अस्पताल के पोस्टमॉर्टम हाउस में सालों से रखे हैं सैकड़ों विसरे, जांच के इंतजार में होने लगे खराब
समस्तीपुर में पोस्टमॉर्टम हाउस में सालों से सैकड़ों विसरे यूं ही पड़े हुए हैं. अब तो ये खराब भी होने लगे हैं. पढ़ें..

Published : January 9, 2026 at 3:01 PM IST
समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर में पुलिस-प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता के कारण सालों-साल से पोस्टमॉर्टम हाउस में सैकड़ों विसरे रखे हैं, जोकि धीरे-धीरे अब खराब होने लगे हैं. सदर अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस से लेकर जिले के विभिन्न थानों तक वर्षों पुराने विसरे जांच के नाम पर रखे हुए हैं.
सड़ने लगे हैं विसरे: मुफस्सिल थाने पर मालखाना के पास तो विसरा झोले में लटक रहे हैं. अब तो रखे-रखे झोले भी सड़ गए हैं. इसमें से कुछ विसरा मुजफ्फरपुर स्थित लैब से जांच होकर वापस भी थाना पर आ चुका है लेकिन इसे रखने के लिये पर्याप्त जगह ना होने पर थाने में ऐसे ही पड़े हुए हैं. अमूमन जिले के हर थानों का यही हाल है. इधर पोस्टमार्टम हाउस परिसर में दो कमरों में मृतकों का दशकों पुराना विसरा भी जांच के नाम पर रखा-रखा सड़-गल गया है.
कमरे में रखे हैं सालों पुराने विसरे: अस्पताल में कार्यरत एक पोस्टमार्टम कर्मी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि 150 वर्ष से भी अधिक पुराना विसरा भी सदर अस्पताल में रखा हुआ है, जो अब पूरी तरह से सड़-गल चुका है. उनके परिवार की 5 पीढ़ी यहां पोस्टमार्टम करते रहे हैं. वह भी सदर अस्पताल में 25 वर्षों से कार्यरत है. मेरी फैमिली के लोग अंग्रेजों के जमाने से पोस्टमोर्टम कार्य से जुड़े रहे हैं.

"150 वर्ष से भी अधिक समय का विसरा ऐसे ही पोस्टमार्टम हाउस में रखा हुआ है. अधिकांश तो अज्ञात लोगों से ही संबंधित है. कुछ विसरा जहर खाने या खिलाने से हुई मौत के बाद जिसका पोस्टमार्टम कराया गया था, वैसे लोगों का रखा हुआ है."- पोस्टमोर्टम कर्मी, सदर अस्पताल, समस्तीपुर
क्या है विसरे रखने के नियम?: सरकारी नियमों के अनुसार विसरे को सुरक्षित रखने के लिए वातानुकूलित भवन की व्यवस्था अनिवार्य है. कमरा साफ-सुथरा होना चाहिए. जिसमें न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 25 डिग्री सेल्सियस निर्धारित है लेकिन समस्तीपुर में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है. बिना किसी वैज्ञानिक सुरक्षा व्यवस्था के इसे रखा गया है.
डिब्बे को लकड़ी के बॉक्स में रखना चाहिए: जानकार बताते हैं कि विसरा को मृतक के शरीर से बाहर निकालने के बाद उसे डिब्बा में बंद करने से पहले उसमें समुचित मात्रा में फोर्मेलिन नामक रासायनिक पदार्थ डालना चाहिए. उसके बाद डिब्बे को एक लकड़ी के बॉक्स में रखा जाना चाहिए लेकिन यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. जीर्ण-शीर्ण स्थिति में विसरा को रखा गया है, जिस वजह से ज्यादातर अब खराब हो चुके हैं.

क्या बोले सिविल सर्जन?: समस्तीपुर के सिविल सर्जन डॉ. एसके चौधरी ने बताया कि 15-20 साल पुराने विसरे ही यहां रखे हुए हैं. जो हाल के विसरे हैं, उन्हें जांच के लिए फौरन भेज दिया जाता है. एक कमरे में जो पुराने विसरे पड़े हुए हैं, इसके लिए हमने तय किया है कि पुलिस लाइन के वरीय पदाधिकारी से बात करेंगे. बातचीत के बाद कमिटी बनाकर वैसे पुराने विसरे जो अब जांच के लायक भी नहीं हैं, उन्हें वहां से हटा देंगे.
"सदर अस्पताल में विसरा को सुरक्षित रखा जाता है. इसके जांच की जिम्मेदारी पुलिस की होती है. पुलिस को जब जरूरत पड़ती है, वह अस्पताल से विसरा लेकर एफएसएल को भेजती है. पुराने विसरे को हटाने पर जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा."- डॉ. एसके चौधरी, सिविल सर्जन, समस्तीपुर
क्या है विसरा रिपोर्ट?: दरअसल, जब संदिग्ध मौत के मामले में मृत्यु के कारण का सही-सही पता नहीं चल पाता है, तब विसरा जांच की जरूरत पड़ती है. इसके लिए पोस्टमॉर्टम के दौरान शरीर के आंतरिक अंगों (जैसे लीवर, किडनी, फेफड़े और आंत) के नमूने लेकर जहर या बीमारी का पता लगाने के लिए लैब में भेजा जाता है. आमतौर पर रिपोर्ट आने में 15 दिन से एक महीने तक लग सकता है लेकिन जटिल मामलों में ज्यादा समय भी लग सकता है. वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट 7-21 दिनों में आ जाती है.
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