काशी में होली का उल्लास; जानें दुकानों के साथ ही हर घर में बनने वाली गुझिया क्यों है खास
गुझिया की शुरुआत 13वीं शताब्दी से मानी जाती है. पूर्वांचल के साथ बुंदेलखंड की यह महत्वपूर्ण मिठाई है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 1, 2026 at 1:40 PM IST
वाराणसी : काशी को त्योहारों का शहर कहा जाता है. यहां हर त्यौहार की अलग रंगत और उत्साह है. होली भी इन्हीं खास त्यौहारों में शुमार है. काशी में होली उत्सव और उल्लास बिल्कुल अलग होता है. साथ ही होली में बनारस की खास मिठाई (चंद्रकला गुझिया) का विशेष इतिहास है. खास बात यह है कि गुझिया दुकानों के साथ हर घर में तैयार होती है.
गुझिया की पौराणिक कहानी : मान्यता है कि गुझिया की शुरुआत 13वीं शताब्दी में हुई. वाराणसी की विद्जनों और ज्योतिषाचार्यों की मानें तो गुझिया भारतीय मिठाई है. इसको लेकर कई किवदंतियां हैं. होली पर मिष्ठान बनाने के पीछे की मंशा बुराई पर अच्छाई की जीत है. गुझिया की बात करें तो संस्कृत में इसका कर्णिका नाम से उल्लेख मिलता है. जिसे मेवे और शहद के जरिए तैयार किया जाता था. इसे गुझिया का प्रारब्ध प्रारूप भी माना जा सकता है जो कालांतर में गुझिया नाम से प्रसिद्ध है. गुझिया पूर्वांचल के साथ बुंदेलखंड क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण मिठाई है. वृंदावन में राधा रमण मंदिर में भगवान श्री कृष्ण को गुझिया और चंद्रकला का भोग लगाया जाता है. इससे भी कई किस्से जुड़े हुए हैं.
बहरहाल होली में गुझिया के बगैर यह त्यौहार फीका ही रहेगा. गुझिया सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि संस्कृति और परंपरा है, जो पुरातन काल से समाज में विद्यमान है. होली नजदीक है, ऐसे में घर से लेकर दुकानों तक गुझिया की महक तैर रही है. घरों में महिलाएं गुझिया तैयार कर रही हैं. वहीं दुकानदार भी तरह तरह गुझिया बना रहे हैं. भोजूबीर क्षेत्र में दो तरीके की गुझिया (रस भरी चंद्रकला और सुखी गुझिया बनती है.
कारीगर पवन बताते हैं कि होली के अवसर पर हर कोई गुझिया खाना पसंद करता है. गुझिया 300 से लेकर के हजारों तक में है. दुकानदार सूरज बताते हैं कि गुझिया का आर्डर पूर्वांचल के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से भी आता है. लोग ऑनलाइन भी आर्डर करते हैं. मुंबई, महाराष्ट्र, दिल्ली, कोलकाता तक वाराणसी की गुझियों की डिमांड है. गृहणी रंजना बताती हैं कि पूर्वांचल में गुझिया सिर्फ मिठाई नहीं, खुशियां मनाने का एक बहाना है. होली के एक महीने से घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं. जिसमें परिवार की सभी महिलाएं मिलकर पापड़ और गुझिया समेत कई तरह के पकवान बनाने में मदद करती हैं. इसी बहाने परिवार में लोग एक साथ जुड़ते हैं और खुशियां बांटते हैं.

