बिहार में एक बार फिर सब इंस्पेक्टर गिरफ्तार, निगरानी विभाग ने रंगे हाथ दबोचा
केस डायरी से नाम हटाने के बदले 40 हजार की रिश्वत लेते दारोगा गिरफ्तार हुआ है. निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. पढ़ें खबर

Published : December 23, 2025 at 4:16 PM IST
सिवान : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत निगरानी विभाग ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है. सिवान जिले में पदस्थापित एक दारोगा को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार सब इंस्पेक्टर की पहचान कन्हैया कुमार सिंह के रूप में हुई है.
क्या है पूरा मामला? : मामला सिसवन थाना क्षेत्र का है, जहां 18 दिसंबर को जमीन विवाद को लेकर मारपीट की घटना हुई थी. इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से सिसवन थाना कांड संख्या 309 दर्ज कराया गया था. इस केस की जांच की जिम्मेदारी एसआई कन्हैया कुमार सिंह को सौंपी गई थी.
नाम हटाने के बदले 40 हजार की डिमांड : आरोप है कि जांच अधिकारी कन्हैया कुमार सिंह ने केस डायरी से सुनील कुमार की बहन का नाम हटाने के एवज में 40 हजार रुपये की अवैध मांग की. पीड़ित सुनील कुमार ने जब रिश्वत देने से इनकार किया, तो कथित रूप से उसे केस में फंसाने का दबाव बनाया गया. इससे परेशान होकर सुनील कुमार ने पूरे मामले की शिकायत पटना स्थित निगरानी विभाग से की.
पूरी योजना के तहत कार्रवाई : शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की गोपनीय जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए. इसके बाद कांड संख्या 170/25 दर्ज कर एक विशेष टीम का गठन किया गया. डीएसपी विप्लव कुमार के नेतृत्व में पटना से आई निगरानी विभाग की टीम ने पूरी योजना के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया.

''आज रिश्वत की रकम देने का स्थान सिसवन थाना क्षेत्र के महाराणा चौक स्थित बबलू चाय की दुकान तय किया गया था. जैसे ही दरोगा कन्हैया कुमार सिंह ने सुनील कुमार से 40 हजार रुपये स्वीकार किए, पहले से तैनात निगरानी टीम ने उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया. मौके पर ही रिश्वत की रकम बरामद कर ली गई.''- विप्लव कुमार, निगरानी डीएसपी
पटना ले गई टीम : गिरफ्तारी के बाद आरोपी दरोगा को निगरानी विभाग अपने साथ लेकर पटना गई है. जहां उनसे गहन पूछताछ जारी है. सूत्रों के मुताबिक, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तरह की वसूली पहले भी की गई थी और इसमें कोई अन्य पुलिसकर्मी या दलाल शामिल तो नहीं है.
निगरानी विभाग ने साफ संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत लेने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. इस घटना के बाद सिवान पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. आम लोगों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि जब जांच अधिकारी ही पैसे लेकर केस को प्रभावित करने लगें, तो न्याय की उम्मीद कैसे की जाए.
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