अब घरों में नहीं बनती होलिका दहन सामग्री, होली पर दो दिन का रोजगार मिला
होलाष्टक पूजन की सामग्री का बाजारीकरण होने से लोग खुश. लोगों को दो दिन का रोजगार भी मिला.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 1:04 PM IST
रिपोर्ट: रवि प्रजापति
विदिशा : समय के साथ त्योहार मनाने की परंपरा तो वही रहती है लेकिन कुछ तरीके बदल जाते हैं. होली पर्व पर भी परंपराओं का पालन तो किया जाता है लेकिन जो वस्तुएं पहले घर में बनाई जाती थीं, वे अब कुछ कारणों से घरों में बनना बंद हो गई हैं. ये वस्तुएं अब बाजार में मिलने लगी हैं. इसका लाभ ये हुआ कि लोगों को भले ही दो दिन का सही लेकिन कुछ रोजगार मिल जाता है. इससे उनका त्यौहार खुशियों से मन जाता है.
छोटी-छोटी बाटियों के रूप में तैयार मलरिया
पुराने समय में होली की तैयारियां कई दिनों पूर्व से शुरू हो जाती थीं. घरों में गोबर से मलरिया बनाई जाती थीं, जिनमें कुछ आभूषण भी सजाए जाते थे. इन मलरिया की माला बनाकर होलिका दहन से अग्नि लाकर घर-घर जलाई जाती थी. छोटी-छोटी बाटियों के रूप में तैयार मलरिया को पूजा में भोग अर्पित किया जाता है और आदान-प्रदान कर अन्य परिवारों में वितरण किया जाता है. कुछ बाटियों को घर की पेटी या पूजास्थल पर रखा जाता है, जिससे घर में बरकत बनी रहे.

अब घर में नहीं बनती मलरिया
वर्तमान में मलरिया घर में बनाने का काम लगभग बंद है. ये काम बाजार की व्यावसायिक गतिविधियों में बदल गया है. लोग घरों में मलरिया बनाना भूल चुके हैं और बाजार से खरीदने लगे हैं. शहरों और कस्बों में यह सामग्री छोटे-मोटे दुकानदार बेचते हैं. इससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं. बाजारों में गेहूं की बालें, अंडउआ, मलरिया और अन्य सामग्री आसानी से उपलब्ध है. माधवगंज बड़ा बाजार और अन्य स्थानों पर इसके लिए विशेष बाजार लग गे.
दुकानदारों को दो दिन का काम मिला
ग्राहक सीमा राजपूत ने कहा "पहले हम लोग गोबर से मलरिया घर पर बनाते थे, लेकिन अब सुविधा होने के कारण इसे बाजार से ही खरीदते हैं. 10 रुपये की एक मलरिया की माला खरीदी." दुकानदार अरविंद सिंह कुशवाहा कहते हैं "वह गेहूं की बालें, अंडउआ और मलरिया बेच रहे हैं. पहले यह सामग्री बाजार में नहीं बिकती थी, लेकिन अब गोबर की कमी और घर में नहीं बनाने के कारण यह सामग्री बाजार में बिकने लगी हैं."
पहले होलाष्टक की तैयारियां सप्ताहभर पहले से
पंडित विनोद शास्त्री कहते हैं "होली के 8 दिन पहले होलाष्टक शुरू हो जाते थे. घरों में महिलाएं गाय के गोबर से मलरिया तैयार करती थीं. फाल्गुन पूर्णिमा के दिन छोटी होली जलाई जाती थी. लेकिन अब लोगों के पास यह समय नहीं है. पहले गोबर आसानी से उपलब्ध होता था और घरों में हाथों से बनाई गई सामग्री का महत्व था. अब बाजार से इसे खरीदना आम बात हो गई है."
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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने सूखा नारियल
पंडित विनोद शास्त्री कहते हैं "शहर की बड़ी होली में घर की परेशानियां और दुख-दर्द भी समाप्त हो जाते हैं. धन और समृद्धि के लिए होली में नारियल अर्पित किया जाता है. काले तिल डालने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. सूखा नारियल देने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. यदि घर में कोई बीमार है तो काली मिर्च और कपूर से होली में उपाय किया जाता है, जिससे बीमारी से मुक्ति मिलती है."

