उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को किया बरी, पॉक्सो का एक मामला भी किया निरस्त
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिथौरागढ़ और देहरादून से दो अलग-अलग मामलों पर सुनवाई की थी. दोनों ही मामलों में कोर्ट ने दोषियों को बरी कर दिया.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : May 4, 2026 at 8:49 PM IST
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जिला सत्र न्यायधीश पिथौरागढ़ से हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ती रविंद्र मैथाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने अभियुक्त नीरज कुमार के खिलाफ सजा को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त सबूत रिकार्ड मे उपलब्ध न होने के कारण उसकी सजा को निरस्त कर दिया है.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश मे कहा कि यदि उसके खिलाफ कोई अन्य केस लंबित नहीं है तो उसे तीन सप्ताह के भीतर रिहा करें. मामले के अनुसार जिला सत्र न्यायाधीश पिथौरागढ़ ने अभियुक्त नीरज कुमार निवासी ग्राम मच्छीखेत तहसील थल जिला पिथौरागढ़ को हत्या करने के जुर्म में 9 अगस्त 2023 को आजीवन कारावास की सजा और पचास हजार रुपये के दंड से दण्डित किया था.
इस आदेश के खिलाफ अभियुक्त ने जेल से अपनी रिहाई के लिए अपील दायर की गई. हाईकोर्ट ने उसकी तरफ से पैरवी करने के लिए अधिवक्ता डीसीएस रावत को न्यायमित्र नियुक्त किया गया था. घटना के मुताबिक मृतक पुष्कर के चाचा गंगा सिंह ने थल थाने में 19 सितम्बर 2020 को मुकदमा दर्ज कराया था.
अपनी तहरीर में गंगा सिंह ने कहा था कि वह रात को साढ़े नौ बजे टीवी पर समाचार देख रहे थे. तभी उनको गोली चलने की आवाज सुनवाई दी. इतने में बहु सरस्वती देवी चिल्लाई. बाहर जाकर देखा तो पुष्कर नीचे जमीन पर गिरा पड़ा था. उसकी पीठ में गोली के निशान और खून बह रहा था. शोर मचाने पर गांव के लोगों की भीड़ जमा हो गयी. ढूंढने पर अभियुक्त के हाथ मे बंदूक थी. आरोपी पुष्कर से रंजिश रखता था. उसी का उसने बदला लिया. सुनवाई के दौरान अभियुक्त की तरफ से कहा गया कि उसे इस केस में झूठा फंसाया गया है. उसके खिलाफ कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है. इसलिए उसे रिहा किया जाय.
पॉक्सो के आरोपी भी बरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जबरन अप्राकृतिक यौन अपराध करने के आरोपी को फास्ट ट्रेक कोर्ट स्पेशल जज पॉक्सो देहरादून की अदालत से बीस साल की सजा सुनवाए जाने और दस हजार रूपये का जुर्माना लगाए जाने के मामले मे आरोपी की अपील पर सुनवाई की.
मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ती सिद्धार्थ साह कि खंडपीठ ने पॉक्सो कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए उसे रिहा करने के आदेश दिए हैं. अभियुक्त को फास्ट ट्रेक कोर्ट स्पेशल जज पॉक्सो ने अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए जाने के अपराध में अभियुक्त मोहित त्यागी को 13 जनवरी 2020 को बीस साल कि सजा और दस हजार रूपये के जुर्माने से दंडित किया था.
अपने को बेगुनाह साबित करने के लिए उसके द्वारा इस आदेश को उच्च न्यायलय मे चुनौती दी गयी. मामले के अनुसार पीड़ित के पिता ने 15 अगस्त 2018 को रात साढ़े ग्यारह बजे डाकपथर कोतवाली विकास नगर देहरादून में मुकदमा दर्ज कर कराया था.
पीड़िता पक्ष का आरोप था कि उनका 13 वर्षीय नबालिक पुत्र 15 अगस्त 2018 को शाम 6.30 बजे टोंस कॉलोनी डाकपथर से ट्यूशन पढ़कर आ रहा था. जब वह घर के पास पहुंचा तो आरोपी मोहित त्यागी अपनी मोटर साइकिल से उसे जबरन डरा धमकाकर अपने साथ शांति धाम डाकपथर ले गया, जहां पर उसने नाबालिक के साथ अप्राकृतिक यौन सम्बन्ध बनाए. बाद में उसे जान से मारने की धमकी देखर उसे वहां छोड़कर चला गया. जब पीड़ित ने यह बात परिजनों को बताई तो वे दंग रह गए.
16 अगस्त 2018 को पीड़ित का बाल चिकित्सक से जांच कराई गई थी. सुनवाई पर अभियुक्त की तरफ से कहा गया कि उसपर लगाए गए आरोप निराधार है. उसकी पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए उसे बेगुनाह साबित करते हुए रिहा किया जाय.
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