बनारस के घाट-मंदिर ही नहीं, गांव भी बने टूरिस्ट डेस्टिनेशन
मिट्टी के बने घरों, स्थानीय परंपरा और गांवों की संस्कृति के बारे में जानने का मिलेगा मौका.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 5, 2026 at 11:58 AM IST
|Updated : January 5, 2026 at 12:17 PM IST
वाराणसी: काशी दर्शन के इच्छुक लोगों को सिर्फ घाट-मंदिरों को देखने का ही मौका नहीं मिलेगा, बल्कि स्थानीय ग्रामीण संस्कृति, कला और उनके रहन-सहन को करीब जानने का अवसर भी मिल रहा है. यहां आने वाले पर्यटकों को पर्यटन के नए प्वाइंट्स से रूबरू कराया जा सक, इसी को लेकर कशी में विलेज टूरिज्म की शुरुआत की गई है. जी हां, विलेज टूरिज्म के तहत वाराणसी के गांवों का पर्यटकों को भ्रमण कराया जा रहा है. खास बात यह है कि, काशी आने वाले देशी-विदेशी मेहमानों को यह नया टूरिज्म पॉइंट खूब पसंद भी आ रहा है.

दरअसल, वाराणसी में टूरिज्म को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है. यही वजह है कि वाराणसी में रोजाना लाखों पर्यटक आ रहे हैं. इतना ही नहीं, पर्यटन से वाराणसी में कारोबार में भी इजाफा हुआ है और पुराने अलग-थलग पड़े हैरिटेज लोगों के सामने लाए गए हैं. मंदिरों का जीर्णोद्धार हो या घाटों को नया रूप देना हो, हर तरीके से सरकार पर्यटकों को लुभाने की कोशिश कर रही है. इसी कड़ी में टूरिज्म एसोसिएशन और पर्यटन विभाग गांवों को टूरिस्ट स्पॉट के रूप में लोगों के सामने रख रहा है. जो लोगों को भी पसंद आ रहा है.

शुरू हुआ टूरिज्म डेस्टिनेशन का नया ट्रेंड: वाराणसी टूरिज्म गिल्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष कपूर बताते हैं कि, बनारस को लोग सिर्फ मंदिर और घाटों के लिए जानते हैं. ऐसे में लोगों के सामने बनारस के छिपे हुए इतिहास खूबसूरती को रखा जाए, जिससे कि यहां के पर्यटन को और भी ज्यादा आकर्षक बनाया जा सके. इसी सोच के साथ काशी में विलेज टूरिज्म की हम लोगों ने शुरुआत की है. इस टूरिज्म में हम काशी आने वाले पर्यटकों को कुछ खास गांव का भ्रमण कराते हैं, जहां मिट्टी के बने हुए घर, परंपरा, गांव की संस्कृति के बारे में बताते हैं. खास बात यह है कि यह पर्यटकों को भी खूब पसंद आ रहा है. जिसकी तस्वीर हमें बीते दिनों एक टूरिज्म कैंप में नजर आई थी, जब हमने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक विलेज कैंप आयोजित किया था. इसमें देश-दुनिया के टूरिज्म ऑपरेटरों ने काशी के गांवों का भ्रमण किया था.

विलेज टूरिज्म बन रहा पसंद: उन्होंने बताया कि, विदेशी मेहमानों में इसकी उत्सुकता सबसे ज्यादा है. वह इसकी क्वेरी ज्यादा करते हैं. वर्तमान में यह ट्रेंड बदल तो रहा है लेकिन बहुत हाई पर नहीं है.आगामी आने वाले दिनों में बनारस के घाटों के साथ विलेज टूरिज्म का क्रेज भी बढ़ता हुआ नजर आएगा. वहीं, वाराणसी में एक होटल के महाप्रबंधक विवेक कहते हैं कि, हमारे यहां आने वाले विदेशी मेहमान बनारस के गांवों के बारे में जरूर पूछते हैं, जिसके बाद हम उन्हें लेकर जाते हैं. गांव के हैंडीक्राफ्ट, खेती, वहां की परंपरा के बारे में बताते हैं. ट्रैवल एजेंट के आंकड़ों की मानें तो चार से पांच फॉरेनर ग्रुप की बुकिंग विलेज टूरिज्म के लिए महीने में आती है. इसके साथ ही भारतीय पर्यटक भी विलेज टूरिज्म के पैकेज को चूज कर रहे हैं. बताया कि लोगों के बढ़ती रुचि को देखते हुए इसका अलग पैकेज भी तैयार किया है.

काशी में 10 गांवों का हुआ था चयन: गौरतलब हो कि, विलेज टूरिज्म को बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग और टूरिज्म एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने पूरी तैयारी कर ली है. इसको लेकर गांवों को पर्यटन स्पॉट के रूप में डेवलप किया जा रहा है. पर्यटन विभाग इन गांवों के हैरिटेज को संवारकर लोगों के सामने रखेगा. इसके लिए बकायदा 10 गांवों का चयन किया गया है, जहां पर पर्यटन स्पॉट तैयार किया जा रहा है. इसके तहत ऐसा गांव जहां पर हैरिटेज (विरासत) है या उस गांव में कोई हैंडीक्राफ्ट है या कोई कला है. उन गांवों में आधारभूत इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा. इसके साथ ही इन गांवों का प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा. इससे टूरिस्ट को वहां तक पहुंचाया जा सकेगा. यह विलेज टूरिज्म के अंतर्गत आएगा.
रोजाना बनारस आ रहे हैं 2 से 3 लाख पर्यटक: वाराणसी देश का धार्मिक केंद्र है. ऐसे में यहां पर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद से लगातार पर्यटकों का आना बढ़ा है. वहीं सरकार वाराणसी में टूरिज्म के कई क्षेत्रों में काम कर रही है. पर्यटन विभाग के अनुसार प्रतिदिन वाराणसी आने वाले पर्यटकों की संख्या 2.5 लाख से 3 लाख पहुंच चुकी है. यह बीते सालों की तुलना में कहीं ज्यादा है.
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