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देवनानी ने मुस्तफिजुर की रिलीज को बताया सही निर्णय, बोले- जो देश का दुश्मन वो हमारा दुश्मन

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार, IPL में मुस्तफिजुर की रिलीज, विधायकों के स्टिंग पर खुलकर अपनी राय व्यक्त की.

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी
वासुदेव देवनानी (ETV Bharat Udaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 3, 2026 at 7:26 PM IST

3 Min Read
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उदयपुर: राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी शनिवार को उदयपुर के दौरे पर रहे. इस दौरान उन्होंने सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की और कई समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय रखी. साथ ही, आरएनटी मेडिकल कॉलेज के न्यू ऑडिटोरियम में उदयपुर बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित किया.

देवनानी ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर उचित कदम उठाने चाहिए. इसी संदर्भ में आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) द्वारा बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से रिलीज करने के बीसीसीआई के निर्देश पर देवनानी ने कहा, "जो देश का दुश्मन है, उसे बीसीसीआई के निर्देश पर रिलीज करना सही निर्णय है."

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी (ETV Bharat Udaipur)

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विधायकों के स्टिंग पर बोले: प्रदेश में तीन विधायकों के स्टिंग ऑपरेशन सामने आने के मामले पर देवनानी ने कहा कि सदन को इस संबंध में शिकायतें मिली थीं. इसके लिए एक कमेटी गठित की गई है. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद इसे सदन में रखा जाएगा और यदि शिकायत सही पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

विधानसभा में बदलाव और डिजिटलीकरण: विधानसभा में किए गए बदलावों पर बोलते हुए देवनानी ने कहा कि युवा संसद और विधानसभा में प्रदर्शनी को आम लोगों के लिए खोलने से बड़ी संख्या में लोगों ने इसे देखा और सराहा. साथ ही, विधानसभा को पेपरलेस बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं. अब सभी विधायक पैड पर डिजिटल हस्ताक्षर करेंगे, जिससे कागज और समय दोनों की बचत होगी.

अधिवक्ताओं को किया संबोधित: उदयपुर बार एसोसिएशन के शपथ ग्रहण समारोह में देवनानी ने अधिवक्ता समाज को न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण धुरी बताया. उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की भूमिका न्याय के प्रति विश्वास कायम रखने में विशेष है. वे अपने कार्य में शुचिता, सौहार्द और संवेदनशीलता का समावेश करते हुए पीड़ितों और जरूरतमंदों को सस्ता एवं सुलभ न्याय दिलाने का प्रयास करें.

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देवनानी ने भारतीय न्याय व्यवस्था के प्राचीन इतिहास का जिक्र करते हुए मनुस्मृति और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख किया. स्वतंत्रता संग्राम में अधिवक्ताओं की भूमिका को याद करते हुए महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, लाला लाजपत राय जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का नाम लिया, जो पेशे से वकील थे. संविधान निर्माण में भी उनकी भूमिका को सराहा.

उन्होंने अधिवक्ताओं से अपील की कि मुकदमा जीतना ही लक्ष्य न हो, बल्कि न्याय की सुनिश्चितता सर्वोपरि हो. वरिष्ठ अधिवक्ता युवाओं को प्रेरित और संस्कारित करें ताकि न्याय की गरिमा बनी रहे. अंत में उन्होंने कहा कि न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने वह पट्टी हटा दी है, जिससे न्याय में पारदर्शिता और निष्पक्षता मजबूत हुई है.

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