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5 सीएम देने वाला VVIP जिला सड़क-स्वास्थ्य सुविधा को तरसा, बीमार महिला को कंधे पर पहुंचाया अस्पताल

पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड का वीवीआईपी जिला कहलाता है, इस जिले से 5 मुख्यमंत्री, अनेक मंत्री और बड़े केंद्रीय अफसर हैं

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वीवीआईपी जिले का बुरा हाल (Courtesy- Local villagers)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 24, 2026 at 2:41 PM IST

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Updated : August 24, 2026 at 2:46 PM IST

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पौड़ी गढ़वाल: चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार सामने आ रही हैं. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में बीमार महिला को ग्रामीण कंधों पर उठाकर पैदल ले जाते दिखाई दे रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि पौड़ी गढ़वाल को उत्तराखंड का वीवीआईपी जिला कहा जाता है. इस जिले ने उत्तराखंड को 5 मुख्यमंत्री और कई मंत्री और केंद्रीय स्तर के अफसर दिए हैं. इससे भी चौंकाने वाली बात ये है कि इस समय स्वास्थ्य और पीडब्ल्यूडी मंत्री भी पौड़ी गढ़वाल जिले के ही हैं.

वीवीआईपी जिले के लोग सड़क और पुल को तरसे: बताया जा रहा है कि मामला पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल ब्लॉक के ग्राम डांगू मल्लाका का है. ग्रामीणों के अनुसार खतलगढ़ के ऊपर पुल नहीं होने के कारण मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए उन्हें नदी पार कर पैदल रास्ता तय करना पड़ा. पहाड़ों में सड़क तक मरीज को पालकी या कंधों के सहारे पहुंचाने के ऐसे वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं. वायरल वीडियो ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

VVIP जिला सड़क-स्वास्थ्य सुविधा को तरसा (Courtesy- Local villagers)

स्वास्थ्य सुविधा और सड़क समस्या की पौड़ी की तस्वीरें हैं आम: चौबट्टाखाल क्षेत्र में सड़क सुविधा की बदहाली की तस्वीर पहली बार सामने नहीं आई है. इससे पहले कमलिया पल्ला गांव का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें सड़क नहीं होने के कारण एक व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को करीब 6 से 7 किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर ले जाता दिखाई दिया था. अब एक और वीडियो ने पहाड़ में बदहाल सड़क व्यवस्था और ग्रामीणों की मजबूरी को फिर सामने ला दिया है. दोनों ही मामलों में ग्रामीण लंबे समय से सड़क और संपर्क मार्ग की मांग करते आ रहे हैं. इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है.

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सड़क और पुल के अभाव में 60 वर्षीय बीमार बुजुर्ग महिला को डोली पर ले जाते लोग (Courtesy- Local villagers)

पौड़ी जिले से हैं पीडब्ल्यूडी मंत्री: ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के विधायक और प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री सतपाल महाराज के कार्यकाल में भी कई गांव सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय स्तर पर सर्वे, कार्रवाई और आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन धरातल पर हालात में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आता.

यूकेडी नेता का बयान: इसी मुद्दे को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) नेता बलवंत गुसाईं ने सतपाल महाराज पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि-

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लोगों को नदी पार करके अस्पताल जाना पड़ा (Courtesy- Local villagers)

चौबट्टाखाल में सड़क के लिए ग्रामीणों के संघर्ष की तस्वीरें कोई नई या आश्चर्यजनक बात नहीं हैं. भगवती तालिया में जब सतपाल महाराज को ग्रामीणों ने रोका था, तब भी उन्होंने इन्हीं गांवों की सड़क और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर सवाल उठाए थे. उस दौरान जनता की समस्याओं का संतोषजनक जवाब देने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर आंखें दिखाने वाला व्यवहार किया गया.
-बलवंत गुसाईं, नेता यूकेडी-

सतपाल महाराज पर फूटा लोगों का गुस्सा: गुसाईं ने कहा कि सतपाल महाराज करीब 10 वर्षों से क्षेत्र के विधायक हैं और प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के मंत्री भी हैं. इसके बावजूद उनकी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों को सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है.

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पीडब्ल्यूडी मंत्री सतपाल महाराज पर लोगों का गुस्सा फूटा (Courtesy- Local villagers)

स्वास्थ्य मंत्री से भी लोग नाराज: वायरल वीडियो ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक पहाड़ के ग्रामीण इलाज और जरूरी सुविधाओं के लिए मरीजों को कंधों पर उठाकर और उफनती नदियां व पैदल रास्ते पार कर मंजिल तक पहुंचाने को मजबूर रहेंगे. दिलचस्प बात ये है कि स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल भी पौड़ी के ही मूल निवासी हैं.

ग्राम प्रधान का बयान: वहीं ग्राम प्रधान रेखा रावत ने फोन पर बताया कि-

गांव निवासी 60 वर्षीय लक्ष्मी देवी को सांस लेने में तकलीफ होने पर ग्रामीणों ने मिलकर उन्हें नदी पार कर अस्पताल पहुंचाया. गांव में 200 से अधिक परिवार रहते हैं, लेकिन सड़क सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. ग्रामीणों को जंगल के रास्ते करीब दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार कर सड़क तक पहुंचना पड़ता है. वहीं, पानी वाले रास्ते से सड़क की दूरी करीब एक किलोमीटर है और रास्ता अपेक्षाकृत आसान होने के कारण ग्रामीण इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं.
-रेखा रावत, ग्राम प्रधान-

बीमार महिला को कड़ी मशक्कत के बाद पहुंचाया अस्पताल: इसी दौरान लक्ष्मी देवी को भी नदी पार कर सड़क तक पहुंचाया गया, ताकि उन्हें जल्द अस्पताल ले जाया जा सके. ग्राम प्रधान ने बताया कि गांव में सड़क की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पाया है. ऐसे में ग्रामीणों को मरीजों को कंधे पर उठाकर और नदी पार कर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर होना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने जल्द सड़क निर्माण शुरू किए जाने की मांग की है.

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स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से भी लोग नाराज (Courtesy- Local villagers)

पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर का बयान: लोक निर्माण विभाग बैजरों के अधिशासी अभियंता लोकेश सारस्वत ने बताया कि-

भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया के लिए शासन को फाइल भेजी गई है. अनुमति मिलने के बाद सड़क की डीपीआर तैयार की जाएगी. इसके बाद वित्तीय स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा. मुख्य सड़क से गांव की दूरी करीब तीन किलोमीटर है.
-लोकेश सारस्वत, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी-

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Last Updated : August 24, 2026 at 2:46 PM IST