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विदिशा में होलिका दहन के लिए गोबर की लकड़ियां, तेजी से जलती और धुआं भी नहीं करती

विदिशा में नगर निगम दे रही कम कीमत पर होलिका दहन के लिए गोबर की लकड़ियां, परंपराओं के साथ प्रकृति का रख रही ख्याल.

COW DUNG WOOD HOLIKA DAHAN
कम कीमत पर होलिका दहन के लिए गोबर की लकड़ियां (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 2, 2026 at 7:31 PM IST

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Updated : March 2, 2026 at 8:30 PM IST

2 Min Read
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रिपोर्ट: रवि प्रजापति

विदिशा: होलिका दहन के लिए एक ऐसी पहल की शुरुआत हुई है, जो सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामुदायिक सहयोग, नवाचार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक नया कदम है. यह प्रयास इसलिए भी विशेष है, क्योंकि इसे किसी त्योहार पर बोझ न बनाकर, एक सकारात्मक विकल्प के रूप में समाज के सामने रखा जा रहा है. इच्छुक लोग इसका प्रयोग होलिक दहन के लिए कर सकते हैं.

नगर पालिक दे रहा 5 रुपए प्रति किलो गोबर की लकड़ियां

विदिशा नगर पालिका ने जिले की गौशालाओं के साथ मिलकर गोबर से लकड़ियां और कंडे बनाए हैं, जिन्हें शहर के पुरानी नगरपालिका कार्यालय के पास से कोई भी बेहद कम कीमत, सिर्फ 5 रुपये प्रति किलो पर खरीद सकता है. इसमें खास बात ये है कि इसे खरीदने या गोबर की ही लकड़ियों से मात्र होलिका दहन करने का दबाव नहीं बनाया गया है. इसे लोगों के सामने मात्र एक विकल्प के रूप में रखा गया है. नगर पालिका का उद्देश्य त्योहारों या परंपराओं में बदलाव करना नहीं है, बल्कि यह दिखाना है कि परंपराओं के साथ चलते हुए भी प्रकृति का ख्याल रखा जा सकता है.

नगर निगम दे रहा 5 रुपए प्रति किलो गोबर की लकड़ियां (ETV Bharat)

तेजी से जलती हैं गोबर की लकड़ियां, धुआं भी कम

गोबर से बनी लकड़ियां और कंडे तेजी से जलते हैं. इसके साथ ही ये कम धुआं देने वाले और पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं. स्थानीय गौशालाओं को इससे आर्थिक सहायता भी मिलती है. जिससे गांव और शहर के बीच सहयोग की नई राह बनती है. यह पहल पर्यावरण संरक्षण की एकतरफा चर्चा नहीं, बल्कि समाज, परंपरा और प्रकृति, तीनों को एक साथ जोड़ने की कोशिश है.

Vidisha Holika Dahan Cow dung wood
होलिक दहन के लिए मिल रही गोबर की लकड़ियां (ETV Bharat)

छोटे फैसलों से भी हो सकते हैं बड़े बदलाव

इस पर नगर पालिका के सीएमओ दुर्गेश ठाकुर ने कहा, "यह पहल किसी त्योहार पर सवाल उठाने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों को एक ऐसा विकल्प देने के लिए है, जो उनकी परंपरा को तो प्रभावित न करे, लेकिन पर्यावरण के लिए फायदेमंद जरूर साबित हो." विदिशा में शुरू हुई यह कोशिश न सिर्फ शहर को हरा-भरा बनाएगी, बल्कि यह भी दिखाएगी कि बदलाव सिर्फ बड़े फैसलों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कदमों से भी आता है.

Last Updated : March 2, 2026 at 8:30 PM IST