धार्मिक पर्यटन पर शोध करेगा BHU; 8 देशों का मिलेगा साथ, चमकेंगे छोटे-छोटे धार्मिक स्थल
बीएचयू में कला संकाय की डीन प्रोफेसर सुषमा घिल्डियाल ने बताया कि सेंटर फॉर टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में पहली बार नया सेंटर खुलेगा.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 8:39 AM IST
|Updated : January 8, 2026 at 3:04 PM IST
वाराणसी: दुनिया के 8 देशों के 16 प्रतिनिधि एक साथ मिलकर धार्मिक पर्यटन पर रिसर्च करेंगे. यूरोपीयन यूनियन ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) को ‘सेक्रेड ट्रेवेल्स फॉर ग्रोथ: हायर एजुकेशन एंड सस्टनेबल ग्रोथ थ्रू रिलीजियस टूरिज्म’ नामक प्रोजेक्ट दिया है. इसके तहत धर्म स्थलों पर बढ़ रहे पर्यटकों की संख्या और प्रबंधन पर शोध किया जाएगा.
बीएचयू कला संकाय की डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत धार्मिक पर्यटन से जुड़ी जानकारियों को लेकर युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा. काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय में सेंटर फॉर टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट नाम से नया सेंटर खोला जा रहा है. जहां शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे. बीएचयू की ओर से छोटे और बड़े धार्मिक स्थलों पर पर्यटन शोध किया जाएगा.

कला संकाय की डीन प्रो. सुषमा ने बताया कि बीएचयू के कला संकाय में सेंटर फॉर टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में नया सेंटर पहली बार खोला जा रहा है. इसमें स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी के अलावा सर्टिफिकेट कोर्स भी चलाए जाएंगे. हमने कई देशों के साथ एमओयू साइन किए हैं. यह प्रोजेक्ट विभिन्न देशों के साथ विद्यार्थियों के सहयोग, शिक्षकों के सहयोग और हमारे शिक्षण के जितने आयाम हो सकते हैं, उनके सहयोग पर आधारित होंगे.
शिक्षण प्रणाली में आएगा बदलाव: उन्होंने बताया कि इसमें विदेशी विश्वविद्यालयों खासकर स्पेन, अल्बेनिया, साउथ अफ्रीका जैसे देश हैं, जिनके साथ हम सहयोग करेंगे. यह कला संकाय की शिक्षण प्रणाली में बड़ा बदलाव लेकर आएगा. इससे बच्चों को रोजगार मिलेगा.

हाल ही में हुए एक्सपो में हमारे बच्चों ने प्रतिभाग किया था और हमारे जितने भी विभागीय शिक्षक हैं, उनका भी योगदान रहा. उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट से हमारे लिए और हमारे बच्चों के साथ-साथ इस विश्वविद्यालय के लिए भी काफी आयाम खुलेंगे.
युवाओं के बीच धार्मिक पर्यटन का नया ट्रेंड: टूरिज्म विभाग के डॉ. प्रवीण राणा ने बताया कि भारत में जो सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है, वह सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन ही है. यह सदियों से चलता आ रहा है. हम देख रहे हैं, कि युवाओं के बीच रिलीजियस टूरिज्म को लेकर नया ट्रेंड दिख रहा है.

ऐसी जगहों पर हजारों-करोड़ों की संख्या में लोग जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी विजन है, कि साल 2047 में हम कैसे अपने धार्मिक क्षेत्रों को विकसित करें. हम लोगों ने अपने रिसर्च में पाया है कि जो महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र हैं, वहीं अधिक लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. भीड़ इतनी हो जा रही है कि क्राउड मैनेजमेंट मुश्किल होता जा रहा है.
छोटे धार्मिक केंद्र होंगे विकसित: उन्होंने कहा कि काशी, प्रयागराज, अयोध्या, मथुरा और वृंदावन के अलावा अगर किसी धार्मिक स्थल का नाम खोजेंगे तो मुश्किल होगी. पूरा पर्यटन इन्हीं जगहों पर केंद्रित है. हम लोगों का यह प्रोजेक्ट छोटे-छोटे धार्मिक केंद्रों को भी खोजेगा और उन्हें विकसित किया जाएगा.

इससे हम भीड़ को उन धार्मिक जगहों पर डायवर्ट कर पाएंगे. हम चाहते हैं कि वहां की स्थानीय जनता भी इससे जुड़े और आर्थिक लाभ उठाए. हमने कई स्तर पर कोर्सेज चलाने की कोशिश की है. इसमें सर्टिफिकेट कोर्स, यूजी-पीजी और डिप्लोमा कोर्सेज होंगे.

सर्वधर्म की बात करेगा यह प्रोजेक्ट: उन्होंने बताया कि ‘सेक्रेड ट्रेवेल्स फॉर ग्रोथ: हायर एजुकेशन एंड सस्टनेबल ग्रोथ थ्रू रिलीजियस टूरिज्म’ प्रोजेक्ट की खास बात यह होगी कि इसमें किसी एक धर्म विशेष पर फोकस नहीं किया जाएगा. यह सर्वधर्म की बात करेगा.
पूरे प्रोजेक्ट में जो 16 पार्टनर्स हैं, वह हर धर्म के हैं. हम विश्व शांति की बात करते हैं, तो वह तभी हो सकता है, जब हर धर्म की हम बात करें. यह कोर्स इंटरनेशनल करिकुलम को देखते हुए एक-दूसरे की संस्कृति को देखते हुए विकसित किया जाएगा. इस पर शिक्षा मंत्रालय भी काम कर रहा है.

