सैन्य धाम पर संग्राम! गामा के वीडियो से गरमाई सियासत, क्या बीजेपी की बढ़ेंगी मुश्किलें?
सैन्य धाम को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने भाजपा के भीतर भी सियासी हलचल बढ़ा दी हैं.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 22, 2026 at 7:41 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड का सैन्य धाम एक बार फिर से चर्चाओं में हैं. इस बार चर्चाओं का कारण सैन्य धाम के उद्घाटन की तारीख नहीं बल्कि बीजेपी नेता का दौरा है, जिस पर कथित तौर पर ब्रेक लगा दिया गया. सत्ताधारी भाजपा के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा ने सैन्य धाम का दौरा कर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुनील उनियाल गामा का वीडियो वायरल होने के बाद सैनिक कल्याण मंत्री और मसूरी विधायक गणेश जोशी ने भी उन पर तंज कसा है. ऐसे में शहीदों के सम्मान में बनने वाला सैन्य धाम अब निर्माण से ज्यादा सियासी बयानबाजी को लेकर चर्चाओं में है.
क्यों खास है सैन्य धाम: राजधानी देहरादून के पुरकुल स्थित गुनियाल गांव में बन रहा सैन्य धाम शुरुआत से ही चर्चाओं में रहा है. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड में सैन्य धाम बनाए जाने की घोषणा की थी. जिसके बाद 15 दिसंबर 2021 को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका शिलान्यास किया. इस परियोजना को उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और शहीद सैनिकों के बलिदान को सम्मान देने वाले प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. सैन्य धाम के लिए प्रदेश के 1734 शहीद सैनिकों के घर-आंगन की मिट्टी लाई गई. राज्य की प्रमुख 28 नदियों का जल भी यहां पहुंचाया गया है. इसका उद्देश्य सैन्य धाम आने वाली पीढ़ियों को उत्तराखंड के सैनिकों की वीरता, बलिदान और देशभक्ति से जोड़ना था. सरकार इसे राज्य के पांचवें धाम के रूप में स्थापित करने की तैयारी भी कर रही है.

सैन्यधाम को लेकर उठ रहे सवाल: सैन्य धाम को लेकर सबसे ज्यादा सियासत इसकी लागत और निर्माण में हो रही देरी को लेकर हुई है. शुरुआत में परियोजना की लागत करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन समय के साथ इसका बजट बढ़ता गया. अब इसकी अनुमानित लागत करीब 112 करोड़ रुपये बताई जा रही है. 15 दिसंबर 2021 को शुरू हुआ. निर्माण कार्य वर्ष 2026 में भी पूरी तरह पूरा नहीं हो पाया है. निर्माण की डेडलाइन भी दो बार बदली जा चुकी है. अब सैन्य धाम का निर्माण लगभग अंतिम चरण में बताया जा रहा है, लेकिन इसके उद्घाटन की तारीख अभी तक तय नहीं हुई है. यही सवाल अब सबसे ज्यादा चर्चा में है कि आखिर सैन्य धाम कब पूरी तरह तैयार होगा? इसका उद्घाटन कब किया जाएगा? सरकार की ओर से अभी तक उद्घाटन की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है.

बीजेपी नेता के वीडियो ने बढ़ाई हलचल: इन्हीं सवालों के बीच सैन्य धाम को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने भाजपा के भीतर भी सियासी हलचल बढ़ा दी है. भाजपा के वरिष्ठ नेता और देहरादून के पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा सैन्य धाम पहुंचे. वे वहां निर्माण कार्य तथा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाते नजर आए. वीडियो सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गईं. खास बात यह रही कि सैन्य धाम को लेकर सवाल विपक्षी कांग्रेस की ओर से ही नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़े नेता की ओर से उठाए गए.
बीजेपी नेता सुनील उनियाल गामा का यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं. सुनील उनियाल गामा खुद मसूरी विधानसभा सीट से चुनावी दावेदारी को लेकर चर्चाओं में हैं. ऐसे में उनके सवालों को भाजपा के भीतर की राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है.

