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उत्तरकाशी के किसानों की बदली किस्मत, लाल चावत की मार्केट में बढ़ी डिमांड, जानिये वजह

सरस मेले में लाल चावल डेढ़ सौ से ₹200 किलो बिक रहे हैं. इसकी डिमांड भी बहुत बढ़ रही है.

UTTARKASHI RED RICE
पुरोला के लाल चावल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 22, 2026 at 3:03 PM IST

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रुद्रपुर: उत्तरकाशी में उगाए जाने वाले लाल चावल की मांग अब उत्तराखंड के अलग अलग हिस्सों से होते हुए उत्तर प्रदेश भी पहुंच गई है. बेहतर गुणवत्ता, पोषण से भरपूर गुण और जैविक तरीके से खेती के कारण यह चावल बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. किसान और स्वयं सहायता समूह इस बढ़ती मांग से उत्साहित हैं.

उधम सिंह नगर में रुद्रपुर गांधी पार्क में चल रहे सरस कार्निवल मेले में लाल चावल की भारी डिमांड हो रही है. जिससे खरीदने के लिए भारी संख्या में शुगर के पेशेंट पहुंच रहे हैं. यहां बिक रहे लाल चावल की कीमत डेढ़ सौ से ₹200 रखी गई है.पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से उगाया जाने वाला लाल चावल अब देश के अन्य राज्यों में भी अपनी पहचान बना रहा है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के बाजारों से इसकी विशेष मांग सामने आई है. पोषक तत्वों से भरपूर और प्राकृतिक रूप से तैयार यह लाल चावल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनता जा रहा है.

पुरोला के लाल चावल (ETV Bharat)

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लाल चावल में आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही कारण है कि डॉक्टर भी इसे सामान्य सफेद चावल की तुलना में अधिक लाभकारी मानते हैं. किसान बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के जैविक पद्धति से इसकी खेती कर रहे हैं. जिससे इसकी गुणवत्ता और स्वाद दोनों बेहतर बने रहते हैं.

बढ़ती मांग को देखते हुए स्थानीय स्वयं सहायता समूह और किसान संगठित होकर इसकी पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दे रहे हैं. उत्तर प्रदेश के कई व्यापारियों ने सीधे किसानों से संपर्क कर बड़ी मात्रा में लाल चावल की खरीद शुरू की है. इससे किसानों को उचित दाम मिल रहा है. बिचौलियों की भूमिका भी कम हुई है.

रंजना सिंह ने बताया लाल चावल उत्तरकाशी के प्रमुख उत्पादों में से एक है. इसे कुर्ला नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने बताया यह चावल शुगर पेशेंट के लिए बहुत ही लाभदायक होता है. उन्होंने कहा अब बाहरी राज्यों से इसके ऑर्डर मिलने लगे हैं. इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वे खेती के प्रति अधिक उत्साहित है.

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