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बागपत को यमुना की बाढ़ से बचाने वाली 'सुरक्षा दीवार' अधूरी, डेडलाइन पूरी, जानिए कितना काम अभी बाकी

जागोस और शबगा में कितना निर्माण हुआ, आखिर देरी की वजह क्या और क्या कह रहे अधिकारी?

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जागोस में 65% और शबगा में सिर्फ 30% ही पूरा हुआ ठोकर निर्माण (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : July 8, 2026 at 1:48 PM IST

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Updated : July 8, 2026 at 2:21 PM IST

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बागपत: जनपद में यमुना की संभावित बाढ़ से गांवों को सुरक्षित रखने के लिए चल रही करोड़ों रुपये की बाढ़ सुरक्षा परियोजना समय सीमा बीतने के बाद भी अधूरी है. जागोस और शबगा गांव में करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा ठोकरों (Spurs) का निर्माण कार्य 29 जून तक पूरा होना था, लेकिन अब तक जागोस में करीब 65 प्रतिशत और शबगा में मात्र 30 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है. मानसून की दस्तक के बीच निर्माण की इस धीमी रफ्तार ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है.

जागोस में 65% और शबगा में सिर्फ 30% ही पूरा हुआ ठोकर निर्माण (Video Credit; ETV Bharat)

दरअसल, जागोस और शबगा गांव को यमुना की बाढ़ से होने वाले कटान और बाढ़ से बचाने के उद्देश्य से करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से ठोकर का निर्माण कराया जा रहा है. हालांकि निर्माण कार्य समय पर न होने से अब वह सवालों के घेरे में है. ग्रामीणों का कहना है कि शबगा गांव में कार्य देरी से शुरू हुआ क्योंकि ग्रामीण ठोकर के बजाय मजबूत तटबंध (बांध) बनाए जाने की मांग कर रहे थे. उनका आरोप है कि उनकी आपत्तियों के बावजूद ठोकर का निर्माण गांव के खेतों से सटाकर किया जा रहा है, जबकि इसे यमुना की धारा की ओर करीब एक किलोमीटर अंदर बनाया जाना चाहिए था.

शबगा निवासी ओमप्रकाश, धर्मेंद्र पंवार, शिवकुमार, कुलदीप, उपेंद्र पंवार, राजकुमार आदि का कहना है कि यदि यमुना में जलस्तर तेजी से बढ़ा तो वर्तमान स्थान पर बनाई जा रही ठोकर तेज बहाव का सामना नहीं कर पाएगी. उनका दावा है कि इससे न केवल निर्माण को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि पिछले वर्ष की तरह खेतों और गांवों को भी भारी क्षति उठानी पड़ सकती है.

ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ तकनीकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बाढ़ से राहत मिलने की उम्मीद अधूरी रह जाएगी.

गौरतलब है कि गत वर्ष यमुना में आई बाढ़ से जिले में सबसे अधिक नुकसान शबगा और जागोस गांव में हुआ था. अकेले शबगा गांव में किसानों की 7000 बीघा जमीन फसल समेत यमुना की धार में बह गई थी. इतनी बड़ी संख्या में मिट्टी कटान होने के अलावा दो दर्जन से अधिक निजी ट्यूबवेल व आधा दर्जन सरकारी ट्यूबवेल, दो दर्जन से विद्युत पोल, नलकूप आदि यमुना में बह गया था. किसान इस बार फिर से मानसून शुरू होने के बाद सहमा हुआ है.

इस मामले में सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता रजनीश कुमार ने कहा कि वैसे तो यमुना में ठोकर बनाने का कार्य 29 जून तक समाप्त होना था, लेकिन इस कार्य को पूरा होने में अभी 20 दिन और लग जाएंगे. जागोस में शबगा के मुकाबले अधिक कार्य हो चुका है. शबगा में ग्रामीणों के विरोध के चलते कार्य देरी से शुरू हो सका था.

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Last Updated : July 8, 2026 at 2:21 PM IST