प्रदूषण से परेशान गिरिडीहवासी, स्पंज प्लांट का खुलेआम विरोध, जनसुनवाई में जमकर नारेबाजी
प्रदूषण का दंश झेल रहे गिरिडीह औद्योगिक क्षेत्र के लोग अब बड़े प्लांट लगने नहीं देना चाहते. उन्होंने प्रस्तावित परियोजना का विरोध किया.

Published : October 26, 2025 at 11:31 AM IST
गिरिडीह: जिले का औद्योगिक इलाका प्रदूषण के कारण पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो चुका है. प्रदूषण का कुप्रभाव ऐसा पड़ा है कि जमीनें बंजर हो गई, कई बच्चे दिव्यांग पैदा हुए, कइयों को बीमारी हो गई तो कई की जान चली गई. ऐसे में प्रदूषण पर रोक लगाने की मांग लगातार उठती रही है. इस क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोग प्रदूषण से पूरी तरह से निजात चाहते हैं. यही कारण है कि आए दिन धरना-प्रदर्शन होता रहता है. यहां के लोग अब क्षेत्र में बड़ी परियोजना को लगने देना नहीं चाहते.
लोग कहते हैं कि जान बचेगी तो बहुत काम मिलेगा. इसी प्रदूषण के कारण फिर से लोगों ने सदर प्रखंड के चतरो में स्थित प्लांट के प्रस्तावित विस्तारीकरण परियोजना का खुले आम विरोध कर दिया. यहां इस परियोजना के लिए एक साल बाद फिर से जनसुनवाई हुई लेकिन इस सुनवाई में लोगों ने खुलकर अपने गुस्से का इजहार कर दिया. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद की तरफ से सदर प्रखंड के मंझलाडीह में आयोजित पर्यावरणीय लोक सुनवाई में पहुंचे ग्रामीण काफी गुस्से में दिखे.
सदर अनुमंडल पदाधिकारी श्रीकांत विस्पुते की मौजूदगी में लोग हाथ में तख्ती लेकर पहुंचे थे. तख्ती के साथ पहुंचे लोग बस एक ही बात कह रहे थे परियोजना का विस्तारीकरण किया गया तो लोग तिल-तिल कर मरेंगे. जीना दूभर हो जाएगा.
चेयरमैन के भाषण का खुलकर विरोध
इस कार्यक्रम के दौरान कंपनी के चेयरमैन गुणवंत सिंह मोंगिया ने जब लोगों को सम्बोधित करना शुरू किया और विस्तार से बात रखनी चाही तो लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया. हालांकि इन सबों के बीच गुणवंत सिंह मोंगिया ने कहा 'यूनिट के एक भी प्लांट से प्रदूषण नहीं फैलता है और इस प्लांट से हल्का सा भी प्रदूषण फैला तो उसी दिन प्लांट को बंद कर देंगे'. परन्तु लोगों ने इनकी एक नहीं सुनी.
क्या बोले ग्रामीण
यहां ग्रामीणों ने अपना पूरा दुख बताया. बताया कि प्रदूषण से जीना तो दूभर हो ही गया है लोगों को पीने का पानी भी नहीं मिल रहा है. कई फैक्ट्री के मालिकों ने हजार-हजार फीट बोरिंग करवा लिया है जिससे गांव-गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. कई चापानल से पानी नहीं मिल रहा है. फसल होता नहीं, क्या मनुष्य, क्या मवेशी सभी बीमार हो रहे हैं. यहां ग्रामीण संतोष कुमार मल्लाह ने कहा कि स्पंज प्लांट से सिर्फ प्रदूषण होगा सबसे ज्यादा जल प्रदूषण होगा. ऐसे में प्लांट लगना ही नहीं चाहिए.
इस दौरान एक ग्रामीणों ने फैक्ट्री संचालकों पर दोहरी नीति का सीधा आरोप लगाया कहा कि जब फैक्ट्री खोलने का समय आता है तो जन सुनवाई होती है. फैक्ट्री के संचालक स्थानीय लोगों को रोजगार का सब्जबाग दिखाते हैं और जब फैक्ट्री खुल जाती है तो स्थानीय को काम पर रखा ही नहीं जाता है.
रिपोर्ट में रहेगी पूरी पारदर्शिता : एसडीएम
यहां जनसुनवाई के दौरान मौजूद एसडीएम श्रीकांत विस्पुते ने लोगों को सम्बोधित करते हुए साफ कहा कि सभी की बातों को सुना गया है, नोट किया गया, वीडियो रिकॉर्डिंग हुई है और पूरी रिपोर्ट डीसी को सौंप दी जाएगी. रिपोर्ट वेबसाइट पर दिखेगा. यही रिपोर्ट ऊपर जाएगा. इसी रिपोर्ट के बाद ही सीटीओ मिलेगा या नहीं वह तय होगा. प्रोजेक्ट होना या नहीं होना इसका निर्णय प्रशासन नहीं करता है. बहुत सारे प्रोसीजर है अभी यह पहला प्रोसीजर है.
दूसरी दफा हो गया विरोध
दरअसल, गिरिडीह सदर प्रखंड के चतरो मौजा में कंपनी द्वारा स्पंज आयरन की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, डीआरआई कीलन स्थापित करने, इंडक्शन फर्नेस के साथ री-हीटिंग फर्नेस, टीएमटी बार प्रोडक्शन के लिए रोलिंग मिल और 25 मेगावाट का कैप्टिव पवार प्लांट स्थापित करने समेत अन्य तरह के उत्पादन करने का प्रस्ताव है. इस प्लांट को लेकर सितंबर 2024 में भी जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित हुआ था. उस दौरान भी विरोध हुआ और लोगों ने प्लांट लगाने की अनुमति देने से साफ इंकार कर दिया था. इस बार भी लोगों ने खुलकर विरोध किया है.
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