यूपी की सड़कों पर अब ओवर स्पीड चलना पड़ेगा भारी, रेडार गन और हाईटेक कैमरे से लैस गाड़ियों से होगा ऑटोमेटिक चालान
आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय ने कहा, प्रवर्तन अधिकारियों को अब जो गाड़ियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, उनमें मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 7:15 PM IST
लखनऊ: आबादी के लिहाज से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां पर सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे भी हैं. सड़कें भी बेहतर हो रही हैं और यही बेहतर सड़कें और एक्सप्रेस वे हादसों का भी बड़ा कारण बन रहे हैं. ओवर स्पीड चलते वाहन दुर्घटनाओं का मुख्य कारण हैं. हादसों के मामले में भी देश में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है हालांकि ओवर स्पीडिंग के मामले में यूपी का स्थान दूसरा है.
वाहन स्पीड रेडार गन तकनीक से लैस हैं: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी में सड़क हादसों में 50 प्रतिशत तक की कमी लाने के लिए लगातार अभियान चलाने के निर्देश देते रहते हैं. अब परिवहन विभाग ने ऐसी तैयारी कर ली है जिससे यूपी की सड़कों पर वाहन चालकों को ओवर स्पीड करना बहुत भारी पड़ेगा. यूपी के सभी 75 जिलों में परिवहन विभाग के अधिकारियों को मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस वाहन दिए गए हैं.

अधिकारियों को दी जा रही ट्रेनिंग: अत्याधुनिक कैमरे और स्पीड रेडार गन तकनीक से यह वाहन लैस हैं जो कई मीटर की दूरी से ओवर स्पीड वाहन को कैप्चर कर लेगा, साथ ही अन्य मानकों का उल्लंघन कर रहे वाहनों की भी तस्वीर क्लिक करेगा और इन वाहनों का ऑटोमेटिक चालान हो जाएगा. अभी तक परिवहन विभाग के पास ऐसे वाहन नहीं थे जो टेक्नोलॉजी से लैस हों, लेकिन अब ऐसे वाहन दिए जा रहे हैं और अधिकारियों की ट्रेनिंग भी शुरू हो गई है.
नियमों का उल्लंघन किया तो होगा एक्शन: ट्रेनिंग के बाद अधिकारी इन्हीं हाईटेक वाहनों को लेकर सड़क पर अभियान चलाएंगे. इसके बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले नहीं बच पाएंगे. उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के अधिकारी अब ऐसे वाहनों से लैस होने जा रहे हैं जो यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन स्वामियों पर कड़ा शिकंजा कसेंगे. विभाग के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) और यात्री कर अधिकारियों को यह हाईटेक वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

116 हाईटेक वाहनों ने होगी निगरानी: कुल 116 हाईटेक वाहन दिए जा रहे हैं. इन इंटरसेप्टर वाहनों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो हाईवे और एक्सप्रेस वे पर तय मानक से ज्यादा स्पीड से वाहन संचालित करते हुए पाए जाने वाले वाहन चालकों का पलक झपकते ही चालान जारी कर देंगे. सभी वाहनों में सेंसर युक्त कैमरे लगाए जा रहे हैं जो मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस हैं. यह सभी कैमरे रिमोट सेंसिंग तकनीक से लैस हैं.
700 मीटर की दूरी से वाहनों की स्पीड चेक होगी: वाहनों में स्पीड रेडार गन लगी होगी जो 700 मीटर तक की दूरी से ही वाहन की स्पीड पकड़ने में सक्षम हैं. गाड़ी के अंदर बैक साइड में कैमरे लगाए गए हैं जो हाईवे पर खड़े होकर आने जाने वाले वाहनों की स्पीड पर नजर रखेंगे. अधिकारी कैमरे को ऑटोमेटिक मोड में ऑन कर देंगे और इसके बाद कैमरे का काम शुरू हो जाएगा. वाहन की स्पीड 700 मीटर दूर से स्पीड रेडार गन काउंट कर लेगी और 50 मीटर तक करीब आने पर नंबर प्लेट की फोटो कैमरा कैप्चर कर लेगा.

