स्वाइन फ्लू सहित पशुओं की बीमारियों की रोकथाम, पशु चिकित्सा विभाग का विशेष टीकाकरण और जांच अभियान
स्वाइन फ्लू और अन्य पशु जनित बीमारियों के मामले सामने आने के बाद पशुधन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : September 3, 2026 at 9:53 AM IST
कोरबा: जिलेभर में पशुओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य तय किया है. इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक वृहद अभियान की शुरुआत की गयी है, इस कदम का मुख्य उद्देश्य पशुओं के माध्यम से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों के प्रसार को रोकना और जिले की पशु संपदा को सुरक्षित करना है. साथ ही साथ जानवरों से कोई बीमारी इंसानों तक न पहुंचे इसके लिए भी एहतियात बरती जा रही है.
पशु चिकित्सा विभाग द्वारा शत प्रतिशत टीकाकरण के साथ ही पशुपालकों के घरों तक पहुंचाने की बातें तो कही जाती है. लेकिन दावों के विपरीत यह काम उतनी तत्परता से नहीं होता, जितना की किया जाना चाहिए. हालांकि वर्तमान समय में विभाग ने वैक्सीनेशन के टारगेट को हर हाल में पूरा किए जाने की बातें, जरूर कही है.
जिले की सीमा पर होगी कड़ी निगरानी
संक्रामक रोगों के जिले में प्रवेश को रोकने के लिए कोरबा जिले के सभी प्रमुख एंट्री पॉइंट्स (सीमावर्ती प्रवेश द्वारों) पर वेटरनरी (पशु चिकित्सा) चिकित्सकों की तैनाती की जा रही है. इसके तहत जिले की सीमा में प्रवेश करने वाले पशु-वाहक वाहनों की सघन जांच की जाएगी. केवल उन्हीं पशुओं को जिले में प्रवेश की अनुमति मिलेगी जिनका टीकाकरण हो चुका है. बिना वैक्सीनेटेड पाए जाने वाले पशुओं को मौके पर ही टीका लगाया जाएगा. पशु चिकित्सा विभाग द्वारा एंट्री पॉइंट पर वैक्सीनेशन और गैर वैक्सीनेटर जानवरों को प्रवेश करने से रोकने की बात जरूर कहीं जा रही है, लेकिन इस योजना को अमली जामा पहनाना एक बड़ी चुनौती है.
खरीद-फरोख्त के दस्तावेज
जो पशुपालक बाहरी क्षेत्रों से पशुओं की खरीदी-बिक्री कर कोरबा जिले में लाते हैं. उन्हें पशुओं से संबंधित टीकाकरण और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के दस्तावेज दिखाने होंगे. इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए पशु चिकित्सा विभाग द्वारा वेटरनरी डॉक्टरों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई जा रही है, ताकि 24 घंटे निगरानी रखी जा सके.

टीकाकरण अभियान में तेजी
विभाग द्वारा पूर्व से चलाए जा रहे रूटीन टीकाकरण अभियान को अब मिशन मोड में लाया गया है. विशेष रूप से शूकर पालकों को चिन्हित कर उनके सभी पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जा रहा है. पशु चिकित्सकों की टीमें घर-घर और फार्म-फार्म जाकर इस कार्य को पूरा कर रही हैं. कोरबा जिले में शूकरों की संख्या 1300 है. विभाग का दावा है कि लगभग 88% के आसपास का वैक्सीनेशन किया जा चुका है.
स्वास्थ्य सुरक्षा और किसानों को राहत
पशुपालन से जुड़े जानकारों का मानना है कि समय रहते उठाए गए इन कदमों से न केवल पशुओं में महामारी फैलने का खतरा टलेगा, बल्कि पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकेगा. विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे टीकाकरण अभियान में सहयोग करें और जिले की सुरक्षा व्यवस्था को सफल बनाने में प्रशासन का साथ दें.
टीकाकरण करा रहे, सीमा पर भी निगरानी
इस विषय में पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ एसएन मिश्रा ने बताया कि बरसात के अंत में खासतौर पर लंपी स्किन डिजीज और स्वाइन फीवर की बीमारी पशुओं में देखने को मिलती है. इसके लिए सभी पशुओं का वैक्सीनेशन कर रहे हैं, पशुपालकों को भी कहा गया है कि जानवरों को साफ सुथरा रखें, खुले में ना छोड़े. अगर वह खुले में नहीं जाएंगे, लोगों के बीच नहीं जाएंगे तो बीमारी नहीं फैलेगी. 2 लाख 37000 जानवरों में से काफी जानवरों को वैक्सीनेशन कर लिया है. 1300 शूकर में से भी 88% का वैक्सीनेशन हो गया है. जिले के सीमा पर निगरानी रखेंगे. शासन के निर्देश के अनुसार कोई भी बिना वैक्सीन वाला जानवर जिले की सीमा में प्रवेश न कर पाए ऐसा प्रयास है. शिफ्ट वाइस हम वेटरनरी चिकित्सकों की जिले के एंट्री पॉइंट पर ड्यूटी लगाएंगे. बाजारों में जो जानवर ले जाए जाते हैं. उनसे कई बार बीमारियां फैलती हैं, तो इसे रोकने का प्रयास है. कई बार जानवरों से बीमारियां इंसानों तक पहुंच जाती हैं. इसे भी प्रतिबंधित करने के लिए हम प्रयासरत हैं.

