उत्तराखंड में आवारा कुत्तों को लेकर लगी प्रोफेसरों की ड्यूटी, जानिए क्या पूरा मामला
उत्तराखंड में शिक्षण संस्थानों के आस पास लावारिस कुत्तों की गिनती के लिए लगी अधिकारियों और कर्मचारियों के ड्यूटी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक्शन.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : December 31, 2025 at 9:39 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय परिसर या आसपास के क्षेत्र में आवारा कुत्तों को लेकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है. जिसके तहत विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के आसपास घूमने वाले कुत्तों की गिनती की जा रही है. साथ ही इससे संबंधित उपायों की जानकारी महाविद्यालय के प्रोफेसर जुटा रहे हैं. खास बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा से जुड़े इन संस्थानों में वृहद रूप से इस काम को किया गया है.
उत्तराखंड में शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर रुख अपनाए हुए हैं. इसी कड़ी में संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं. यह आदेश सुप्रीम कोर्ट में स्वतः संज्ञानित रिट पिटीशन में पारित निर्देशों के अनुपालन के संबंध में दिया गया है.

संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा की ओर से पत्र में राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों, अशासकीय अनुदानित एवं निजी महाविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने संस्थानों के आस पास आवारा कुत्तों की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध कराएं.
कुत्तों को हटाने के लिए अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई? पत्र में ये स्पष्ट किया गया है कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी. निर्देशों के अनुसार संस्थानों को ये बताना होगा कि उनके परिसर एवं आसपास कितने आवारा कुत्ते विचरण कर रहे हैं, इसके साथ ही कुत्तों को पुनर्वासित करने या हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है या की जा रही है. ये भी सुनिश्चित करना होगा कि इस संबंध में संबंधित नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत को सूचना दी गई है या नहीं.
क्या विवि और महाविद्यालय परिसर में है चारदीवारी या तारबाड़ की व्यवस्था? इसके अलावा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से ये भी जानकारी मांगी गई है कि क्या उनके परिसरों में छात्रों की सुरक्षा के लिए चारदीवारी या तारबाड़ की व्यवस्था है? जहां यह व्यवस्था नहीं है, वहां सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या वैकल्पिक कदम उठाए गए हैं? इसकी विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है.
पत्र में ये भी स्पष्ट किया गया है कि किन संस्थानों में चारदीवारी या तारबाड़ उपलब्ध है और किनमें नहीं? इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाए. संयुक्त निदेशक ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित संस्थान यह सूचना निर्धारित प्रारूप में गूगल फॉर्म के माध्यम से भेजेंगे.
क्यों लिया गया ये फैसला? फिलहाल, उच्च शिक्षा विभाग का यह कदम छात्रों की सुरक्षा को लेकर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. देश के कई हिस्सों से आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें बच्चों और छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उत्तराखंड सरकार और उच्च शिक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं.
"आवारा कुत्तों की गिनती और इसको लेकर सुरक्षात्मक कार्यों की जानकारी लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से निर्देश जारी किए गए हैं. इसी कड़ी में उच्च शिक्षा की तरफ से यह निर्देश जारी हुए हैं."
- एडी उनियाल, संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा -
कुछ जगहों पर नहीं मिली जानकारी: उधर, 24 दिसंबर तक का समय जानकारी जुटाते हुए नगर पालिका, नगर निगम और नगर पंचायत को देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कुछ जगहों पर अब तक जानकारी नहीं पहुंची है. ऐसा भी कहा जा रहा है. देहरादून नगर निगम की नगर आयुक्त ने भी अब तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिलने की बात कही है.
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