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उत्तराखंड में क्यों हमलावर हो रहे जंगली जानवर? वन विभाग ने बताया कारण, भालुओं पर किया बड़ा खुलासा

भलुओं के बढ़ते हमलों के पीछे वन विभाग ने एक बड़ी वजह बतायी है. साथ ही लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है.

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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : November 21, 2025 at 7:24 PM IST

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देहरादून: उत्तराखंड में इन दिनों भालुओं का आतंक पहाड़ों पर दिखाई दे रहा है. लोगों में फैल रहे खौफ के बीच वन विभाग ने अब लोगों से अपील करते हुए एहतियात बरतने की सलाह दी है. स्थिति इतनी गंभीर है कि पिछले कुछ महीनो में ही कई पर्वतीय क्षेत्रों में भालू के हमले तेजी से बढ़ गए हैं, जो विभाग के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं.

उत्तराखंड वन विभाग इन दिनों भालुओं के हमलों पर लोगों के आक्रोश का सामना कर रहा है. स्थिति यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने वन विभाग के खिलाफ नाराजगी तो जताई ही है. साथ ही विपक्षी दल कांग्रेस भी इस मामले पर महकमें के खिलाफ लामबंद दिख रहा है.

चिंता इस बात को लेकर है कि इस बार भालुओं के हमले ऐसे क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहे हैं, जहां पहले ऐसी घटनाएं नहीं होती थी, उत्तराखंड वन विभाग ने भालू के लगातार बढ़ रहे हमलों के बीच लोगों से अपील करते हुए एहतियात बरतने के सुझाव दिए हैं.

इस दौरान वन विभाग ने भालू के हमले बढ़ने का कारण भी बताया है. साथ ही लोगों से ऐसे क्षेत्रों में विशेष रूप से जागरूक रहने के लिए भी कहा जा रहा है. वन विभाग का कहना है कि भालुओं के लिए भोजन की कमी दिखाई दे रही है और कुछ विशेष फसल में आई कमी के कारण भी भालूओ को खाना नहीं मिल पा रहा है.ऐसी स्थिति में भालू आसान भोजन के लिए आबादी की तरफ आ रहा है और इससे मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही है.

भालू के साथ इंसानों के संघर्ष की एक वजह यह भी है कि इस बार मौसमी चक्र बदलने के कारण भालू शीत निद्रा में नहीं जा पाया है. इस तरह वन विभाग ने ऐसे तमाम कारण बताते हुए इसका उपाय आम लोगों का जागरूक रहना बताया है.

पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ रंजन कुमार मिश्रा ने कहा कि फील्ड में भी तमाम अधिकारियों को ऐसी गंभीर स्थिति में मौके पर गस्त बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों की मॉनिटरिंग रखने के लिए कहा गया है. आंकड़ों के रूप में देखे तो उत्तराखंड में पिछले पांच सालों में अब तक भालुओं ने 14 लोगों की जान ली है. जबकि 438 लोगों पर हमला करते हुए उन्हें घायल किया है,. इस तरह पिछले 5 सालों में 450 से ज्यादा हमले रिकॉर्ड किए गए हैं. इस दौरान भालुओं पर नजर रखने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इतना ही नहीं आम लोगों को भी जागरूक करने की कोशिश की जा रही है ताकि उनका भालुओं से आमना-सामना ना हो.

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