ज्यादा स्पीड होते ही ऑटोमेटिक चालान होगा: मानक से ज्यादा स्पीड वाले वाहन का ऑटोमेटिक चालान कर देगा. परिवहन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि रेडार की कोहरे में क्वालिटी 12 मीटर तक है. यानी कोई ओवर स्पीड वाहन 12 मीटर कैमरे के करीब आएगा वैसे ही वाहन की नम्बर प्लेट की फोटो कैप्चर हो जाएगी. परिवहन विभाग के एआरटीओ प्रवर्तन और पीटीओ को इन वाहनों में लगे स्पीड रेडार गन और हाईटेक को ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी जा रही है.
लखनऊ, अयोध्या और कानपुर के अधिकारियों को ट्रेनिंग: पहले दिन बुधवार को लखनऊ, अयोध्या और कानपुर जोन के अधिकारियों को इन्हें ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी गई है. यह अधिकारी वाहनों को लेकर सड़क पर ओवर स्पीड वाहनों का चालान करने उतरेंगे. जल्द ही प्रदेश के सभी प्रवर्तन अधिकारियों को इस तरह की ट्रेनिंग देकर वाहन सौंपे जाएंगे और फिर हाईवे और एक्सप्रेस वे और ओवर स्पीड वाहनों पर अंकुश लगाने की कड़ी कार्रवाई शुरू हो जाएगी.
- बड़े कॉमर्शियल वाहनों का चालान चार हजार रुपये.
- छोटी गाड़ी का चालान दो हजार रुपये.
- 116 वाहन हैं जिनमें आठ इनोवा इंटरसेप्टर हैं और 108 स्कॉर्पियो
- ऑटोमेटिक कैमरा कैप्चर करता है जो वाहन मानक के विपरीत चलते हैं
- अनियंत्रित /तेज गति से हो रहीं दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए
क्या कहते हैं आंकड़े: आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में सड़कों पर देश में कुल 1,77,177 लोगों की जान गई है और इनमें से 24,118 मौतें उत्तर प्रदेश में ही हुईं, जो कुल मौतों का 13.61 फीसद है. देश में सड़क दुर्घटना से मरने वाले सात लोगों में से एक व्यक्ति यूपी का है. पूरे देश में जहां 4,87,705 सड़क हादसे हुए हैं.
वहीं अकेले उत्तर प्रदेश में 46,052 हादसे हुए जो कुल सड़क दुर्घटनाओं का 9.44 फीसद है. आंकड़े ये भी बताते हैं कि वर्ष 2024 में ओवरस्पीडिंग की वजह से उत्तर प्रदेश में 12,010 मौतें हुईं, जबकि साल 2023 में 8726 मौतें हुई थीं. यानी 3284 ज्यादा मौतें हुईं. ओवरस्पीड से मौतों में प्रदेश का बड़ा हिस्सा है.
ओवर स्पीड को कंट्रोल करने के लिए हाईटेक वाहन: लखनऊ के आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय का कहना है कि प्रवर्तन अधिकारियों को अब जो गाड़ियां उपलब्ध कराई जा रही हैं उनमें मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं मानवीय भूल और ड्राइवरों की लापरवाही से होती हैं. इनमें सबसे बड़ा कारण ओवर स्पीड निकलकर सामने आया है.
40 प्रतिशत दुर्घटनाएं ओवर स्पीड के कारण होती हैं: प्रभात पांडेय ने कहा कि ओवर स्पीड से लगभग 40 प्रतिशत और मानवीय भूल से 30 प्रतिशत घटनाएं होती हैं जो कुल मिलाकर 70% पहुंच जाती हैं. इन हादसों में बड़ी जनहानि होती है. ओवर स्पीड पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए ही हाईटेक वाहन तैयार किए गए हैं. यह वाहन स्पीड रेडार गन और हाईटेक कैमरे से लैस है जिसकी नजर से कोई भी ओवर स्पीड वाहन बच नहीं पाएगा.
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