नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट फेल! 8-8 दिनों तक नहीं नहाते लोग, पानी के लिए दर-दर भटकना मजबूरी
5000 आबादी को 'हर घर गंगा जल' का लाभ नहीं मिल रहा. प्यास बुझाने के लिए भीख मांगने की नौबत, पढ़ें रत्नेश कुमार की रिपोर्ट..

Published : May 18, 2026 at 4:12 PM IST
गयाजी: नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए गयाजी में 28 नवंबर 2022 को 7,174 करोड़ की लागत से हर घर गंगा जल योजना की शुरुआत की थी. उन्होंने उद्घाटन के दौरान एक घर में नल खोलकर एक ग्लास पानी भी पिया था, लेकिन गयाजी शहर वार्ड 34 की रहने वाली अकीरा खातून आज भी गिरती-पड़ती कभी एक तो कभी डेढ़ किमी दूर से पानी लाती है. कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि लंबी दूरी तय करने के बावजूद खाली बाल्टी लेकर लौटना पड़ता है.
सरकारी योजना एक छलावा: यह परेशानी सिर्फ अकीरा खातून की नहीं बल्कि वार्ड 34 के रहने वाले 500 घरों के 5000 लोगों की है. वार्ड 34 के निखिल कुमार, मोहम्मद आरिफ, सुनील प्रसाद चंद्रवंशी कहते हैं कि गंगा जल के नाम पर वार्ड में ब्लू पाइप लग गयी है, लेकिन दो से तीन साल से उसमें पानी नहीं आया. लोग कई-कई दिनों तक स्नान नहीं करते हैं. लोगों की इस समस्या से यही प्रतीत होता है कि यह सरकारी योजना एक छलावा है.
भीख मांगने को विवश: वार्ड 34 हिंदी स्कूल मोहल्ला की अकीरा खातून बताती हैं कि वह पानी के लिए भीख मांगने को विवश हैं. कभी उसके घर में गए, तो कभी अगले के घर में गए, फिर भी पानी नहीं मिल रहा है. 'पानी के बिना प्यासे हम लोग मर रहे हैं.' ईटीवी भारत से बातचीत में कहती हैं कि पानी लाने के जुगाड़ में निकले थे. पैदल जा रहे थे, तो गिर गए. पैर में चोट आ गई. पिछले डेढ़ साल से यह परेशानी बनी हुई है.
घर में एक बूंद पानी नहीं: अकीरा खातून को रोज एक-डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर गली-गली में पहुंचना पड़ता है. पानी की खोज करती हैं. किंतु फिर भी कई बार ऐसा हुआ, कि पानी नहीं मिला और खाली लौटना पड़ा. कहती हैं कि मेरे घर में एक बूंद पानी नहीं है. यहां गंगाजल का पाइप तो लगा दिया गया. किंतु गंगाजल का पानी आज तक नसीब में नहीं हुआ.
"हमलोग प्यासे मर रहे हैं. कोई पानी नहीं दे रहा है. कहां जाएं हमलोग? गंगाजल योजना से जो सप्लाई का पानी आता था वह बंद हो गया. वार्ड 34 के पार्षद से शिकायत किए तो कहा गया कि कोशिश करते हैं. वे भी कितना कोशिश करेंगे. प्रशासन ही ध्यान नहीं देता है." -अकीरा खातून, वार्ड 34 निवासी

5 दिनों पर आता है पानी: गेवाल बीघा अखाड़ा पर के रहने वाले निखिल कुमार बताते हैं कि गंगाजल का मीठा पानी तो नहीं मिला. उल्टे पुराने पाइप से सप्लाई का पानी भी नियमित रूप से आना बंद हो गया. कभी 4 दिन पर, कभी 5 दिन पर, कभी 3 दिन पर यह पानी आता है. हम लोग बाल्टी लेकर रोज इधर-उधर पानी की तलाश करने जाते हैं. वार्ड पार्षद का कहना है, कि इस मामले को लेकर अधिकारियों को कहा गया है. किंतु हम लोगों को पानी आज तक भी उपलब्ध नहीं हो रहा है.
"नहाने-खाने और कपड़ा धोने में काफी परेशानी होती है. सरकार की तरफ से सिर्फ ब्लू पाइप लगा दिया गया है. दिखाया गया है कि पानी की सप्लाई हो रही है, लेकिन हकीकत कुछ और है. सप्लाई का पानी नहीं आ रहा है." -निखिल कुमार, स्थानीय युवा
'पानी के लिए सर्च अभियान': मोहम्मद आरिफ बताते हैं, कि हिंदी स्कूल मोहल्ले में पानी की काफी समस्या है. हम लोग रोज पानी ढूंढने जाते हैं. फिर भी पानी नहीं मिलता है. खाली बाल्टी लेकर लौटना पड़ता है. पता लगाना पड़ता है, कि पानी कहां चल रहा है, तब जाकर पीने भर का पानी मिल पाता है. हम लोग रात भर परेशान रहते हैं. ठीक से नींद भी नहीं आती. पानी की सोच बनी रहती है.
हाथी का दांत बना ब्लू पाइप: 1 किलोमीटर दूर से पानी लाने की मजबूरी है. गारंटी नहीं है, कि पानी मिल ही जाए. ब्लू पाइप यानी गंगाजल का पाइप लगा दिया गया है, जिसमें पानी तो आ नहीं रहा, किंतु पुराना सप्लाई से पानी भी बंद हो गया है. गेवाल बीघा अखाड़ा, हिंदी स्कूल दक्षिणी, हिंदी स्कूल पश्चिमी, कोईरी बीघा समेत अन्य मोहल्ले के लोग काफी परेशान है. हम लोग संबंधित विभाग और गया के जिला पदाधिकारी से मांग करते हैं कि हमें पानी की उपलब्धता कराई जाए

