एक परोपकार ऐसा भी! संत रामपाल के 80 वर्षीय शिष्य ने मेडिकल रिसर्च के लिए किया देहदान
बुजुर्ग की मौत के बाद परिजनों ने देहदान किया, अटल विहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में होगा शोध. पुलिस ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर. रवि प्रजापति की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 6, 2026 at 10:54 AM IST
|Updated : July 6, 2026 at 11:05 AM IST
विदिशा: मानव सेवा और समाज कल्याण की एक ऐसी अनूठी मिसाल मध्य प्रदेश के विदिशा से सामने आई है, जिसने न सिर्फ लोगों को भावुक कर दिया है, बल्कि समाज के सामने एक नई राह भी दिखाई है. गंजबासौदा तहसील के ग्राम ओकायला के रहने वाले 80 वर्षीय बुजुर्ग हलकईं का रविवार को निधन हो गया. उनकी मृत्यु के बाद शोकाकुल परिवार ने आंसू बहाने के साथ-साथ एक ऐसा साहसिक फैसला लिया, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है. परिजनों ने स्वर्गीय हलकईं की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके पार्थिव शरीर को विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय को सौंप दिया.
अस्पताल परिसर में राजकीय सलामी
चिकित्सा और शोध के क्षेत्र में इस अनुकरणीय योगदान के लिए मध्य प्रदेश सरकार के तय नियमों के तहत प्रशासन द्वारा ऐतिहासिक कदम उठाया गया. मेडिकल कॉलेज परिसर में पुलिस प्रशासन की एक विशेष टुकड़ी द्वारा दिवंगत हलकईं के पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया. जब पुलिस के जवानों ने देश और समाज के प्रति उनके इस सर्वोच्च दान के लिए शस्त्र झुकाकर सलामी दी, वहां उपस्थित परिजनों सहित हर एक व्यक्ति की आंखें नम हो गईं.
संत रामपाल महाराज के विचारों ने बदली सोच
जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय हलकईं सुप्रसिद्ध संत रामपाल महाराज के शिष्य थे और उन्होंने उनसे नाम-दीक्षा ली थी. उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य महाराज के बताए गए लोक-कल्याण के मार्ग पर चलना था. संत रामपाल महाराज अपने सत्संगों में निरंतर अनुयायियों को प्रेरित करते हैं कि यह मानव शरीर न केवल जीवित रहते हुए परोपकार में लगना चाहिए, बल्कि मृत्यु के उपरांत भी यह समाज और चिकित्सा विज्ञान के शोध के काम आना चाहिए. इसी महान विचार से प्रभावित होकर हलकईं ने अपने जीवनकाल में ही यह वसीयत कर दी थी कि उनके मरने के बाद उनकी देह को दान कर दिया जाए.
असहाय परिवारों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था
इस संबंध में संत रामपाल महाराज के अनुयायी दीपक पंथी ने बताया, "महाराज के सानिध्य में देश के विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर देहदान और स्वैच्छिक रक्तदान जैसे सेवा कार्य लगातार किए जा रहे हैं. इससे पहले भी जबलपुर और सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में कई अनुयायियों द्वारा देहदान किया जा चुका है. इसके साथ ही हरियाणा और मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में गरीब व असहाय परिवारों के लिए निशुल्क राशन और भंडारे की व्यवस्था भी उनके सेवादारों द्वारा की जा रही है."

चिकित्सा विज्ञान को मिला अमूल्य उपहार
संत रामपाल महाराज के अनुयायी दीपक पंथी ने कहा, "ग्राम ओकायला के निवासी हमारे हलकईं ने 80 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली. वे संत रामपाल जी महाराज के अनन्य भक्त थे और उन्होंने गुरुजी के वचनों को शिरोधार्य करते हुए जीते जी देहदान का संकल्प लिया था. आज उनके परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा कर चिकित्सा विज्ञान को एक अमूल्य उपहार सौंपा है. यह निस्वार्थ सेवा भावना हमें संत रामपाल महाराज के सत्संगों और उनकी दी गई शिक्षाओं से ही प्राप्त होती है."
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सब-ईंस्पेक्टर बलवीर सिंह ने कहा, "एक पुलिस अधिकारी के रूप में आज का दिन मेरे लिए बेहद गर्व और सम्मान का क्षण है. आमतौर पर लोग अपनी संपत्ति या धन का दान करते हैं, लेकिन स्वर्गीय हलकईं ने मानवता और चिकित्सा छात्रों की पढ़ाई के लिए अपनी पूरी देह ही दान कर दी. राज्य शासन के निर्देशों का पालन करते हुए आज हमारी टीम को उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' देने का सौभाग्य मिला है. मैं इस महान आत्मा और उनके परिवार के हौसले को सलाम करता हूं. समाज में ऐसे उदाहरण दुर्लभ हैं और इससे आने वाली पीढ़ियों को एक बहुत बड़ी सीख मिलेगी."

