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जामताड़ा प्रखंड के बेवा में पानी की समस्या, एक चापाकल के भरोसे है पूरी पंचायत

जामताड़ा प्रखंड के बेवा पंचायत में पानी की समस्या बनी हुई है. यहां करोड़ों रुपये का जलमीनार बेकार पड़ा हुआ है.

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बंद पड़ा चापाकल (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : April 19, 2026 at 3:21 PM IST

4 Min Read
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जामताड़ा: बेवा पंचायत में एक ऐसा चापाकल है, जो पूरे पंचायत के राहगीर और ग्रामीणों की प्यास बुझाता है. पानी लेने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है. 24 घंटा पानी देकर इस भीषण गर्मी में राहत देने का काम कर रहा है. गांव में करोड़ों रुपये का बना जलमीनार बेकार पड़ा हुआ है. अधिकतर चापाकल, सोलर टैंक खराब रहते हैं, यहां के लोग बस एक ही चापाकल के भरोसे निर्भर हैं.

यहां गर्मी आते ही पीने के पानी का संकट गहरा जाता है और लोगों की समस्या बढ़ जाती है. हालांकि इससे निपटने को लेकर प्रशासन द्वारा खराब पड़े चापाकल को ठीक करने का भी काम किया जा रहा है, लेकिन इस भीषण गर्मी में संकट से ग्रामीण उबर नहीं पा रहे हैं. पीने के पानी के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

जानकारी देते ग्रामीण और बीडीओ (ETV BHARAT)

क्या कहते हैं ग्रामीण

पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण बताते हैं कि यहां एक चापाकल है, जहां दूर-दूर से लोग पानी भरने आते हैं. पानी लेने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लगी रहती है. ग्रामीण बताते हैं कि चापाकल का पानी भी काफी मीठा होता है और इससे कई बीमारी भी ठीक होती है. पानी के लिए कई सोलर टैंक चापाकल गाड़े जाते हैं लेकिन अधिकतर खराब रहते हैं. यही एक चापाकल है जो गर्मी में जान बचाती है.

खराब होने पर ग्रामीण चंदा कर ठीक कराते हैं चापाकल

सबसे आश्चर्य की बात यह है कि चापाकल खराब होने पर ग्रामीण चंदा कर इसे ठीक कराते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि चापाकल खराब होने पर वे लोग चंदा कर इसे ठीक कराते हैं. अगर इसकी शिकायत प्रशासन और विभाग को करेंगे तो काफी दिन लग जाता है.

बेकार पड़ा है करोड़ों का बना जलमीनार

ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत जल मीनार तो बनाया गया है लेकिन यह बरसों से बंद पड़ा हुआ है. जब इसका उद्घाटन हुआ तो उसके 6 महीना साल भर तक ग्रामीणों को घर तक पानी पहुंचा उसके बाद यह ठप पड़ गया. स्थिति यह है कि जलमीनार अब जर्जर हो चुका है. कभी भी हादसा हो सकता है, लेकिन संबंधित विभाग संवेदनहीन बना हुआ है.

क्या कहते हैं ग्रामीण जलापूर्ति को लेकर

ग्रामीणों का कहना है करोड़ों की लागत से बना यह जलमीनार सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गया है. जब उद्घाटन हुआ तो 6 महीना तक उनके घर तक पानी पहुंचा. लेकिन उसके बाद से यह ठप पड़ा हुआ है. लोगों को पानी के लिए या तो चापाकल में जाना पड़ता है या तो अपना खर्च कर बोरिंग करानी पड़ती है.

क्या कहते हैं अधिकारी

इस मामले में जब जामताड़ा प्रखंड के बीडीओ सह अंचल पदाधिकारी अविसर मुर्मू से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पेयजल समस्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा पेयजल संकट निवारण पखवाड़ा मनाया जा रहा है. जिसके तहत सभी पंचायत में ग्राम सभा कर खराब चापाकल टंकी को ठीक करने का काम किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सामान्य खराब चापाकल को एंटायर्ड फंड से ठीक कराया जाएगा और जो बड़े खर्चे पर ठीक होना है उसके लिए संबंधित विभाग पेयजल विभाग को लिखा जाएगा. पानी की समस्या से निजात दिलाने को लेकर एक तरफ सरकार करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है तो वहीं दूसरी तरफ इस भीषण गर्मी में लोगों को पानी के लिए जूझना पड़ रहा है.

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