सनातन संस्कृति को वैज्ञानिक आधार देने की मुहिम ठप, काशी के वैदिक विज्ञान केंद्र में नहीं शुरू हो सकीं शोधपरक गतिविधियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार वैदिक विज्ञान केंद्र की 5 मंजिला इमारत का लोकार्पण 2019 में हुआ था.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : May 31, 2026 at 3:06 PM IST
वाराणसी : धर्म और विज्ञान को जोड़कर सनातन संस्कृति को अधिक प्रभावशाली व वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में महत्वाकांक्षी परियोजना 'वैदिक विज्ञान केंद्र' की शुरुआत की गई थी. वर्ष 2017 में प्रस्तावित परियोजना का 2018 में शिलान्यास और 2019 में पांच मंजिला इमारत का लोकार्पण भी हुआ. हालांकि लोकार्पण के बाद यहां रिसर्च (शोध) की कोई उपलब्धि सामने नहीं आई है. ऐसे में इस केंद्र की गतिविधियां सवालों के घेरे में हैं. पढ़ें ईटीवी भारत की खास खबर...
दरअसल, पीएम मोदी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के न्यू विश्वनाथ टेंपल के बिल्कुल बगल में वैदिक विज्ञान केंद्र की स्थापना करके सनातन संस्कृति को अधिक प्रभावशाली व वैज्ञानिक बनाने का सपना देखा था. साथ ही संभावना जताई थी कि केंद्र की स्थापना के बाद वेद धर्म और विज्ञान का मेल नए-नए रिसर्च के रूप में सामने आएगा जो वैदिक मंत्रों, वैदिक साधनाओं, वैदिक तौर तरीकों को विज्ञान से जोड़कर प्रभावशाली तरीके से सनातन संस्कृति का वैज्ञानिक आधार को सिद्ध करेगा. हालांकि ऐसा कुछ नहीं हो सका और आज 5 मंजिला भवन सिर्फ एक नुमाइश बनकर रह गया है.

वैदिक विज्ञान केंद्र की स्थापना का उद्देश्य | |
| वेद विज्ञान के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी संस्थान के रूप में केन्द्र को प्रतिष्ठित करना. | |
| वैदिक संहिताओं और अन्य सहायक ग्रन्थों में उपलब्ध विज्ञान के मौलिक, मूलभूत तथ्यों के गहन अध्ययनोपरान्त तत्सन्दर्भित ग्रन्थों को तैयार करना. | |
| वैदिक ऋषियों द्वारा दृष्ट ज्ञान मीमांसा के आधार पर प्रायोगात्मक प्रक्रिया के माध्यम से विज्ञान-दर्शन के सन्दर्भित परिणाम प्रस्तुत करना. | |
| वैदिक साहित्य का विस्तृत एवं विवेचनात्मक अध्ययन करना तथा उसकी मौखिक पाठ परम्परा, दर्शन के साथ-साथ वैदिक सभ्यता एवं संस्कृति के विज्ञान का अध्ययन एवं अनुसन्धान करना. | |
| भारत की बौद्धिक विरासत का अध्ययन, शोध एवं प्रवर्तन करना. | |
| लघु अवधि के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के संचालन के माध्यम से वेदकालीन ज्ञान परम्परा में व्यक्त विविध वैज्ञानिक पक्षों के अध्ययन को औपचारिक बनाना. | |
| वैदिक ऋषियों एवं विद्वानों के तर्कसंगत और वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रोत्साहित करना तथा जिज्ञासुओं के मध्य विरासत में खोए हुए विश्वास को पुनर्जीवित करना. | |
| भारत की समृद्ध ज्ञान परम्परा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना एवं आधुनिक वैज्ञानिक परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता सिद्ध करना. | |
| वैदिक विज्ञान पर शोध कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए राष्ट्रिय एवं अन्तर राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के शोध संस्थानों के साथ सहयोग करना तथा छात्रों के लिए तत्सम्बद्ध विषयों को रोजगारपरक बनाना. | |
| वेदगत मनोविज्ञान, योग विज्ञान तथा भस्म आदि से सम्बद्ध आयुर्विज्ञान के अध्ययन प्रामाणिक शोध के लिए सामग्रियों को उपलब्ध कराना. साथ ही इससे सम्बन्धित अध्यापन के लिए पाठ्यक्रम का भी निर्माण करना. | |
| वर्तमान समय के वैज्ञानिक अनुसन्धानों में लाभ के लिए वैदिक ज्ञान प्रणाली को व्यापक स्तर पर उपयोगी बनाना. | |
| वैदिक विज्ञान की सहायता से आधुनिक ज्ञान की स्थिरता की जांच करना. | |
| वेद विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नोडल केन्द्र के रूप में कार्य करना. | |
| संस्कृत विद्वानों एवं वैदिक विज्ञान में रुचि रखने वाले वैज्ञानिकों को एक साथ लाना, जो वैदिक विज्ञान के साथ आधुनिक विज्ञान के समन्वित संश्लेषण के लिए कार्य कर सकें. | |
| भारत और विदेशों के विभिन्न पुस्तकालयों, संग्रहालयों एवं व्यक्तियों से वैज्ञानिक महत्त्व की वैदिक पाण्डुलिपियों अथवा डिजिटल प्रतियों को एकत्रित करना तथा उन्हें भावी पीढ़ी के लाभ के लिए सम्पादित व प्रकाशित कर सुरक्षित करना. |

वैदिक विज्ञान केंद्र का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश शासन से वर्ष 2017 में दिया. जिसे मूर्त रूप देने के लिए भवन का शिलान्यास 18 सितम्बर 2018 तथा भवन का उद्घाटन 16 फरवरी, 2020 को और दूसरे चरण का लोकार्पण 2022 में प्रधानमंत्री ने ही किया था. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी बिल्डिंग को तैयार करने में बहुत कम वक्त लगा, लेकिन इसके संचालन पूरी तरह से ठप है.

