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उत्तराखंड में आफत'वाला' मानसून! 53 दिनों में 1944 सड़कें बाधित, 211 करोड़ का नुकसान

उत्तराखंड में इस बार मानसून सीजन में जमकर बारिश हुई है. जिसके कारण सड़कों को काफी नुकसान हुआ है.

MONSOON DAMAGE IN UTTARAKHAND
उत्तराखंड में आफत'वाला' मानसून! (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 12, 2026 at 5:28 PM IST

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Updated : August 12, 2026 at 5:42 PM IST

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देहरादून: उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी- बारिश के चलते प्रदेश के कुछ हिस्सों में आपदा जैसी स्थिति बनी हुई है. यही नहीं, लगातार बारिश और भूस्खलन की वजह से बड़ी संख्या में सड़क मार्ग भी बाधित हो रहे हैं. वर्तमान स्थिति यह है कि अभी भी 100 से अधिक सड़के बाधित हैं. इस मानसून सीजन के दौरान यानी 21 जून से 12 अगस्त 2026 तक 211.10 करोड़ रुपए का नुकसान सड़कों की वजह से हो चुका है. अभी भी मानसून सीजन में लगभग एक महीने से अधिक का वक्त बचा हुआ है. आखिर क्या है प्रदेश में सड़कों की स्थिति? सड़कों को रिपेयर करने के साथ ही उसकी पूर्व की स्थिति में लाने के लिए कितना धनराशि करना होगा खर्च?

उत्तराखंड में हर साल मानसून सीजन के दौरान बड़े पैमाने पर सड़के बाधित होती हैं. साथ ही भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से सड़कों को काफी नुकसान भी पहुंचता है. जिस वजह से विभाग को हर साल मानसून सीजन के दौरान करोड़ों रुपए का नुकसान होता है. पिछले साल मानसून सीजन के दौरान यानी 21 जून से 30 सितंबर 2025 के बीच प्रदेश के सभी जिलों में 1997 सड़कें बाधित हुई थी.

उत्तराखंड में आफत'वाला' मानसून! (ETV Bharat)

जिसमें से स्टेट हाईवे की 135 सड़कें, विलेज मार्ग की 1575 सड़कें, मुख्य जिला मार्ग की 112 सड़कें, राष्ट्रीय राजमार्ग की 30 सड़कें, अन्य जिला मार्ग की 114 सड़कें, गावों को जोड़ने वाली 17 सड़कों के साथ ही अन्य 14 सड़क मार्ग शामिल हैं. मानसून के दौरान सड़कों को सुचारु करने के लिए 91.83 करोड़ रुपए खर्च हुए. जबकि सड़कों को पूर्व की स्थिति में लाने में 313.43 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया गया था.

ऐसी ही कुछ स्थिति उत्तराखंड में वर्तमान मानसून सीजन के दौरान भी देखने को मिल रही है. लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 21 जून से 12 अगस्त 2026 की दोपहर तक 1944 सड़के बाधित हुई हैं. जिसमें से 102 सड़क मार्ग अभी भी बाधित हैं. 21 सड़कों को सामान्य आवाजाही और 1821 सड़कों को पूरी तरह से खोला जा चुका है.

बाधित सड़कों में स्टेट हाईवे की 144 सड़कें, विलेज मार्ग की 1629 सड़कें, मुख्य जिला मार्ग की 86 सड़कें, राष्ट्रीय राजमार्ग की 18 सड़कें, अन्य जिला मार्ग की 70 सड़कें, गावों को जोड़ने वाली 15 सड़कों के साथ ही अन्य 12 सड़क मार्ग शामिल हैं. प्रदेश के सभी जिलों में इस दौरान बाधित 1944 सड़कों पर यातायात शुरू करने के लिए 19 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. सड़कों को पूर्व की स्थिति में लाने के लिए अनुमानित 211.10 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान है.

मानसून सीजन के दौरान अभी तक सबसे अधिक पौड़ी जिले की 375 सड़कें प्रभावित हुई हैं. सबसे कम उधमसिंह नगर जिले की सिर्फ एक सड़क मार्ग बाधित हुआ है. लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पौड़ी जिले में 375 सड़कें, टिहरी जिले में 261 सड़कें, चमोली जिले में 186 सड़कें, पिथौरागढ़ जिले में 182 सड़कें, अल्मोड़ा जिले में 181 सड़के, देहरादून जिले में 173 सड़कें, उत्तरकाशी जिले में 164 सड़कें, नैनीताल जिले में 138 सड़कें, रुद्रप्रयाग जिले में 101 सड़कें, बागेश्वर जिले में 100 सड़कें, चंपावत जिले में 61 सड़कें, हरिद्वार जिले में 17 सड़कें और उधम सिंह नगर जिले में एक सड़क के साथ ही 4 अन्य सड़कें बाधित हुई हैं.

लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ पंकज कुमार पांडेय ने कहा प्रदेश में मानसून लगातार सक्रिय है. जिसके चलते सड़क मार्ग कही कही पर बंद हो रही है. उन्होंने कहा विभाग का प्रयास यही है कि कोई भी सड़क 24 घंटे से ज्यादा समय के लिए बंद न रहे. इसके लिए महत्वपूर्ण सड़कों पर मशीनें तैनात हैं।. कई बार ऐसा होता है कि एक ही सड़क में कुछ कुछ दूरी पर सड़कों को नुकसान पहुंचता है. जिस सड़क को सुचारु करने में समय लगता है.

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Last Updated : August 12, 2026 at 5:42 PM IST