों गांवों तक पानी पहुंचाना था. पाइपलाइन और टंकियों का निर्माण हुआ, लेकिन जल स्रोत से पानी उठाव और वितरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. ग्रामीण आज भी पुराने जलस्रोतों पर निर्भर हैं.

ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत ट्रीटमेंट प्लांट और जलमीनार बन चुके हैं. योजना तय समय में पूरी होनी थी, पर मोटर संचालन और ट्रायल रन में देरी के कारण दर्जनों गांवों में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी. ट्रायल के बाद पानी शुरू हुई. लेकिन फिर से आपूर्ति बंद कर दी गई.

इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद, अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं. एजेंसियों में बदलाव, तकनीकी खामियां और समन्वय की कमी को देरी का कारण बताया जा रहा है.
डीसी आदित्य रंजन ने कहा कि जलापूर्ति की नगर निगम और पेयजल विभाग से चलने वाली योजनाएं सालों से लंबित हैं. जल जीवन मिशन के तहत चलने वाली योजनाओं में फंड की कमी की दिक्कत हो रही थी, लेकिन अभी कुछ फंड आया है. जल जीवन मिशन के तहत चलने वाली योजनाओं को पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है. कुछ योजनाएं एनओसी के कारण लंबित रही. किसी में रेलवे ट्रैक तो किसी में एनएच जैसी समस्या खड़ी हो रही है. कई एनएच की चौड़ाई काफी कम है.

उन्होंने बताया कि अगर पाइप लाइन की एनओसी दे दी जाए, तो आधी सड़क कट जाएगी. इन कारणों से योजनाएं लंबित रही है. कुछ में वाटर एक्सट्रैक्शन की भी समस्याएं खड़ी हो रही. बायर एक्सट्रैक्शन के लिए डीवीसी से परमिशन नहीं मिला है. डीवीसी से परमिशन लेनी है. जलापूर्ति योजनाओं पर कार्य करने वाली एजेंसी का काम संतोषजनक नहीं रहा. गर्मी के पहले डीवीसी, निगम और सभी एजेंसी के साथ एक बैठक की जाएगी. कम बजट और कम मेहनत वाली जलापूर्ति योजनाओं को तत्काल शुरू करने की कोशिश की जाएगी. सिंगल विलेज स्कीम का सर्वे चल रहा है.

डीसी ने साफ किया कि तकनीकी अड़चन, एनओसी और एजेंसियों की धीमी कार्यशैली के कारण योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं. हालांकि प्रशासन अब गर्मी से पहले कुछ योजनाएं चालू करने की बात कह रहा है.
शहरी इलाकों में स्थिति और चिंताजनक है. गर्मी दस्तक दे रही है और लोगों को फिर जल संकट की आशंका सताने लगी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जलापूर्ति योजना के अधूरी रहने से उन्हें पानी खरीदकर इस्तेमाल करना पड़ रहा है. एक हजार रुपये प्रति टैंकर पानी खरीद कर लोग दैनिक जरूरत पूरी कर रहे हैं. उनका कहना है कि हर साल गर्मी में यही हाल होता है और इस बार भी राहत की उम्मीद कम ही दिख रही है.

ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात बेहतर नहीं हैं. कई गांवों में जलापूर्ति की ट्रायल शुरू हुई थी, लेकिन पिछले एक साल से सप्लाई ठप है. स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि पानी की आपूर्ति बंद रहने से काफी परेशानी हो रही है. गर्मी बढ़ने के साथ दिक्कत और बढ़ जाएगी. लोगों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है.

सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने कहा कि जलापूर्ति योजनाओं को पूरा करने वाली एजेंसी कार्य के प्रति कभी समर्पित नहीं रही है. काम को सिर्फ लीपापोती करने के चक्कर में लगे रहते हैं. ऐसी एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट करने की जरूरत है. विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक लापरवाह एजेंसियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक योजनाएं समय पर पूरी नहीं होंगी.

जिले में जलापूर्ति योजनाओं पर भारी राशि खर्च होने के बावजूद जनता को राहत नहीं मिल पा रही है. प्रशासन तकनीकी और प्रक्रियात्मक अड़चनों का हवाला दे रहा है, जबकि आम लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गर्मी से पहले कितनी योजनाएं धरातल पर उतर पाती हैं और धनबाद की प्यास कब बुझती है.
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