वैदिक विज्ञान केंद्र में कुल 28 पद ऐसे हैं जो 7 सालों में भरे नहीं जा सके. इनमें 7 विजटिंग फेलो, 7 रिसर्च अस्सिटेंट, 7 चेयर प्रोफेसर्स, 5 टीचिंग परमानेंट में 2 एसोसिएड प्रोफेसर, 3 अस्सिटेंट प्रोफेसर सहित 1 प्रोग्रामर और 1 अस्सिटेंट लाइब्रेरियन का पद अबतक खाली है. 28 में से 21 पद तो ऐसे हैं जो यहां रिसर्च और अन्य कामों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है और टीचिंग स्टाफ है. रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण इन पदों का विज्ञापन हर साल निकलता है, लेकिन नियुक्ति नहीं हो पाती.

वैदिक विज्ञान केंद्र में एक वर्षीय प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम की शुरुआत 2019-20 में हुई. 2021 से 3 नए कोर्स जुड़े जिनमें वैदिक साइंस-यूजी, वैदिक मैथ-यूजी, वैदिक विधि-पीजी चले. डिप्लोमा, जिसमें 2019 से 2024 तक 300 बच्चे यहां से निकले, लेकिन फिर कोर्स बंद हो गए. सबसे बड़ी बात यह है कि इतना बड़ा केंद्र जो 2019 से बनकर तैयार है और वहां टीचिंग स्टाफ अब भी नहीं है, सिर्फ 15 नॉन टीचिंग कांट्रेक्चुअल स्टाफ यहां पर ऑफ़िस वर्क कर रहे हैं. समन्वयक के पोस्ट पर धर्म विज्ञान संकाय के ही अलग-अलग प्रोफेसर्स कोई केंद्र की जिम्मेदारी दी जाती रही. जिनमे प्रो उपेंद्र कुमार त्रिपाठी, 2017 से 2024 तक, 2024 अक्टूबर से 2025 नवंबर तक प्रो राजाराम शुक्ल और नवम्बर 2025 से अबतक प्रो. विनय कुमार पांडेय ने ये जिम्मेदारी संभाली है.

वैदिक विज्ञान केन्द्र में गतिविधियां : वैदिक विज्ञान केंद्र में 7 साल में कई सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन जरूर किया गया. वेद वेदांग से जुड़ी कुछ किताबों का प्रकाशन भी हुआ कुछ पंचांग भी छपे, लेकिन अब ठप हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरे केंद्र के संचालन के लिए हर साल शिक्षा मंत्रालय का 5 करोड़ का फंड भी यहां भेजा जाता है, लेकिन स्टाफ न होने और रिसर्च न होने के कारण बजट भी वापस चला जाता है.
देश में दूसरा सबसे बड़ा शोध संस्थान : बेंगलूर में वैदिक केंद्र का संचालन होता है. यह दक्षिण में बड़ा केंद्र है. इस लिहाज से बनारस का वैदिक शोध केंद्र दूसरा सबसे बड़ा वैदिक विज्ञान केंद्र है. काशी हिंदू विश्वविद्यालय में स्थापित इस केंद्र का उद्देश्य परंपरा का रक्षण, व्यवस्थित शिक्षण, अनुसंधान तथा प्रकाशन द्वारा संवर्धन, प्रचार एवं प्रसार करना है. केंद्र में प्राचीन और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के अध्ययन के लिए सात विभाग हैं. इसका उद्देश्य अध्येताओं को वेद विद्या से संबंधित सामग्री उपलब्ध कराना है. इसमें वैदिक चिति एवं विशिष्ट यज्ञपात्र संग्रहालय भी है.
वैदिक केंद्र के समन्वयक प्रो. विनय कुमार पांडेय का कहना है कि राष्ट्र में प्रचलित शिक्षा प्रणाली संग अपनी जड़ों, परम्पराओं, संस्कृति और विज्ञान के बारे में सिर्फ जानना ही नहीं, बल्कि वैदिक परंपरा और वेदों में छुपे वैज्ञानिक राज को भी सामने लाना अनिवार्य है. इसलिए ही इस केंद्र की स्थापना हुई है. हम लगातार प्रयास कर रहे हैं और इस बार उम्मीद है कि इस वर्ष इसका संचालन शुरू होगा और हम वैदिक केंद्र की स्थापना को मूर्त रूप देकर धर्म और विज्ञान का विस्तृत रूप विश्व के सामने लाएंगे.
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