महासमुंद जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही, अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त, आग लगी तो बुझेगी कैसे
महासमुंद जिला अस्पताल में प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है. अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त होने के बाद भी रिफिलिंग नहीं की गई है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 13, 2026 at 1:25 PM IST
महासमुंद : महासमुंद जिले के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में आग लगने पर सुरक्षा के लिए छोटे-छोटे अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं.लेकिन इन अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त हो चुकी है.यदि अस्पताल परिसर में कहीं भी आग लगी तो इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.फिर भी अस्पताल की दीवारों में अग्निशमन यंत्र शो पीस की तरह लटककर शोभा बढ़ा रहे हैं.
अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त
आपको बता दें कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय 380 बिस्तर वाला अस्पताल है. अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 450 से 500 मरीज ओपीडी में इलाज करने के लिए आते हैं. अस्पताल प्रबंधन आग लगने पर बचाव के लिए सेंट्रलाइज सिस्टम तो लगा रखा है,लेकिन छोटी आग लगने पर तत्काल बुझाने के लिए पूरे अस्पताल में छोटे-छोटे 90 अग्निशमन यंत्र हैं, जिनकी वैधता खत्म हो चुकी है.
रायपुर की संस्था के पास है रिफिलिंग का काम
अग्निशमन यंत्रों की रिफिलिंग का काम पीआर इंटरप्राइजेज रायपुर को मिला है. इस संस्था ने अग्निशमन यंत्र की रिफिलिंग 16 जनवरी 2025 और 29 जनवरी 2025 को थी. जिसकी वैधता तिथि 15 जनवरी 2026 और 28 जनवरी 2026 है. वैधता तिथि समाप्त होने के लगभग एक माह बाद भी इन अग्निशमन यंत्रों की रिफिलिंग नहीं की गई. जो कहीं ना कहीं अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को दर्शा रहा है. वहीं लापरवाही सामने आने के बाद अस्पताल अधीक्षक ने जल्द ही रिफिलिंग की बात कही है.

हमारे अस्पताल में पूरा ऑटोमेटिक फायर प्रूफ सिस्टम लगा हुआ है. छोटी आगजनी की घटनाओं के लिए अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं.आप से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी वैधता खत्म हो चुकी है.रिफिलिंग के लिए अस्पताल से ऑर्डर जा चुका है.कभी कोई समस्या के कारण देरी होती है, अक्सर वैधता खत्म होने से पहले ही रिफिलिंग कंपनी कर देती है- बसंत माहेश्वरी,अधीक्षक,जिला अस्पताल

आपको बता दें कि अगर कहीं आग लग जाती है तो इन्हीं छोटे अग्निशमन यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है.इसके बाद कहीं सेंट्रलाइज सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. नियम अनुसार जिम्मेदार संस्था को समय अनुसार रिफिलिंग करना अनिवार्य होता है.लेकिन बड़े सरकारी अस्पताल में ऐसा ना होना कहीं ना कहीं प्रबंधन की उदासीनता को दिखा रहा है.
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