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देवघर में है सब्जी वाला गांव रमलडीह, किसान करते हैं केवल सब्जियों की खेती

देवघर का एक गांव है, जिसे सब्जी वाला गांव के नाम से लोग जानते हैं. यहां सालों भर केवल सब्जियों की ही खेती होती है.

VEGETABLES VILLAGE IN DEOGHAR
ग्राफिक्स इमेज (ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : December 30, 2025 at 7:04 PM IST

4 Min Read
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देवघर: देश में किसी भी गांव के लिए खेती मुख्य पेशा होता है. मौसम के हिसाब से किसान अपने खेतों में फसल उगाते हैं. क्योंकि अपने देश में खेती पूरी तरह से मौसम पर निर्भर है. जैसे गर्मी के मौसम में किसान धान लगाते हैं, वैसे ही कई किसान ठंड के मौसम में गेहूं उपजाने का काम करते हैं, लेकिन देवघर जिले में एक ऐसा गांव है, जहां सालों भर सिर्फ सब्जियों की ही खेती होती है. गांव के एक-एक ग्रामीण सब्जी की खेती करके ही अपना जीवन यापन करते हैं.

देवघर जिले के रमलडीह गांव में लगभग 400 परिवार रहते हैं. गांव के सभी परिवार सिर्फ सब्जी की ही खेती करते हैं. गांव में सब्जी की खेती को लेकर स्थानीय लोगों ने बताया कि पूरे गांव में करीब डेढ़ सौ एकड़ खेती योग्य भूमि है. जिसमें सब्जियों की खेती होती है. लोगों ने कहा कि इस गांव से उगने वाली सब्जी बिहार और झारखंड के कई जिलों के बाजार तक जाते हैं.

संवाददाता हितेश कुमार की रिपोर्ट (ईटीवी भारत)

अच्छी आमदनी करते हैं किसान

रमलडीह गांव के किसानों ने कहा कि वो सिर्फ और सिर्फ सब्जियों की खेती कर अपना जीवन यापन करते हैं. अनाज की खेती ना के बराबर होती है. किसान कारु मरीक बताते हैं कि इस गांव में गोभी, आलू, प्याज, टमाटर, मटर, बैगन, तरबूज, भिंडी, बैगन और पालक सहित कई सब्जियां होती हैं. सब्जियों को समय पर बाजार पहुंचा कर अच्छी आमदनी भी करते हैं.

गांव में सब्जी की खेती करने की है परंपरा

किसान नकुल चौधरी बताते हैं कि गांव में अनाज की खेती कोई भी नहीं करता है. इस गांव में वर्षों से सब्जी की खेती करने की परंपरा है. गांव की मिट्टी अब सब्जी के लिए उपजाऊ हो गई है. सब्जी की खेती से गांव की तस्वीर भी बदल रही है. वहीं किसान दिनेश चौधरी बताते हैं कि अनाज की खेती करने से उतनी आमदनी नहीं होती है, जितनी आमदनी सब्जी की खेती से होती है. इसलिए किसान सब्जी की खेती पर सबसे ज्यादा जोर देते हैं.

vegetables village in Deoghar
लहलहाती बंधा गोभी (ईटीवी भारत)

सरकारी स्तर से नहीं मिल रही है मदद

वहीं जब सरकारी मदद की बात की गई तो किसानों ने कहा कि सरकारी स्तर पर कोई मदद नहीं मिल पा रही है. लोगों ने कहा कि बीज वितरण के समय कुछ किसानों को बीज उपलब्ध करा दिए जाते हैं. लेकिन खाद्य और सिंचाई की व्यवस्था सरकारी स्तर पर नहीं हो पाती है. किसानों ने कहा यदि सरकार की तरफ से मुकम्मल व्यवस्था दी जाती तो तस्वीर और भी अलग होती. हालांकि बिना सरकारी मदद के ही सब्जी की खेती से कई किसानों ने झोपड़ी की जगह अब पक्के मकान बना लिए हैं तो कई किसानों के घर पर गाड़ियां भी देखने को मिल रही हैं.

नियम पालन नहीं करने से योजना का लाभ नहीं मिल रहा है: अधिकारी

रमलडीह किसानों की समस्या को लेकर ईटीवी भारत की टीम ने जिले के उद्यान पदाधिकारी यशराज कुमार से बात की. उन्होंने कहा कि सब्जी की खेती के लिए कई योजनाएं सरकार की तरफ से चलाई जा रही हैं. इस गांव में भी कई किसानों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है. लेकिन जिन किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वो कहीं ना कहीं सरकारी नियमों का पालन नहीं कर पा रहे हैं. इसीलिए वो सरकारी योजनाओं से वंचित हैं.

जिला उद्यान पदाधिकारी यशराज कुमार ने कहा कि जल्द ही वो रमलडीह गांव का दौरा करेंगे. इस दौरान स्थानीय कृषि मित्र से बात कर किसानों को बेहतर सुविधा देने के दिशा निर्देश भी देंगे. बता दें कि इस गांव के किसानों को देखकर अब आसपास के गांव में भी लोग सब्जी की खेती पर जोर दे रहे हैं. लेकिन जरूरत है कि सरकारी संसाधन किसानों तक पहुंचे. ताकि किसान उन्नत तरीके से खेती कर अपनी और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को और भी मजबूत कर सके.

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