"सरकार की ओर से मीठा पाने के लिए ब्लू पाइप लगा दिया गया है, लेकिन उसमें पानी नहीं आ रहा है. हाल में तो चार दिन से पानी नहीं आया है. लोगों को काफी परेशानी हो रही है. इस वार्ड में सिर्फ पानी की नहीं बल्कि साफ-सफाई की भी समस्या है. पिछले 25 साल से जितने वार्ड पार्षद आए हैं, किसी ने कोई काम नहीं किया है." - मोहम्मद आरिफ, स्थानीय
'8 दिनों तक नहीं नहाते..': सुनील कुमार चंद्रवंशी बताते हैं, कि 'पिछले 8 दिनों से स्नान नहीं किया हूं. पानी पीने भर ही जुगाड़ हो पा रहा है. बाल बच्चे भी स्नान ठीक से नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में स्कूल भेजने के लिए भी सोचना पड़ रहा है. गैलन में भरकर पानी लाते हैं, तब जाकर उसे पीते हैं. कई कई दिनों तक नहीं नहाते हैं. यह स्थिति काफी समय से बनी हुई है.
"हम मांग करते हैं कि प्रशासन पानी का जुगाड़ कर दे. नियमित तौर पर हमारे वार्ड नंबर 34 के क्षेत्र में पानी आए. क्योंकि इस क्षेत्र की बड़ी आबादी नियमित पानी सप्लाई से वंचित हो रही है." - सुनील चंद्रवंशी, पीड़ित.
'हमारा इलाका ड्राई जोन': वार्ड में इस तरह की समस्या को लेकर वार्ड पार्षद शीला देवी के प्रतिनिधि ओम यादव बताते हैं, कि वह खुद इस परेशानी को देखकर विचलित हो रहे हैं. कहते हैं कि हमारा इलाका ड्राई जोन है. यहां कम से कम 400 फीट बोरिंग की आवश्यकता है. किंतु सिर्फ 200 फीट पर ही बोरिंग कर दिया जाता है, जिसके कारण वह बोरिंग कामयाब नहीं होता. पानी की समस्या जस की तरह जाती है.

बिछाकर छोड़ दिया गया: गंगा जल योजना पर कहते हैं कि गंगा जल की स्थिति भी सही नहीं है. कभी पुराना सप्लाई पानी आता है, कभी नहीं आता है. गंगाजल का पाइप बिछाकर छोड़ दिया गया. आज तीन दिनों के बाद कुछ समय के लिए पानी आया. फिर यह कब गायब हो जाएगा और कितने दिनों बाद आएगा, कुछ कहा नहीं जा सकता है. अधिकारी भी स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बताते हैं.
"यहां हमारे वार्ड में 10000 लोगों तक पानी सही तरीके से आ रहा है, जबकि 5000 लोगों तक पानी ठीक से नहीं पहुंच पा रहा है. पानी की समस्या बनी हुई है. बुडको को अधिकारी से बात करने पर रहते हैं कि कभी पाइप फट गया तो कभी कर्मचारी हड़ताल पर हैं. हमें और जनता को अधिकारियों के इस बात से क्या लेना देना. हमारी जनता को किसी भी सूरत में पानी चाहिए." -ओम यादव, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड 34
4,174 करोड़ परियोजना की लागत: हर घर गंगा जल नीतीश कुमार की महत्वकांक्षी परियोजना थी. इस परियोजना की कुल लागत 4,174 करोड़ है. हालांकि मूल रूप से योजना की स्वीकृति 2,836 करोड़ थी, लेकिन कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन को लेकर परियोजना में काफी देरी हुई. इस कारण इसकी लागत 4,174 करोड़ हो गई. साल 2022 में तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार ने इसका उद्घाटन किया था.

योजना का उद्देश्य: इस योजना का उद्देश्य दक्षिण बिहार के सूखाग्रस्त शहरों (राजगीर, गया, बोधगया और नवादा) में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है. मोकामा के पास हथिदह से गंगा नदी का पानी पाइपलाइन के जरिए उठाया जाता है, जो राजगीर और गया से लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है, लेकिन 4,174 करोड़ की इस भारी-भरकम योजना के बावजूद धरातल पर स्थिति क्या है, लोगों की हालात से अंदाजा लगाया जा सकता है.
बुडको को पानी सप्लाई की जिम्मेदारी: बुडको को गंगाजल के पानी सप्लाई की जिम्मेदारी दी गई है. पाइप बिछाने की भी जिम्मेदारी दी गई. किंतु गया शहर के वार्ड संख्या 34 के हिंदी मोहल्ला, अखाड़ा पर, कोईरी बगीचा, हिंदी स्कूल के दक्षिणी और पश्चिम क्षेत्र के हालात बता रहे हैं, कि बुडको के जिम्मेदार कितने लापरवाह है. इस संबंध में बुडको के अधिकारी त्वरित कार्रवाई नहीं करते हैं. बुडको के कार्यपालक अभियंता का दावा है कि पानी की सप्लाई हो रही है. जल्द समस्या का निदान निकाल लिया जाएगा.

"पानी नहीं जाने की समस्या की बात सामने आ रही थी, जिसे कई स्थानों पर दूर किया गया है. किंतु अभी वार्ड 34 में सैंकड़ों घरों तक गंगाजल का पानी नहीं पहुंच रहा है, इस मामले वे देखेंगे और जल्द ही पानी की उपलब्धता का प्रयास कराया जाएगा. हम चाहेंगे कि पूरे शहर में नियमित तरीके से पानी की आपूर्ति हो." -अशोक कुमार, कार्यपालक अभियंता, बुडको गया.
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