विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त कर्मचारियों का मामला, हाईकोर्ट ने सुना पक्ष, जानिये क्या कहा
बर्खास्त कर्मचारियों की ओर सर्वोच्च न्यायलय के वरिष्ठ अधिवक्ता देव दत्त कामत और रविन्द्र बिष्ठ ने पैरवी की.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : May 29, 2026 at 6:58 PM IST
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त कर्मचारियों के मामले पर सुनवाई की. आज न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने हटाए गए कर्मचारियों का पक्ष सुनने के बाद विधानसभा सचिवालय का भी पक्ष सुना.
विधानसभा सचिवालय की ओर से कहा गया कि जितनी भी अवैध नियुक्तियां की गई थी विधानसभा ने उन्हें नियमों के तहत हटाया गया है. विधानसभा सचिवालय ने कहा ये नियुक्तियां बिना नियमावली के ध्यान में रखते हुए की गई थी. जिसपर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 2 जुलाई की तिथि नियत की है. आज बर्खास्त कर्मचारियों की ओर सर्वोच्च न्यायलय के वरिष्ठ अधिवक्ता देव दत्त कामत और रविन्द्र बिष्ठ ने पैरवी की.
मामले के अनुसार अपनी बर्खास्तगी के आदेश को बबिता भंडारी, भूपेंद्र सिंह बिष्ठ , कुलदीप सिंह व 102 अन्य ने एकलपीठ ने चुनोती दी है. याचिकाओं में कहा गया है कि विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा लोकहित को देखते हुए उनकी सेवाएं 27, 28 ,व 29 सितम्बर 2022 को समाप्त कर दी गई हैं.
बर्खास्तगी आदेश मे उन्हें किस आधार पर किस कारण की वजह से हटाया गया कहीं इसका उल्लेख नहीं किया गया न ही उन्हें सुना गया है. उनके द्वारा सचिवालय में नियमित कर्मचारियों की भांति कार्य किया है. एक साथ इतने कर्मचारियों को बर्खास्त करना लोकहित नहीं है. यह आदेश विधि विरुद्ध है.
विधान सभा सचिवालय में 396 पदों पर बैक डोर नियुक्तियां 2001 से 2015 के बीच में भी हुई हैं. जिनको नियमित किया जा चुका है. याचिकाओ में कहा गया है कि 2014 तक हुई तदर्थ नियुक्त कर्मचारियों को चार वर्ष से कम की सेवा में नियमित नियुक्ति दे दी गई, मगर उन्हें 6 वर्ष के बाद भी नियमित नहीं किया गया. अब उन्हें हटा दिया गया है. पूर्व में उनकी नियुक्ति को 2018 में जनहित याचिका दायर कर चुनौती दी गयी थी. जिसमे कोर्ट ने उनके हित में आदेश देकर माना था कि उनकी नियुक्ति वैध है. नियमानुसार छः माह की नियमित सेवा करने के बाद उन्हें नियमित किया जाना था.
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