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अनोखे स्टार्टअप से आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं; लोगों को खूब भा रहे गोबर के प्रोडक्ट

जिला मिशन प्रबंधक विक्रम सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के जरिए महिलाओं को अलग-अलग रोजगार से जोड़ा जाता है.

लोगों को खूब भा रहे गोबर के प्रोडक्ट.
लोगों को खूब भा रहे गोबर के प्रोडक्ट. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : March 3, 2026 at 12:10 PM IST

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वाराणसी: अब तक आपने गोबर से बनने वाले पेंट, लकड़ी, उपले के बारे में सुना होगा. अब गोबर से नए-नए उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं. ललितपुर की महिलाएं गोबर से कई तरह की कलाकृतियां तैयार कर रही हैं, जिससे उनकी आमदनी भी हो रही है.

गोबर के यह उत्पाद इको फ्रेंडली होने के साथ ही बेहद मजबूत हैं. यह प्रोडक्ट गौ संरक्षण का भी संदेश दे रहे हैं. इन महिलाओं ने मात्र 4000 रुपए से यह स्टार्टअप शुरू किया और अब 60 से 70 हजार रुपए की महीने की आमदनी हो रही है.

घर के सजावटी सामान: ललितपुर की रहने वाली महिला कारीगर लाली देवी ने बताया कि गोबर से स्टार्टअप शुरू किया तो पहली बार घरों को सजाने का सामान तैयार किया. इसकी खूब सराहना की गई. उन्होंने बताया कि अब हम लोग मोमेंटो तैयार कर रहे हैं. घड़ी, मिरर, मटके, सिंहासन, तोरण के अलावा अलग-अलग सजावटी सामान भी बना रही हैं.

महिला आर्टिजन बताती हैं कि उन्होंने गाय को संरक्षित रखने की सोच के साथ गोबर स्लैप की कलाकृति बनानी शुरू की. उन्होंने बताया कि बेटा पेंटिंग बनाता है और उसी ने यह प्रोडक्ट बनाने सिखाए. अब महिला समूह की 12 महिलाएं गोबर से अलग-अलग हैंडीक्राफ्ट के समान बना रही हैं.

अनोखे स्टार्टअप से आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं. (Video Credit: ETV Bharat)

ईको फ्रेंडली और मजबूत: वह बताती हैं कि उत्पादों को बनाने के लिए सबसे पहले गोबर को साफ किया जाता है. इसके बाद उसमें गोंद डालकर अलग-अलग तरीके की आकृति को गढ़ा जाता है. इसकी वजह से यह बेहद मजबूत और वाटरप्रूफ होता है. इसमें हम अल्पना का प्रयोग करते हैं. इसे सजाने के लिए चावल के सफेद पेंट का प्रयोग करते हैं. कलावा बांधते हैं. यह पूरी तरीके से हमारी संस्कृति को भी परिलक्षित करता है.

महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर: वह कहती हैं कि उनके साथ 12 महिलाएं जुड़कर के इन उत्पादों को तैयार करती हैं. इसमें वह मटका, सिंहासन, पेन होल्डर, तोरण, लैंप और भी अलग-अलग तरीके के सामानों को तैयार करती हैं. इनकी कीमत 100 से शुरू होकर 500 तक है. वह कहती हैं किउन्होंने 4000 रुपए से स्टार्टअप शुरू किया था. अब 60 से 70 हजार महीना कमा लेती हैं.

उनसे जुड़ी हुई महिलाएं भी 500 से 600 रुपए हर दिन कमाती है. इन्हें बनाने में उन्हें बहुत खुशी मिलती है. इसे तैयार करने के पीछे उनका उद्देश्य यह है कि गांव के लोग गायों को खुले में न छोड़ें बल्कि उनकी सेवा करें. उनके उत्पादों के जरिए आत्मनिर्भर भी हो सकें. इससे गायों का ख्याल भी रखा जाएगा और इको फ्रेंडली उत्पादन भी तैयार किए जाएंगे.

देश भर में बढ़ रही डिमांड: वह बताती हैं कि उनके उत्पादों की डिमांड दिल्ली, मुंबई, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में खूब है. मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी उन्हें सराहा गया है. समय-समय पर सरकारी महकमें के जरिए उनके उत्पादों का ऑर्डर भी दिया जाता है. इन उत्पादों को उपहार स्वरूप राज्य में आने वाले मेहमानों को भी दिया जाता है.

गोबर के उत्पाद कर रहे आकर्षित: लाली कहती हैं कि मेले के जरिए वह अपने सामानों को समय समय पर लोगों के सामने प्रस्तुत करती हैं. इसमें उनकी मदद उत्तर प्रदेश सरकार करती है. इसी क्रम में वह बनारस आई हैं. यहां सरकारी मेले में उन्होंने अपने सामानों की प्रदर्शनी लगाई है. उनके सामानों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. इसकी जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं.

वहीं, उत्पादों की खरीदारी करने आए लोगों ने बताया कि अब तक वह गोबर के पेंट और उपले के बारे में जानते थे, लेकिन पहली बार उन्होंने सजावटी सामानों को भी देखा है. यह देखने में बेहद सुंदर और इको फ्रेंडली हैं. यह शुद्ध है और इन्हें घर में पूजा में प्रयोग किया जा सकता है.

महिलाओं को प्रशिक्षण: जिला मिशन प्रबंधक विक्रम सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के जरिए महिलाओं को अलग-अलग रोजगार से जोड़ा जाता है. ललितपुर की महिलाओं ने अपने समूह के जरिए गोबर के उत्पादों को तैयार किया है.

इसके जरिए वह आत्मनिर्भर बन रही हैं. इसके साथ ही ईको फ्रेंडली उत्पादों को तैयार कर रही हैं. इसके लिए इन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है. मेले के माध्यम से बाजार भी उपलब्ध कराया जाता है.

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