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लातेहार के सलैपुर में अफीम की जगह उग रही हरी सब्जियां, ग्रामीणों ने नशे की खेती से की तौबा

लातेहार के किसानों ने पुलिस और जिला प्रशासन के जागरूकता अभियान से प्रभावित होकर अफीम की खेती छोड़कर सामान्य खेती शुरू कर दी है.

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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : December 18, 2025 at 5:11 PM IST

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लातेहार: जिले के किसानों ने अफीम की खेती छोड़ परंपरागत खेती शुरू कर दी है. यहां के किसान अब अपराध का रास्ता छोड़कर सादगी वाला जीवन जीने पर जोर दे रहे हैं. दरअसल, बालूमाथ थाना क्षेत्र अंतर्गत सलैपुर गांव में पुलिस और जिला प्रशासन ने मिलकर अफीम की खेती के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया था, जिसका असर अब गांव में देखने को मिल रहा है.

अब नगदी फसल कर आजीविका चला रहे ग्रामीण

दरअसल, पिछले साल इस गांव के कुछ लोग अफीम तस्करों के चंगुल में फंसकर अफीम की खेती करते रहे लेकिन इस साल गांव में अफीम का एक पौधा भी नहीं लगा है. यहां के ग्रामीण खेतों में अनाज और दूसरी तरह की फसल उगाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं.

गांव में आए बदलाव की जानकारी देते संवाददाता राजीव कुमार (Etv bharat)

नक्सल प्रभावित रहा है ये इलाका

लातेहार जिले का सलैपुर गांव बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत बालू पंचायत में स्थित है. कुछ वर्षों तक यह इलाका नक्सलियों के प्रभाव में था. सड़क तथा अन्य सुविधाओं के अभाव में यह गांव पूरी तरह विकास से वंचित रह गया था. सुदूरवर्ती गांव रहने के कारण अफीम तस्करों ने यहां के कुछ ग्रामीणों को अपने झांसे में फंसाया और लालच देकर अफीम की खेती शुरू की.

अफीम की खेती के लिए तस्कर करते थे ग्रामीणों को भ्रामित

तस्करों द्वारा अफीम की फसल से लेकर अन्य प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराए जाने के कारण कुछ ग्रामीण अफीम तस्करों की चंगुल में फंस गए और सलैपुर गांव में अफीम की खेती करने लगे. हालांकि गांव के दूसरे ग्रामीणों को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रहने के कारण इसका विरोध नहीं होता था.

vegetable crop in latehar
सलैपुर गांव जाने का रास्ता (Etv bharat)

जागरूकता अभियान और दबिश ने बदली गांव की तस्वीर

लातेहार जिले में लगातार बढ़ रही अफीम की खेती के प्रचलन को रोकने के लिए लातेहार पुलिस द्वारा व्यापक पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ अफीम की खेती के खिलाफ दबिश दी गई. पिछले दो-तीन वर्षों में पुलिस ने अफीम की खेती करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. पिछले साल लगभग 800 एकड़ भूमि में लगाए गए अफीम की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया था. इसके साथ ही कुछ लोगों पर प्राथमिकी भी दर्ज की गई.

vegetable crop in latehar
ग्रामीणों द्वारा तैयार सरसों की फसल (Etv bharat)

जागरूकता अभियान से ग्रामीणों ने छोड़ी अफीम की खेती

इस साल सितंबर के महीने से ही गांव में अफीम की खेती के खिलाफ जागरूकता अभियान बड़े पैमाने पर चलाया गया. जिसका असर भी साफ देखने को मिला है. सलैपुर गांव में अफीम की खेती पूरी तरह बंद है. यहां के सभी ग्रामीण फिर से सब्जी और अनाज की खेती कर रहे हैं. स्थानीय ग्रामीण रमेश गंझु, संजय उरांव, राजेश कुमार, बिट्टू सिंह राजपूत आदि ग्रामीणों ने बताया कि पहले गांव में कुछ लोग अफीम की खेती करते थे लेकिन गांव का कोई भी व्यक्ति इस वर्ष अफीम की खेती नहीं किया है. ग्रामीणों ने कहा कि गलत काम से कभी भी फायदा नहीं होता है, इससे सिर्फ नुकसान ही नहीं होता है.

एसपी ने की ग्रामीणों की प्रशंसा

इधर लातेहार पुलिस के जागरूकता अभियान से प्रभावित होकर ग्रामीणों के द्वारा अफीम की खेती से पूरी तरह तौबा कर लेने और वैकल्पिक फसल से जुड़ जाने के काम की लातेहार एसपी कुमार गौरव ने जमकर तारीफ की है.

अच्छे और सकारात्मक कार्य करने वाले ग्रामीणों को पुलिस और जिला प्रशासन हर कदम पर सहयोग देने के लिए तैयार है. ग्रामीण भी तारीफ के योग्य हैं: कुमार गौरव, एसपी

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