रुद्रपुर में पेट्रोल भरवाते ही अचानक बंद हुए दर्जनों वाहन, उपभोक्ताओं का हंगामा, मिलावटी ईंधन का आरोप, पंप क्लोज्ड
उपभोक्ताओं के हंगामे को देखते हुए पेट्रोल पंप प्रबंधन ने उनके पैसे वापस लौटाए, जिला पूर्ति विभाग मिलावट की जांच कर रहा है

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 1, 2026 at 11:37 AM IST
|Updated : July 1, 2026 at 12:18 PM IST
रुद्रपुर: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद मुख्यालय रुद्रपुर में एक पेट्रोल पंप पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पेट्रोल भरवाने के बाद दर्जनों वाहन कुछ ही दूरी पर जाकर अचानक बंद हो गए. नाराज उपभोक्ताओं ने पेट्रोल में मिलावट और अत्यधिक इथेनॉल होने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया. पूर्ति विभाग ने फिलहाल पेट्रोल पंप को बंद करवा दिया है.
पेट्रोल भरवाने के बाद गाड़ियों का चलना हुआ बंद: मौके पर कुछ बाइकों से निकाले गए पेट्रोल का रंग अलग-अलग दिखाई देने का दावा किया गया. बढ़ते विवाद के बीच पेट्रोल पंप प्रबंधन ने प्रभावित उपभोक्ताओं को निकाले गए पेट्रोल की राशि वापस कर दी. इस पूरे मामले ने ईंधन की गुणवत्ता और उसकी जांच व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
वाहन चालकों ने लगाया पेट्रोल में मिलावट का आरोप: उधम सिंह नगर जनपद के रुद्रपुर स्थित एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. पेट्रोल भरवाने के बाद दर्जनों वाहन कुछ ही दूरी पर जाकर अचानक बंद हो गए. इससे नाराज वाहन चालक बड़ी संख्या में पेट्रोल पंप पर पहुंच गए और जमकर हंगामा किया. उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि पेट्रोल में अत्यधिक इथेनॉल या किसी अन्य तरल की मिलावट की गई है, जिसके कारण उनके वाहन खराब हो गए.

पेट्रोल पंप पर किया विरोध प्रदर्शन: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई वाहन चालक पेट्रोल भरवाकर पेट्रोल पंप से निकले ही थे कि उनकी गाड़ियां रास्ते में बंद होने लगीं. एक-दो नहीं बल्कि लगातार कई वाहनों में एक जैसी समस्या आने से लोगों को संदेह हुआ कि दिक्कत पेट्रोल की गुणवत्ता में है. इसके बाद प्रभावित वाहन चालक वापस पेट्रोल पंप पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. देखते ही देखते मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई.

हर वाहन से निकाले पेट्रोल का दिखा अलग रंग: हंगामे के दौरान पेट्रोल पंप के सेल्स मैनेजर ने कुछ प्रभावित वाहनों के टैंक से पेट्रोल निकलवाकर जांच के लिए दिखाया. मौके पर मौजूद लोगों का दावा है कि अलग-अलग वाहनों से निकाले गए पेट्रोल का रंग एक जैसा नहीं था, बल्कि उसमें अंतर दिखाई दे रहा था. इससे उपभोक्ताओं का गुस्सा और बढ़ गया. लोगों का कहना था कि यदि ईंधन मानकों के अनुरूप होता, तो इतनी बड़ी संख्या में वाहन एक साथ खराब नहीं होते.
पेट्रोल पंप प्रबंधन ने नहीं माना मिलावट है: विरोध बढ़ने पर पेट्रोल पंप कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं से बातचीत की. इस दौरान कर्मचारियों की ओर से बताया गया कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा अधिक होने के कारण कुछ वाहनों में दिक्कत आ सकती है. हालांकि उन्होंने मिलावट की बात स्वीकार नहीं की, लेकिन प्रभावित उपभोक्ताओं की बाइकों से निकाले गए पेट्रोल की पूरी राशि वापस कर दी. इसके बाद कुछ देर में मामला शांत हुआ.

इस घटना ने पेट्रोल की गुणवत्ता, ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था और उसकी निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि पेट्रोल की समय-समय पर सही तरीके से जांच होती रहे, तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है. लोगों ने संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
पेट्रोल के पैसे लौटाए गए: फिलहाल पेट्रोल पंप प्रबंधन ने प्रभावित लोगों को पैसे वापस कर दिए हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि केवल पैसे लौटाना पर्याप्त नहीं है. यह जांच होनी भी जरूरी है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के बंद होने की वास्तविक वजह क्या थी और यदि ईंधन की गुणवत्ता में कोई कमी थी, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है. अब सभी की नजर संबंधित विभाग की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है.
जिला पूर्ति विभाग करा रहा है जांच: जिला पूर्ति अधिकारी विनोद तिवारी ने बताया कि-
पेट्रोल पंप को बंद कर दिया गया है. जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं. जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी.
-विनोद तिवारी, जिला पूर्ति अधिकारी-
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