उत्तराखंड में हीट वेव को लेकर एडवाइजरी जारी, एक क्लिक में जानिये क्या करें और क्या ना करें?
स्वास्थ्य विभाग ने हीटस्ट्रोक कक्ष, दवाओं की उपलब्धता पर जोर दिया है. साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन को कहा गया है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : May 20, 2026 at 7:55 PM IST
देहरादून: देश के मैदानी राज्यों के साथ ही उत्तराखंड में भी हीट वेव का प्रकोप देखा जा रहा है. जिसे देखते हुए उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग भीषण गर्मी और संभावित हीट वेव से निपटने के लिए अलर्ट हो गया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ओर से जारी एडवाइजरी के तहत सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को हीट-सम्बंधित बीमारियों (HRI) की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. भारतीय मौसम विभाग ने इस बार सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद राज्य सरकार ने व्यापक रणनीति लागू कर दी है.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ओर से जारी निर्देशों में सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को हीट-सम्बंधित बीमारियों (HRI) की रोकथाम और प्रबंधन के लिए व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया है. भारतीय मौसम विभाग ने मार्च से मई के बीच सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद यह एडवाइजरी और भी अहम हो गई है. सरकार का लक्ष्य है कि समय रहते ठोस कदम उठाकर हीट स्ट्रोक और इससे होने वाली मौतों को कम किया जा सके.

राज्य के जिला और उप-जिला अस्पतालों में हीटस्ट्रोक कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं. इन कक्षों में मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए कूलिंग सिस्टम, आइस पैक, ठंडे IV फ्लूइड और पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है. पहले ठंडा करें, फिर परिवहन करें प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है. इसके अलावा, ओआरएस, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य जरूरी दवाओं की 100 फीसदी उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
हीट वेव के प्रभाव पर नजर रखने के लिए 1 मार्च 2026 से दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है. सभी जिला इकाइयों को IHIP प्लेटफॉर्म पर हीट-सम्बंधित मामलों की रिपोर्ट अपलोड करनी होगी. मरीज-स्तर की जानकारी संकलित करने के साथ-साथ संदिग्ध मौतों की जांच और ऑडिट भी किया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए है कि डेटा की गुणवत्ता और समयबद्ध रिपोर्टिंग में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

एडवाइजरी में शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बाहरी कार्य करने वाले श्रमिकों को सबसे अधिक जोखिम वाला वर्ग बताया गया है. इन समूहों के लिए विशेष जागरुकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप से बचने, हल्के सूती कपड़े पहनने और नियमित रूप से पानी पीने की सलाह दी गई है. साथ ही ठंडे इलाकों से आने वाले लोगों को 10-15 दिन का अनुकूलन समय देने की बात भी कही गई है.
गर्मी के दौरान होने वाले सामूहिक आयोजनों और खेल गतिविधियों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. दोपहर के समय बाहरी कार्यक्रमों से बचने और हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य की गई है. बड़े आयोजनों में चिकित्सा टीमों की तैनाती, ORS और आइस बॉक्स को उपलब्ध करने को कहा गया है. इसके साथ ही, बढ़ते तापमान के साथ बिजली के उपकरणों पर लोड बढ़ने की संभावना को देखते हुए अस्पतालों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. आईसीयू समेत सभी संवेदनशील क्षेत्रों में विद्युत लोड ऑडिट, स्मोक डिटेक्टर और फायर फाइटिंग सिस्टम की कार्यशीलता सुनिश्चित करने को कहा गया है.

वहीं, स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा राज्य सरकार हीट वेव की चुनौती को लेकर पूरी तरह गंभीर है. सभी जिलों को समय रहते तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा अस्पतालों में हीटस्ट्रोक कक्ष, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ की तैनाती की जा रही है.
हीट-सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकना सरकार की पहली प्राथमिकता है. इसके लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया गया है. सभी जिलों से रोजाना रिपोर्ट मांगी जा रही है. उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें. विशेषकर दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें. पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें. सचिन कुर्वे ने कहा सामूहिक प्रयासों से ही इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है.
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