वीडियो वायरल होने के बाद सुनील उनियाल गामा ने अपना पक्ष भी रखा. सुनील उनियाल गामा ने कहा-
वह पार्टी के खिलाफ नहीं जाना चाहते, लेकिन सैन्य धाम जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जनता और सैनिकों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए. उनका इशारा साफ है कि सैन्य धाम से जुड़े सवालों को दबाने के बजाय उनका जवाब दिया जाना चाहिए.
-सुनील उनियाल गामा, बीजेपी नेता

सुनील उनियाल गामा के सवालों पर सैन्य धाम बनाने वाले विभाग के जिम्मेदार मंत्री और मसूरी विधानसभा से विधायक गणेश जोशी ने भी प्रतिक्रिया दी है. गणेश जोशी ने गामा पर सीधे तौर पर तंज कसा.
वह प्रदेश के बड़े मंत्री रहे हैं. उनका मेयर का कार्यकाल भी खत्म हो चुका है. अब वह खाली घूम रहे हैं. मंत्री के इस बयान को गामा के वायरल वीडियो पर भाजपा की ओर से आए सबसे तीखे राजनीतिक जवाब के तौर पर देखा जा रहा है.
-गणेश जोशी, कैबिनेट मंत्री
यानी सैन्य धाम को लेकर उठे सवालों का जवाब देने के बजाय अब भाजपा के भीतर ही एक-दूसरे पर राजनीतिक तंज कसने का दौर शुरू हो गया है. गणेश जोशी के बयान ने इस विवाद को और ज्यादा राजनीतिक बना दिया है.

भाजपा की ओर से इस पूरे मामले पर पार्टी प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने भी सफाई दी है-
सैन्य धाम शहीद सैनिकों के सम्मान से जुड़ा विषय है. विपक्ष जानबूझकर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है. सरकार ने सैन्य धाम को भव्य स्वरूप देने के लिए काम किया है. अब निर्माण लगभग पूरा हो चुका है. भाजपा नेताओं का कहना है कि शहीदों के नाम पर बनने वाले इस धाम को लेकर राजनीति करना उचित नहीं है. विपक्ष को सरकार के काम को देखने के बजाय सिर्फ आरोप लगाने की राजनीति नहीं करनी चाहिए.
-मथुरा दत्त जोशी, प्रवक्ता, बीजेपी
दूसरी तरफ कांग्रेस ने सैन्य धाम को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने इसे लेकर हल्ला बोला है.
सैन्य धाम के निर्माण में कई तरह की गड़बड़ियां हुई हैं. सरकार इन सवालों को सामने नहीं आने देना चाहती. शुरुआती बजट से परियोजना की लागत बढ़कर 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, निर्माण में देरी हुई और डेडलाइन तक बदली गई, ऐसे में सरकार को पूरी स्थिति जनता के सामने स्पष्ट करनी चाहिए. शहीदों के सम्मान के नाम पर बनी इस परियोजना में अगर सब कुछ पारदर्शी है तो सरकार को लागत, देरी और निर्माण से जुड़े सभी सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से देना चाहिए.
-प्रतिमा सिंह, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता
सैन्य धाम उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के सम्मान और उनकी वीरता की याद को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण परियोजना है. करीब 50 करोड़ रुपये की शुरुआती लागत से शुरू हुई यह परियोजना अब करीब 112 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत तक पहुंच चुकी है. निर्माण कार्य शुरू होने के करीब पांच साल बाद भी इसके उद्घाटन की तारीख तय नहीं हो पाई है. विपक्ष के आरोपों के बीच अब भाजपा के भीतर से भी सवाल उठने लगे हैं. सवाल करने वाले नेता पर सैनिक कल्याण मंत्री का तंज इस सियासी विवाद को और हवा दे रहा है. ऐसे में सैन्य धाम कब बनकर पूरी तरह तैयार होगा? इसका उद्घाटन कब होगा? सरकार लागत व देरी से जुड़े सवालों का कितना स्पष्ट जवाब देगी? इन सवालों के साथ अब यह परियोजना आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सियासत का बड़ा मुद्दा बनती नजर आ रही है.
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