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विजय शाह को फिलहाल कोई राहत नहीं, कर्नल सोफिया मामले में राज्यपाल के फैसले का इंतजार

मंत्री विजय शाह केस में सुप्रीम कोर्ट का इंतजार बरकरार, एसआईटी जांच पूरी, राज्यपाल के फैसले पर टिकी अगली कार्रवाई.

Vijay Shah case SIT Investigation Complete
मंत्री विजय शाह केस में सुप्रीम कोर्ट का इंतजार बरकरार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 31, 2026 at 6:40 PM IST

3 Min Read
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भोपाल: ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत या अंतिम फैसला नहीं मिला है. लेकिन सोमवार को हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम ने बताया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश की जा चुकी है. अब आगे की कार्रवाई के लिए अभियोजन की मंजूरी का इंतजार है, जिस पर अंतिम फैसला राज्यपाल के स्तर पर लंबित है. सरकार ने कोर्ट को बताया कि राज्यपाल से जल्द निर्णय आने की उम्मीद है.

एसआईटी ने पूरी की जांच, रिपोर्ट सीलबंद

इस मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के सामने सुनवाई हुई. जांच अधिकारी और डीआईजी इंटेलिजेंस डी. कल्याण चक्रवर्ती की ओर से बताया गया कि एसआईटी अपनी जांच पूरी कर चुकी है. कोर्ट के निर्देश के मुताबिक जांच रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद रखी गई है. जांच पूरी होने के बाद अब संबंधित अदालत में आरोपपत्र या मामले को बंद करने की रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया बाकी है.

राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल केएम नटराज ने बताया कि "विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी का मामला राज्यपाल के पास लंबित है. इस संबंध में कैबिनेट स्तर पर विचार हो चुका है और फाइल अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल को भेजी गई है." नटराज ने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस पर फैसला आ सकता है.

मंजूरी मिली तो आरोपपत्र, नहीं तो क्लोजर रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या जांच पूरी होने के बाद अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार है. इस पर सरकार की ओर से हां में जवाब दिया गया. कोर्ट को बताया गया कि अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद जांच रिपोर्ट संबंधित सक्षम अदालत में पेश की जाएगी. वहीं यदि अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी.

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शाह की ओर से माफी का हवाला

विजय शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया कि "मंत्री ने विवादित बयान के अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी. सरकार की ओर से भी कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी मामले पर विचार करते समय मंत्री के माफीनामे और उनकी ओर से इसे भूल मानकर माफी मांगने के तथ्य को ध्यान में रख सकता है."

कोर्ट ने फिलहाल नहीं की कोई टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है. अदालत ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सीलबंद है, जबकि अभियोजन की मंजूरी का मामला सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित है. कोर्ट ने जांच अधिकारी को भी व्यक्तिगत रूप से बार-बार पेश होने से राहत दी. अब राज्यपाल के फैसले के बाद सीलबंद जांच रिपोर्ट को संबंधित सक्षम अदालत के सामने पेश किया जाएगा.