जलाशयों में छलका भरोसा! दो साल बाद आधे से ज्यादा भरे बांध, सिंचाई को मिला बड़ा सहारा
जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के जलाशयों में मानसून से पहले 52 फीसदी से ज्यादा पानी उपलब्ध है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 11, 2026 at 12:47 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ के लिए राहत भरी खबर है. मानसून की दस्तक से पहले ही प्रदेश के प्रमुख और मध्यम जलाशयों में पानी का भंडार पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में पहुंच गया है. जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के जलाशयों में 52 फीसदी से ज्यादा पानी उपलब्ध है, जिससे सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
जलाशयों में बढ़ा जल भंडारण
राज्य के प्रमुख और मध्यम जलाशयों में वर्तमान में 3329.41 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध है, जो कुल भंडारण क्षमता का 52.35 प्रतिशत है. यह आंकड़ा पिछले वर्ष और वर्ष 2024 की तुलना में काफी बेहतर है. विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जलाशयों में जल संग्रहण की यह स्थिति आगामी खरीफ सीजन के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.
प्रमुख जलाशयों ने भरी उम्मीद
प्रदेश के 12 प्रमुख जलाशयों में 54.60 प्रतिशत पानी उपलब्ध है. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 31.56 प्रतिशत था, जबकि वर्ष 2024 में महज 26 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया था. यानी इस बार प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में करीब 23 प्रतिशत और दो वर्ष पहले की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है.
मध्यम जलाशयों की स्थिति भी मजबूत
राज्य के 34 मध्यम जलाशयों में 40.33 प्रतिशत जल उपलब्ध है. यह पिछले वर्ष के 28.83 प्रतिशत और वर्ष 2024 के 26.48 प्रतिशत की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति है. इससे कई जिलों में सिंचाई व्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना है.
मुरुमसिल्ली सबसे आगे, कई जलाशयों में बेहतर भराव
धमतरी जिले का मुरुमसिल्ली जलाशय 81.50 प्रतिशत जलभराव के साथ प्रदेश में सबसे अधिक भरा हुआ जलाशय बन गया है. इसके अलावा कांकेर का दूधावा जलाशय 74.70 प्रतिशत, मुंगेली का मनियारी 75.61 प्रतिशत, कबीरधाम का छिरपानी 75.64 प्रतिशत और कोरिया का झुमका जलाशय 71.29 प्रतिशत क्षमता तक भर चुका है.
बांगो और गंगरेल में भी बढ़ा जलस्तर
प्रदेश के सबसे बड़े मिनीमाता बांगो जलाशय में वर्तमान में 56.19 प्रतिशत जल उपलब्ध है.पिछले वर्ष इसी समय यहां केवल 25.64 प्रतिशत पानी था.वहीं रविशंकर सागर (गंगरेल) में 48.97 प्रतिशत, तांदुला में 44.79 प्रतिशत, खरंग में 64.59 प्रतिशत और सोंढूर में 62.65 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है.
जल संसाधन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के जलाशयों में इस वर्ष पानी का भंडार पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी अधिक मजबूत स्थिति में है. मानसून के दौरान अच्छी बारिश होने पर यह स्थिति और बेहतर हो सकती है, जिससे किसानों, सिंचाई परियोजनाओं और पेयजल व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है.

