ग्रामीणों ने रेंजर सहित वन कर्मियों का किया घेराव, विभाग की गाड़ी में आग लगाने की भी दी चेतावनी
बोकारो में हाथियों का आतंक से लोग परेशान हैं. गोमिया में लोगों ने रेंजर का घेराव किया.


Published : February 7, 2026 at 3:17 PM IST
बोकारो: जिले के गोमिया में जंगली हाथियों के हमलों से नाराज गांव वालों ने वन विभाग की टीम को घेर लिया. गांव वाले काफी आक्रोशित थे. उन्होंने वन विभाग की गाड़ियों में आग लगाने की धमकी भी दी.
इस इलाके में हाथियों का आतंक लगातार बना हुआ है. इन हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है. पिछले तीन दिनों में, एक चार साल के बच्चे समेत पांच लोगों की हाथी के हमले में मौत हो गई है.
शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे, महुआ टॉड पुलिस थाना इलाके के गांगपुर गांव में हाथी के हमले में एक ही परिवार के दो लोगों की मौत हो गई. तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. मरने वालों में 50 साल के सोमर साव और उनका 4 साल का पोता अमन कुमार शामिल थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक हाथी अचानक गांव में घुस आया और घरों के पास लोगों पर हमला कर दिया.

गांव वालों ने मौके पर पहुंचे गोमिया क्षेत्र के रेंजर को घेर लिया. पूर्व JLKM उम्मीदवार पूजा महतो ने रेंजर से सवाल किया कि जंगल में अवैध खनन और पेड़ों की कटाई क्यों नहीं रोकी जा रही है, क्योंकि इन गतिविधियों से जंगल बर्बाद हो रहा है और जंगली जानवर गांवों में घुस रहे हैं, जिससे लोगों पर हमले हो रहे हैं.

इस घटना के बारे में बोकारो रेंजर बटुकेश्वर पासवान ने कहा कि वह और उनकी क्विक रिस्पॉन्स टीम हाथियों को भगाने के लिए दिन-रात काम कर रही है. उन्होंने बताया कि घटना में मरने वालों के परिवारों को तुरंत ₹25,000 का मुआवजा दिया जा रहा है, और घायलों को भी ₹25,000 के साथ-साथ विभाग द्वारा उनके इलाज का खर्च का पूरा भुगतान किया जा रहा है. मरने वालों के परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार ₹4 लाख का मुआवजा भी मिलेगा.

गांव वालों ने साफ तौर पर मांग की है कि प्रशासन और वन विभाग प्रभावित परिवारों को तुरंत मुआवजा दे, इलाके में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था करे, और जंगली हाथियों के आतंक को खत्म करने के लिए एक स्थायी और प्रभावी समाधान लागू करे. लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी है. किसी भी हालत में गांव वालों को असुरक्षित छोड़ना मंजूर नहीं है. ऐसी घटनाओं की दोबारा होने पर कड़ी जवाबदेही तय की जानी चाहिए. इस मामले में बोकारो डीएफओ संदीप शिंदे ने कहा, "हमारे लोग अभी भी वहां गांव वालों के कब्जे में हैं, और हाथी अभी भी बोकारो जंगल इलाके में है."
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