उपनल कर्मचारियों के हक में सख्त हुआ HC, सचिव को कोर्ट में पेश होने का आदेश, सरकार पर भी की टिप्पणी
उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण समेत अन्य मामलों को लटकाने पर नैनीताल हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है. साथ ही सरकार पर भी टिप्पणी की थी.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 9, 2026 at 4:21 PM IST
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में सालों से लगे उपनल (उत्तराखण्ड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) संविदा कर्मचारियों को आदेश होने के बाद भी सरकार द्वारा नियमित नहीं, चयनित वेतनमान नहीं दिये जाने और वेतन से जीएसटी काटे जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की. आज 9 जुलाई को हुए सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने पर सम्बन्धित सचिव को कोर्ट ने आने वाले बुधवार को पेश होने को कहा है.
मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने बुधवार15 जुलाई की तिथि नियत की है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि इनके नियमतिकरण के लिए सरकार को नियमावली में संशोधन करना पड़ेगा, इसलिए उन्हें समय दिया जाय. जिसपर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पूर्व के आदेशों पर आज तक सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया, जो अपने आप में अवमानना है. हर समय कोर्ट से समय दिए जाने की मांग की जाती है. संघ की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उन्हें समान कार्य-समान वेतन दिये जाने के लिए उनसे बांड भरने का दवाब डाला जा रहा है, जो गलत है.
मामले के अनुसार उपनल संविदा कर्मचारियों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में करीब एक साल पहले अवमानना याचिका दाखिल की थी, तभी से सरकार बार-बार कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग रही है, जिसको लेकर प्रदेश भर के उपनल कर्मियों में आक्रोश है.
मामले के अनुसार उपनल कर्मचारी संघ द्वारा उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की गई थी. याचिका में कोर्ट को बताया गया कि 2018 में हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में नियमितीकरण का आदेश दिया था, जिसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को 2024 में झटका और संविदा कर्मचारियों के हक में फैसला दिया था. जब हाईकोर्ट में इस पूरे मामले में अवमानना याचिका दाखिल हुई तो सरकार पिछले एक साल से इसको लटकाती रही है. न सरकार कोर्ट के आदेश का अनुपालन कर रही है और न ही उन्हें नियमित करने के लिए कोई कदम उठा रही है. आदेश का अनुपालन न होने की वजह से 22 हजार उपनलकर्मचारी अधर में लटके पड़े है.
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