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ग्रीन सेस से सरकार कमा रही रोजाना 20 लाख, फास्टैग में पैसा न होने पर भेजा जाएगा नोटिस

15 फरवरी से प्रदेश के सभी 15 बॉर्डर से ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की गई.

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ग्रीन सेस से उत्तराखंड की हो रही बंपर कमाई (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 24, 2026 at 1:25 PM IST

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देहरादून: उत्तराखंड में अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस के जरिए रोजाना करीब 20 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हो रहा है. परिवहन विभाग ने 17 जनवरी से हरिद्वार जिले में नारसन बॉर्डर से ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की थी. इसके बाद 15 फरवरी से प्रदेश के सभी 15 बॉर्डर से ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की गई. सभी चेक पोस्ट से ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अभी तक परिवहन विभाग को ढ़ाई करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है. विभाग ने एक साल में करीब 100 करोड़ रुपए का राजस्व एकत्र करने का लक्ष्य रखा है.

उत्तराखंड राज्य में हर साल करीब 6 करोड़ से अधिक पर्यटक प्रदेश में आते है. इस दौरान लाखों की संख्या में वाहनों की आवाजाही भी होती है. यही वजह है कि परिवहन विभाग को उम्मीद है कि एक साल के भीतर आसानी से ग्रीन सेस के रूप में 100 करोड़ रुपए की वसूली हो जाएगी. हालांकि, विभाग ने ग्रीन सेस से कुछ श्रेणियों के वाहनों को बाहर रखा है, जिसमें सरकारी वाहन, अग्निशमन सेवा के वाहन और एंबुलेंस के साथ ही दोपहिया और तिपहिया वाहनों से कोई ग्रीन सेस नहीं लिया जाएगा.

ग्रीन सेस से सरकार कमा रही रोजाना 20 लाख (ETV Bharat)

सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन ग्रीन सेस के दायरे से बाहर: इसके अलावा सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को भी ग्रीन सेस के दायरे से बाहर रखा गया है. परिवहन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों में लगे फास्टैग वॉलेट में कई बार पैसे न होने के चलते ग्रीन सेस का कलेक्शन नहीं हो पा रहा है. इसीलिए ऐसे वाहन चालकों को नोटिस भेजा जाएगा.

ग्रीन सेस भरने के लिए नोटिस भेजा जाएगा: दरअसल, वाहन स्वामियों की ओर से फास्टैग वॉलेट में पैसा न रखने की एक मुख्य वजह ये भी है कि भारत सरकार ने एनएचएआई की फास्टैग वार्षिक पास योजना चल रही है, जिसके तहत अधिक ट्रैवल करने वाले वाहन स्वामी एक बार में ₹3000 का भुगतान करके 200 टोल प्लाजा क्रॉसिंग या फिर एक साल तक टोल-मुक्त यात्रा का लाभ उठा रहे है, जिसके चलते अब परिवहन विभाग ने निर्णय लिए है कि जिन वाहनों के फास्टैग वॉलेट में पैसे नहीं होंगे उन वाहन स्वामियों को ग्रीन सेस भरने के लिए नोटिस भेजा जाएगा.

शुरुआत नारसन बॉर्डर से हुई थी: वही, ज्यादा जानकारी देते हुए उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड में ग्रीन सेस वसूलने की प्रक्रिया जारी है. अन्य राज्यों से उत्तराखंड में आने वाली वाहनों से एक टोकन मनी के रूप में ग्रीन सेस लिया जा रहा है. पहले चरण में हरिद्वार के नारसन बॉर्डर से इसकी शुरुआत की गई थी, लेकिन वर्तमान समय में प्रदेश के 15 बॉर्डर्स क्षेत्रों में लगे एएनपीआर कैमरे के जरिए ग्रीन सेस लिया जा रहा है.

उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी के मुताबिक शुरुआती दौर में ये प्रक्रिया शुरू होने के बाद कुछ तकनीकी खामियां भी देखने को मिली थी, लेकिन समय के साथ उन खामियों को ठीक कर लिया गया है. लिहाजा वर्तमान समय में ग्रीन सेस लेने की प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है.

रोजाना करीब 20 लाख रुपए तक का राजस्व प्राप्त: साथ ही बताया कि परिवहन विभाग को रोजाना करीब 20 लाख रुपए तक का राजस्व प्राप्त हो रहा है, जिसका इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण, ट्रैफिक प्रबंधन, फॉरेस्टेशन और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट करने में किया जाएगा. कुल मिलाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए ही इस धनराशि का इस्तेमाल किया जाएगा.

उप परिवहन आयुक्त शैलेश ने कहा कि परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि सालाना 100 करोड़ रुपए का राजस्व ग्रीनसेस के जरिए एकत्र किया जाए. चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में अन्य राज्यों से वाहन उत्तराखंड आते हैं. इस दौरान ग्रीनसेस का कलेक्शन बढ़ जाएगा.

उप परिवहन आयुक्त शैलेश ने बताया कि कई बार लीन पीरियड भी होता है, जब अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों की संख्या में कमी हो जाती है. बावजूद इसके सालाना 100 करोड़ रुपए का राजस्व ग्रीन सेस के जरिए प्राप्त हो जाएगा. इसके साथ ही बताया कि फास्टैग वॉलेट में पैसा न होने पर कैसे ग्रीन सेस वसूला जाएगा, इस तरह के प्रश्न भी उठ रहे हैं. इसको देखते हुए भी परिवहन विभाग ने प्रक्रिया बनाई है, जिसके तहत अन्य राज्यों से उत्तराखंड आने वाले जिन वाहनों के फास्टैग वॉलेट में पैसा नहीं होता है, उनको नटिस भेजा जाएगा. जिसके बाद उन वाहन स्वामियों को ग्रीनसेस का पैसा जमा करना होगा.

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