VB - G RAM G : राठौड़ बोले- कांग्रेस को 'राम' से आपत्ति क्यों?, नए प्रावधान ग्रामीण भारत के सपनों को नई उड़ान देंगे
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्ष के 'विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन' के नाम को लेकर किए जा रहे विरोध पर तीखी प्रतिकिया दी.

Published : January 6, 2026 at 6:41 PM IST
जयपुर: 'वीबी-जी राम जी' पर देश भर में सियासी संग्राम मचा हुआ है. मनरेगा का नाम बदलने पर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मंगलवार को पलटवार किया. राठौड़ ने भाजपा मुख्यालय पर मीडिया से बात करते हुए कहा- कांग्रेस को 'राम' नाम से आपत्ति क्यों ?, जबकि 'विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन' (वीबी-जी राम जी) के नए प्रावधान ग्रामीण भारत के सपनों को नई उड़ान देंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को विकास या रोजगार से नहीं, बल्कि 'राम' नाम से आपत्ति है. भाजपा ने रोजगार और आजीविका मिशन को विकसित भारत की संकल्पना से जोड़ते हुए नया कानून बनाया है, जिस पर किसी को एतराज नहीं होना चाहिए.
कांग्रेस ने नाम बदलने का रिकॉर्ड बनाया : मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में योजनाओं के नाम बदलने का रिकॉर्ड बनाया है. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम योजना का नाम जवाहर रोजगार योजना, फिर नरेगा और मनरेगा किया गया. इसी तरह ग्रामीण आवास योजना को इंदिरा आवास योजना और ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना बनाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने करीब 600 योजनाओं के नाम बदलकर गांधी-नेहरू परिवार से जोड़ दिए, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी भी योजना का नाम अपने या किसी परिवार के नाम पर न रखकर सेवा, सनातन और जनकल्याण से जोड़ने का कार्य किया है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राजभवन को लोक भवन, राजपथ को कर्तव्य पथ, रेसकोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग और प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ नाम दिया. साथ ही भारतीय दंड संहिता को भारतीय न्याय संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में परिवर्तित कर भारतीय परंपरा और पहचान को मजबूत किया.
125 दिन की रोजगार गारंटी, भ्रष्टाचार पर सख्ती : मदन राठौड़ ने बताया कि वीबी-जी राम जी योजना के तहत अब 125 दिन की रोजगार गारंटी मिलेगी, जबकि पहले 100 दिन का प्रावधान था. ग्रामसभा गांव की जरूरतों के अनुसार कार्य तय करेगी, जिनमें जल संरक्षण, बुनियादी ढांचा, आजीविका संरचना निर्माण और आपदा प्रबंधन शामिल होंगे. इस योजना के तहत भुगतान सीधे लाभार्थी के खाते में जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा.
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उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने स्वयं स्वीकार किया था कि केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही जनता तक पहुंचते थे. आज वही लोग इस योजना का विरोध कर रहे हैं, जो जनता के हक का 85 पैसा खा जाते थे. राठौड़ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी गांव और गरीब के कल्याण को प्राथमिकता रखती है. इस कानून के माध्यम से गांव के जरूरतमंद गरीब को रोजगार मिलेगा और गांव में आधारभूत संरचनाओं का निर्माण होगा. इससे गांव विकसित होगा.
सवाल: किसान VB-GRAMG का समर्थन क्यों कर रहा है?
— BJP Rajasthan (@BJP4Rajasthan) January 6, 2026
जवाब...
मनरेगा का सिर्फ नाम नहीं बदला गया है, बल्कि VB-G RAM G एक्ट ने रोजगार और खेती के बीच तालमेल बनाया है, ताकि किसान, मजदूर और गांव तीनों को स्थिरता मिल सके।
इसलिए किसान VB-GRAMG एक्ट का समर्थन कर रहा है।… pic.twitter.com/RXMP7vNeT6
मनरेगा में घोटालों का आरोप : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस शासन में मनरेगा में बड़े घोटाले सामने आए. तत्कालीन मंत्री द्वारा बाड़मेर और नागौर में 300 करोड़ रुपये के घोटाले की बात स्वीकार की गई थी. फर्जी जॉब कार्ड, डुप्लीकेट मस्टर रोल और भुगतान में गड़बड़ी के लाखों मामले दर्ज हुए. उन्होंने कहा कि अब नए कानून में सामाजिक ऑडिट अनिवार्य होगा, बायोमैट्रिक उपस्थिति, जियो टैगिंग और एआई तकनीक का उपयोग किया जाएगा. समय पर भुगतान, बेरोजगारी भत्ता और किसानों के हित में काम रोकने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं. मदन राठौड़ ने कहा कि भाजपा गांव और गरीब के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और यह कानून विकसित ग्राम पंचायतों के माध्यम से विकसित भारत के सपने को साकार करेगा.
कांग्रेस से ज्यादा भाजपा सरकार में जारी हुई राशि : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस जिस मनरेगा को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है, उस मनरेगा में अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए है, जिसमें सर्वाधिक मोदी सरकार ने 11 साल में 8.53 लाख करोड़ रुपए खर्च किए. नए कानून से ग्राम पंचायत की ग्राम सभा में तय किए गए काम के आधार पर 125 दिन रोजगार की गारंटी मिलेगी, काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलेगा. सामाजिक ऑडिट अनिवार्य होगी.
इसके साथ ही फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो टैगिंग और एआई तकनीक के उपयोग सहित अनेक कदम उठाए गए है. बुवाई और कटाई के समय में किसानों को पर्याप्त मजदूरी मिले. इसके लिए 60 दिन तक राज्य सरकारें काम को रोक सकेगी. श्रमिकों का भुगतान 15 दिनों में अनिवार्य रूप से करने और भुगतान नहीं करने की दिशा में मुआवजा करने देने का प्रावधान किया गया है. इस नए कानून से ना केवल जरूरत मंद को रोजगार मिलेगा, बल्कि विकसित भारत के लिए विकसित ग्राम पंचायत बनाने के अभियान को गति भी मिलेगी.

