लातेहार के वन क्षेत्र में शीशल प्लांट लगाने से जंगल हुआ वीरान, ग्रामीणों में भारी नाराजगी
लातेहार के जंगलों में लगाए गए शीशल प्लांट से ग्रामीणों में नाराजगी हैं. लोगों का कहना है इससे जंगल वीरान हो गया है.

Published : February 19, 2026 at 3:24 PM IST
लातेहार: जंगलों को सुरक्षित और हरा भरा रखना वन विभाग का प्राथमिक कार्य है. लेकिन लातेहार में वन विभाग की तकनीकी लापरवाही के कारण माको गांव के बगल में स्थित जंगल का एक बड़ा हिस्सा वीरान हो गया. वन विभाग के द्वारा यहां शीशल के पौधे लगा दिए गए. जबकि शीशल प्लांट को बंजर जमीन में लगाया जाता है.
शीशल प्लांट से ग्रामीणों में क्यों है नाराजगी
दरअसल लातेहार जिला मुख्यालय से सटे माको जंगल में वन विभाग की शीशल यूनिट के द्वारा हरे भरे और सुरक्षित वन क्षेत्र में शीशल के पौधे लगा दिए गए. शीशल के पौधे पूरी तरह झाड़ीनुमा पौधे होते हैं. जिसका ग्रामीणों के दैनिक जीवन में कोई उपयोग नहीं होता है. ऐसे पौधे लगाए जाने से ग्रामीणों को जंगल से किसी प्रकार का कोई लाभ या सुविधा नहीं मिल पाएगा. इसी मामले को लेकर ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां फलदार अथवा दूसरे पेड़ लगाए जाते तो इसका लाभ स्थानीय ग्रामीणों को मिलता. लाभ मिलने से ग्रामीण जंगल को बचाने के प्रति दिलचस्पी भी दिखाते. लेकिन झाड़ीनुमा पौधा लगाए जाने के कारण अब ग्रामीणों को ऐसे जंगल से कोई लाभ नहीं मिल पाएगा.
स्थानीय ग्रामीण कुलदीप सिंह, इंद्रजीत सिंह, मोहन सिंह आदि लोगों का कहना है कि शीशल के पौधे लगाए जाने के दौरान ग्रामीणों के द्वारा विरोध भी जताया गया था. लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी. ग्रामीणों ने कहा कि यदि यहां फलदार वृक्ष लगा दिए जाते तो जंगल की खूबसूरती भी बढ़ती और ग्रामीणों को इसका लाभ भी मिलता.
क्या होता है शीशल प्लांट
शीशल एक प्रकार का झाड़ीनुमा पौधा होता है, जिसे स्थानीय भाषा में मुरब्बा भी कहते हैं. इसका मुख्य उपयोग रस्सी बनाने में किया जाता है. लातेहार मुख्यालय में शीशल प्लांट की फैक्ट्री भी स्थापित है. जहां शीशल प्लांट के पत्तों को मशीन के जरिए रेशा बनाया जाता है. इसके बाद इस रेशा को बंगाल भेजा जाता है. जहां इससे रस्सी और बोरियां बनाई जाती हैं. झाड़ीनुमा पौधा होने के कारण आम लोगों को इससे सीधे तौर पर कोई लाभ नहीं हो पाता. वहीं, यह पौधा अक्सर बंजर जमीन में ही लगाया जाता है.
ग्रामीणों को मिलता है रोजगार: वन प्रमंडल पदाधिकारी
इधर, इस संबंध में पूछने पर लातेहार वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रवेश अग्रवाल ने बताया कि यह कार्य शीशल यूनिट के लातेहार शीशल ब्रांच के द्वारा कराया गया है. उन्होंने कहा कि शीशल प्लांट से रेशा निकलता है, जिससे रस्सी बनाई जाती है. उन्होंने कहा कि शीशल यूनिट की एक फैक्ट्री भी यहां है. जहां मुरब्बा से रेशा निकाला जाता है. उन्होंने कहा कि इस कार्य से स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार सृजन होता है. उन्होंने कहा शीशल प्लांट से सॉइल बैंडिंग भी होती है, जिससे मिट्टी का कटाव रुकता है.
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