विदिशा बना मध्य प्रदेश में मिसाल, 1 से 8वीं तक के 85% छात्रों के जाति प्रमाण-पत्र तैयार
विदिशा में रिकॉर्ड 87,928 विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्र तैयार, कक्षा 1 से 8वीं तक कुल 1,03,640 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 29, 2026 at 8:42 PM IST
विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले ने स्कूली छात्रों के हित में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के डिजिटल जाति प्रमाण-पत्र बनाने के मामले में विदिशा पूरे सूबे में एक नजीर बनकर उभरा है. जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से अब तक करीब 85 फीसदी लक्षित छात्रों के दस्तावेज तैयार कर लिए गए हैं, जिससे उन्हें भविष्य में सरकारी योजनाओं और छात्रवृत्ति के लिए भटकना नहीं पड़ेगा.
रिकॉर्ड 87,928 विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्र तैयार
शासकीय योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर हर पात्र छात्र तक पहुंचे, इसे सुनिश्चित करने के लिए विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देशन में जिलेभर में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है. जिला शिक्षा केंद्र द्वारा संकलित किए गए नवीनतम आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जिले में कक्षा 1 से 8 तक कुल 1,03,640 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. इनमें से रिकॉर्ड 87,928 विद्यार्थियों के वैधानिक जाति प्रमाण-पत्र पूरी तरह तैयार किए जा चुके हैं.
इस अभियान की सबसे बड़ी खूबी इसका समयबद्ध और पारदर्शी होना है. आमतौर पर जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए पालकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए जिला प्रशासन ने तहसील और स्कूल स्तर पर ही कड़ियां जोड़ी हैं. वर्तमान में बचे हुए 15,712 विद्यार्थियों के दस्तावेज तैयार करने के लिए तहसील स्तर पर युद्ध स्तर पर प्रक्रिया जारी है.

तहसीलवार प्रगति, कहां कितना हुआ काम
अभियान के तहत जिले की विभिन्न तहसीलों में काम की रफ्तार बेहद तेज है. विदिशा तहसील में कुल 13,446 लक्षित छात्रों में से 11,422 के प्रमाण-पत्र बन चुके हैं, जबकि केवल 2,024 शेष हैं. वहीं, सिरोंज तहसील इस सूची में सबसे आगे नजर आ रही है, जहां 19,684 बच्चों में से 17,984 का काम पूरा हो चुका है. लटेरी में 16,601 में से 14,306 और नटेरन में 8,080 में से 7,401 छात्रों के दस्तावेज तैयार हैं.
इसके अलावा, बसौदा विकासखंड की बसौदा तहसील में 12,443 में से 11,083 और त्योंदा में 4,166 में से 3,211 विद्यार्थियों के प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं. जबकि, ग्यारसपुर में 5,206 में से 4,313, गुलाबगंज में 3,256 में से 3,037 और शमशाबाद में 8,730 में से 7,624 छात्रों को इसका लाभ मिल चुका है. कुरवाई में 9,487 में से 6,249 और पठारी तहसील में 2,541 में से 1,298 विद्यार्थियों के प्रमाण-पत्र तैयार कर लिए गए हैं.
डिजिटल गवर्नेंस पर जोर
प्रशासन ने ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदनों पर विशेष जोर दिया है. अब तक प्राप्त कुल 12,486 आवेदनों में से 5,297 आवेदन सीधे ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1,025 डिजिटल प्रमाण-पत्र तत्काल जारी भी कर दिए गए हैं. कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने संबंधित राजस्व और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी है कि पेंडेंसी को जल्द से जल्द शून्य किया जाए.
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इस मुहिम का दूरगामी प्रभाव यह होगा कि आने वाले शैक्षणिक सत्रों में आरक्षित वर्ग के इन नौनिहालों को न तो छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) के आवेदन के समय किसी दफ्तर की चौखट पर लाइन लगानी होगी और न ही आगे की उच्च शिक्षा या अन्य शासकीय सुविधाओं के लिए किसी तकनीकी अड़चन का सामना करना पड़ेगा.

