ETV BHARAT की खबर का वन विभाग ने लिया संज्ञान, कैंपा फंड खर्च में सुस्ती पर 9 अफसरों को नोटिस
वन विभाग ने ईटीवी भारत की खबर का संज्ञान लेते हुए कैंपा फंड खर्च में सुस्ती दिखाने वाले अफसरों को नोटिस भेजा.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 25, 2026 at 5:18 PM IST
नवीन उनियाल की रिपोर्ट
देहरादून: कैंपा फंड (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority) के बजट खर्च में सुस्ती को लेकर उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है. ईटीवी भारत द्वारा प्रकाशित आंकड़ों पर आधारित खबर के बाद वन विभाग हरकत में आया है और कुल 9 जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है.
मामला वित्तीय वर्ष 2025-26 में कैंपा फंड के उपयोग से जुड़ा है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 9 महीने बीत जाने के बाद भी कई वन प्रभाग 40 प्रतिशत बजट खर्च नहीं कर पाए. कुछ डिवीजनों में तो खर्च का आंकड़ा 20 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका. यह स्थिति तब सामने आई जब ईटीवी भारत ने शुरुआत से ही बजट खर्च की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाए और बाद में विस्तृत आंकड़ों के साथ "वन विभाग 9 महीने में कैंपा फंड का 40% भी नहीं कर पाया खर्च, ₹160 करोड़ लैप्स होने का खतरा!" शीर्षक के साथ प्रकाशित की.
कॉर्बेट समेत कई प्रभागों पर कार्रवाई: सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, जो देश के प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में गिना जाता है. इतने अहम आरक्षित क्षेत्र में भी कैंपा फंड खर्च का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा. इसके बाद कॉर्बेट के जिम्मेदार अधिकारी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
इनको भी नोटिस: इसके अलावा अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग, गढ़वाल वन प्रभाग, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग, कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग, वन वर्धनिक पर्वतीय नैनीताल, लैंसडाउन वन प्रभाग, चकराता वन प्रभाग और मसूरी वन प्रभाग के अधिकारियों को भी नोटिस थमाया गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि 50 प्रतिशत से कम खर्च वाले प्रभागों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है.

प्रमुख सचिव की नाराजगी के बाद सख्ती: बजट खर्च में कमी को लेकर प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु ने भी नाराजगी जताई थी. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जहां भी फंड के उपयोग में लापरवाही या अनावश्यक देरी पाई जाए, वहां जवाबदेही तय की जाए. इसी क्रम में संबंधित आईएफएस अधिकारियों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा गया है.

वन मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि,
कैंपा फंड का उद्देश्य प्रतिपूरक वनीकरण, वन संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना है. ऐसे में बजट का समय पर उपयोग न होना विकास कार्यों और संरक्षण योजनाओं को प्रभावित करता है.
-सुबोध उनियाल वन मंत्री उत्तराखंड-
सरकार की सख्त मंशा: वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस पूरे मामले पर कहा कि सरकार बजट के प्रभावी और समयबद्ध उपयोग को लेकर गंभीर है. जहां भी खर्च में कमी या सुस्ती सामने आई है, वहां जवाब मांगा जा रहा है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग तय उद्देश्यों के अनुरूप और निर्धारित समयसीमा में होना चाहिए.

मंत्री ने संकेत दिए कि भविष्य में भी यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उनका कहना है कि कैंपा फंड राज्य के वन और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसकी निगरानी और क्रियान्वयन में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
ईटीवी भारत की खबर का असर: गौरतलब है कि ईटीवी भारत ने वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही खर्च की धीमी गति पर सवाल उठाए थे. हाल ही में प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हुई और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई.

अब देखना यह होगा कि नोटिस का जवाब मिलने के बाद विभाग आगे क्या कदम उठाता है? फिलहाल इस कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि बजट खर्च में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और कैंपा फंड के प्रभावी उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी.
उधर दूसरी तरफ, कैंपा के सीईओ कपिल लाल ने ईटीवी भारत से बात करते हुए कहा कि,
जिन डिवीजन में 50 प्रतिशत से कम खर्चा किया गया है, उन अफसरों से जवाब तलब किया गया है. इस मामले में अब जल्द जवाब आने की उम्मीद है.
-कपिल लाल, सीईओ, कैंपा-
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