सर्दियों की जरूरत पूरी करने के लिए एडवांस में ऊर्जा जुटा रहा उत्तराखंड, जानें कारण
सर्दियों में ज्यादा बिजली खर्च होती है. इसके लिए अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था के लिए ऊर्जा विभाग अभी से जुट चुका है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 25, 2026 at 4:04 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में सर्दियों के लिए बिजली की व्यवस्था पर अभी से काम होने लगा है. दरअसल सर्दियों में बिजली की डिमांड अचानक बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में आपूर्ति में कमी ना आए, इसके लिए व्यवस्था की जा रही है. अच्छी बात यह है कि करीब 150 मेगावाट से ज्यादा की बिजली की व्यवस्था अब तक की जा चुकी है और अब करीब 200 मेगावाट से ज्यादा ऊर्जा को जुटाने पर होमवर्क हो रहा है.
उत्तराखंड में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाली बिजली की मांग और कम होते जलविद्युत उत्पादन के बीच राज्य सरकार ने अभी से बिजली की व्यवस्था शुरू कर दी है. आने वाले दिसंबर से फरवरी 2027 तक प्रदेश में बिजली की कमी न हो, इसके लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने व्यापक प्लान तैयार किया है. इसके तहत करीब 350 से 450 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करने पर काम किया जा रहा है. कोशिश है कि सर्दियों में घरेलू उपभोक्ताओं के साथ ही प्रदेश के उद्योग-धंधों को भी निर्बाध बिजली मिलती रहे.
उत्तराखंड के लिए बिजली संकट कोई नई चुनौती नहीं है. राज्य गठन के करीब 26 साल बाद भी प्रदेश में मौजूद जल संसाधनों के अनुरूप इतनी विद्युत परियोजनाएं विकसित नहीं हो पाई हैं, जो राज्य की बढ़ती जरूरतों को पूरी तरह पूरा कर सकें. प्रदेश की अधिकांश बिजली उत्पादन क्षमता जलविद्युत पर निर्भर है. ऐसे में मौसम के साथ बिजली उत्पादन में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करता है.
सर्दियों में बढ़ जाती है बिजली की डिमांड: सर्दियों को लेकर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस दौरान बिजली की मांग बढ़ जाती है, जबकि जलविद्युत परियोजनाओं में उत्पादन घटने लगता है. इसी को देखते हुए यूपीसीएल ने दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक की संभावित जरूरत का आकलन करते हुए अभी से अतिरिक्त ऊर्जा जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम बिजली की बैंकिंग है. प्रदेश की ओर से दूसरे राज्यों को करीब 150 से 180 मेगावाट अतिरिक्त ऊर्जा की बैंकिंग की जा चुकी है. सर्दियों के दौरान जरूरत बढ़ने पर यही बिजली वापस उत्तराखंड को मिल सकेगी. यानी अभी उपलब्ध अतिरिक्त ऊर्जा को सुरक्षित तरीके से दूसरे राज्यों में बैंक कराकर बाद में जरूरत के समय उसका इस्तेमाल किया जाएगा.
इसके साथ ही केंद्रीय पूल की अनावंटित ऊर्जा से करीब 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्तराखंड को आवंटित कराने की कोशिश चल रही है. यदि यह व्यवस्था पूरी होती है तो सर्दियों में प्रदेश की बिजली जरूरत को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी. इसके अलावा जलविद्युत निगम के साथ भी लगातार संवाद किया जा रहा है, ताकि सर्दियों के दौरान उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर परियोजनाओं से अधिकतम संभव उत्पादन कराया जा सके.
हालांकि, इन तमाम व्यवस्थाओं के बाद भी अगर सर्दियों में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर पैदा होता है, तो पावर एक्सचेंज के जरिए अतिरिक्त बिजली खरीदने की व्यवस्था भी रखी गई है. यानी UPCL ने बिजली संकट से निपटने के लिए एक साथ कई स्तरों पर तैयारी शुरू की है.
राज्य में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जा रहा है. उसी के आधार पर पहले से बिजली की व्यवस्था की जा रही है, ताकि आम उपभोक्ताओं के साथ ही उद्योगों को भी बिजली की कमी का सामना न करना पड़े.
-पीसी ध्यानी, प्रबंध निदेशक, उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड-
दरअसल, उत्तराखंड में बिजली उत्पादन पर मौसम का सीधा असर पड़ता है. बरसात के दौरान नदियों में सिल्ट की मात्रा बढ़ने से कई जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी क्षमता से संचालित करना मुश्किल होता है. इसका असर उत्पादन पर पड़ता है. बरसात के बाद सर्दियों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि नदियों का जलस्तर कम होने लगता है और जलविद्युत उत्पादन घट जाता है.
दूसरी तरफ, सर्दियों में घरेलू बिजली की मांग बढ़ती है. हीटर, गीजर और अन्य विद्युत उपकरणों के इस्तेमाल के कारण खपत में इजाफा होता है. ऐसे में एक तरफ उत्पादन कम और दूसरी तरफ मांग ज्यादा होने से बिजली की उपलब्धता पर दबाव बढ़ जाता है.
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस बार यूपीसीएल ने संकट आने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही ऊर्जा जुटाने की रणनीति अपनाई है. करीब 150 से 180 मेगावाट बिजली की बैंकिंग, केंद्रीय पूल से 200 मेगावाट अतिरिक्त ऊर्जा हासिल करने की कोशिश और जरूरत पड़ने पर पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदने की व्यवस्था के जरिए सर्दियों में आपूर्ति को बनाए रखने की तैयारी है.
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