उत्तराखंड में मदरसों की नई व्यवस्था होगी लागू, चंदा जुटाने के नियमों में सख्ती, सत्यापन के बाद मिलेगा प्रमाण पत्र
उत्तराखंड में मदरसों के सत्यापन के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा. साथ ही मदरसों के चंदा जुटाने के नियमों में सख्ती होगी.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 30, 2026 at 7:48 AM IST
|Updated : August 30, 2026 at 7:57 AM IST
देहरादून: उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. इसी क्रम में प्रदेश में में मदरसों के संचालन और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी. मदारिस-ए-अरबिया के तस्दीकनामा जारी करने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने के लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है. देहरादून में ईद के बाद से इस विषय पर लगातार अध्ययन और आवश्यक सुधारों पर काम किया जा रहा है. विभिन्न संस्थाओं के सत्यापन फॉर्म और उनकी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया गया. इसके बाद मदरसों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नया फॉर्म तैयार किया गया है. जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा.
गौर हो कि रमजान के महीने में देहरादून और आसपास के इलाकों में मदरसों के सफीर चंदा लेने के लिए बड़ी तादाद में आते हैं. इन सफीरों को काजी हशीम अहमद सिद्दीकी की तरफ से तस्दीकनामा जारी किया जाता है. इसी अहम जिम्मेदारी को देखते हुए अब तस्दीक की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया जा रहा है. अब इसे सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि पूरी तरह से दस्तावेजी जांच और सत्यापन से जोड़ा जाएगा.
प्रदेश में मदरसों के सत्यापन के लिए अब नया फॉर्म भरना होगा. वहीं फॉर्म में मदरसे से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां देनी होगी. नए फॉर्म में मदरसे का नाम, पूरा पता, और मुखिया (मोहतमिम/नाजिम) की जानकारी देनी होगी. वहीं ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन, मान्यता और जमीन-इमारत के कागजात भी जमा करने होंगे. मदरसे में कितने छात्र पढ़ते हैं, उनमें स्थानीय और बाहर के छात्र कितने हैं, इसकी पूरी जानकारी भी देनी होगी.
पढ़ाई कैसे होती है, कितने शिक्षक और स्टाफ हैं, ये भी बताना होगा. हर साल का खर्च, ऑडिट रिपोर्ट, परीक्षा का रिजल्ट और रसीद बुक की जानकारी भी देनी होगी. पारदर्शिता के लिए मदरसे की इमारत और बोर्ड की फोटो GPS कैमरे से लेनी होगी और कक्षा का वीडियो भी देना होगा. साथ ही स्थानीय सम्मानित लोगों की जानकारी भी फॉर्म में शामिल करनी होगी.
फॉर्म और सभी आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने के बाद देहरादून काजी की ओर से उनकी बारीकी से जांच-पड़ताल की जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर मौके पर जाकर मदरसे की वास्तविक स्थिति और शिक्षण गतिविधियां की भी जांच की जाएगी. तमाम जांच पूरी होने और दस्तावेजों से इत्मीनान के बाद ही शहर काजी मुफ्ती हशीम अहमद कासमी की ओर से सत्यापन प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा.
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मदरसे का बाकायदा रिकॉर्ड शहर काजी के दफ्तर में सुरक्षित रखा जाएगा. सालाना तजदीद के समय पिछले वर्ष का तस्दीकनामा और ऑडिट रिपोर्ट/बैलेंस शीट प्रस्तुत करना पर्याप्त होगा. देहरादून काजी हशीम अहमद सिद्दीकी के अनुसार इस पहल का मकसद किसी मदरसे के लिए परेशानी पैदा करना नहीं, बल्कि तस्दीक के अमल में पारदर्शी और भरोसा पैदा करना, सही और जरूरतमंद मदरसे तक सहूलियत देना है.
नई व्यवस्था की अहम बातें
- पहले से चली आ रही तस्दीक व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है
- जांच के लिए निर्धारित फॉर्म के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा
- दस्तावेजों और जानकारी की बारीकी से जांच-पड़ताल के बाद ही शहर काजी की ओर से तस्दीक जारी की जाएगी
- आवश्यकता पड़ने पर मौके पर जाकर मदरसे की तस्दीक की जाएगी और प्रत्येक मदरसे का बाकायदा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा
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