हांसी के चानौत में फूटा जनाक्रोश, ग्रामीणों ने उखाड़ी पाइपलाइन, हांसी-बरवाला रोड किया जाम, बोले- "पानी दो या आंदोलन झेलो"
हांसी के चानौत में पेयजल संकट पर ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिला. ग्रामीणों ने पाइपलाइन उखाड़ कर विरोध जताया.

Published : June 1, 2026 at 5:18 PM IST
हांसी: जिले के गांव चानौत में पेयजल संकट को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है. सोमवार को आयोजित महापंचायत के बाद ग्रामीणों और किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया. प्रदर्शनकारियों ने गांव से हांसी की ओर जा रही पाइपलाइन को उखाड़ दिया और सड़क किनारे रखी पाइपों को सड़क पर डालकर हांसी-बरवाला रोड जाम कर दिया. इस दौरान सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई.
महापंचायत में प्रदेशभर से पहुंचे लोग: दरअसल, आज पेयजल की मांग को लेकर चानौत गांव में दूसरी बार महापंचायत आयोजित की गई. इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसान संगठनों, ग्रामीणों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया. बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने इस संघर्ष को क्षेत्रीय मुद्दे से प्रदेशव्यापी चर्चा का विषय बना दिया. महापंचायत में वक्ताओं ने गांव को स्थायी पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग दोहराई.

पाइपलाइन उखाड़कर जताया विरोध: महापंचायत के बाद ग्रामीणों ने गांव से हांसी की ओर बिछाई जा रही पाइपलाइन को उखाड़ दिया. इसके साथ ही सड़क किनारे रखी पाइपों को सड़क पर डाल दिया, जिससे हांसी-बरवाला रोड पर यातायात प्रभावित हो गया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, इसलिए उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा.
17 दिनों से जारी है धरना: ग्रामीण पिछले 17 दिनों से भाखड़ा पेयजल परियोजना के तहत हांसी शहर के लिए बिछाई जा रही पाइपलाइन का काम रुकवाकर धरने पर बैठे हुए हैं. उनकी मुख्य मांग है कि जिस पाइपलाइन से हांसी शहर को पेयजल उपलब्ध कराया जाना है, उसी लाइन से गांव चानौत को भी स्थायी पेयजल कनेक्शन दिया जाए. ग्रामीणों का कहना है कि जब उनके गांव के बीच से पाइपलाइन गुजर रही है तो उन्हें इस सुविधा से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए.
भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी रहे तैनात: आंदोलन बढ़ते देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया. प्रशासनिक अधिकारियों ने भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई. हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह अड़े रहे और उन्होंने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया.
"जब तक पानी नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा": आंदोलन कर रहे ग्रामीण नेता अनूप चानौत ने कहा कि, "जब तक गांव को स्थायी पेयजल आपूर्ति का समाधान नहीं मिलता, तब तक धरना और आंदोलन जारी रहेगा. आज पाइपलाइन उखाड़कर हमने अपना विरोध दर्ज कराया है. हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक इसी लाइन से गांव को पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता. ग्रामीण वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे हैं और अब धैर्य जवाब दे चुका है. इसलिए गांव के लोगों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है."
"चेतावनी के बावजूद नहीं लिया संज्ञान": वहीं, गांव के पूर्व सरपंच सत्यवान दूहन ने कहा कि, "गांव वर्षों से गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है. गर्मी के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं. हमने पहले ही प्रशासन और सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा. आज सड़क पर पाइपलाइन डालकर हमने अपना विरोध जताया है. जब तक गांव को पानी नहीं मिलेगा, तब तक धरना जारी रहेगा. सरकार को ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से समझना चाहिए."
पानी की मांग बना प्रदेशव्यापी मुद्दा: चानौत का यह आंदोलन अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं रह गया है. प्रदेशभर के किसान संगठनों और ग्रामीणों का समर्थन मिलने से यह संघर्ष एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.
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