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अलवर की सहकारिता राजनीति के 'चाणक्य' महेन्द्र शास्त्री का निधन, राजनीति में बेबाक टिप्पणी के लिए जाने जाते थे

पूर्व विधायक महेन्द्र शास्त्री लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे. इस कारण वे एक दशक से ज्यादा समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे.

कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता महेन्द्र शास्त्री
कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता महेन्द्र शास्त्री (File) (ईटीवी भारत अलवर)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 27, 2026 at 11:38 AM IST

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अलवर : मुंडावर से पूर्व विधायक और कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता महेन्द्र शास्त्री का गुरुवार को निधन हो गया, वे 95 साल के थे. उनके निधन पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत अन्य नेताओं ने दु:ख जताया है. शास्त्री अलवर की सहकारिता राजनीति के चाणक्य माने जाते थे. वे अपनी वाक पटुता और राजनीति में बेबाक टिप्पणी से सदैव चर्चा में रहे. वे पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे. उन्होंने जीवन की शुरुआत चपरासी की नौकरी से की और फिर शिक्षक व वकील के रूप में पहचान कायम कर विधायकी तक सफर तय किया. वे सहकारिता संस्थाओं में अनेक पदों पर भी रहे. पूर्व विधायक शास्त्री के निधन से जिले में शोक की लहर दौड़ गई.

पूर्व विधायक महेन्द्र शास्त्री के पुत्र मनीष चौधरी ने बताया कि महेंद्र शास्त्री 1962, 1980, 1990 और 2003 में चुनाव लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, 1985 में लोकदल के टिकट पर मुंडावर से चुनाव लड़कर विधायक बने. शास्त्री सहकारिता की राजनीति में लगातार आगे बढ़ते गए. वे को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष से लेकर राजस्थान राज्य सहकारी संघ तक अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहे. उन्हें 2010 में सहकारिता रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया. महेन्द्र शास्त्री ने दसवीं पास कर चपरासी की नौकरी की, फिर शिक्षक बने. बाद में एलएलबी कर वकालत भी की.

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राजनीति में महेंद्र शास्त्री का प्रवेश राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुंभाराम आर्य के प्रयास से हुआ. कुंभाराम आर्य ने शास्त्री की राजनीतिक सूझबूझ देख उन्हें अपना निजी सचिव (पीए) बना दिया. यहीं से शास्त्री के राजनीतिक अध्याय की नई शुरुआत हुई. मनीष चौधरी ने बताया कि महेन्द्र शास्त्री का सार्वजनिक जीवन निरंतर जनहित, संगठन निर्माण और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित रहा. प्रदेश की राजनीति में उनके पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया, अशोक गहलोत और भाजपा के भैरोंसिंह शेखावत से अच्छे संबंध रहे. वहीं, अलवर जिले में मा. भोलाराम और शोभाराम से उनके अच्छे राजनीतिक संबंध रहे.

लंबे समय से थे अस्वस्थ : पूर्व विधायक महेन्द्र शास्त्री लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे. इस कारण वे एक दशक से ज्यादा समय से सक्रिय राजनीति से दूर रहकर अलवर में मोती डूंगरी स्थित अपने निवास पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे. इस दौरान जाट आरक्षण आंदोलन में उनके सहयोगी रहे देश के पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी पिछले दिनों उनके स्वास्थ्य का हाल जानने अलवर में उनके निवास पर आए. वहीं, पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह, प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली एवं कांग्रेस व अन्य दलों के वरिष्ठ नेता भी उनके स्वास्थ्य का हाल जानने पिछले दिनों उनके निवास पर पहुंचे थे. गुरुवार को महेन्द्र शास्त्री के निधन का समाचार सुनते ही प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली अलवर स्थित उनके निवास पर पहुंचे और शोक संतृप्त परिवार को ढांढस बंधाया.