उत्तराखंड में भूकंप जोन बदला, बिल्डिंग बायलॉज में होगा संशोधन, उच्च स्तरीय समिति हुई गठित
उत्तराखंड में बिल्डिंग बायलाॅज में संशोधन के लिए सीबीआरआई के निदेशक की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है. जानिए पूरा मामला

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 24, 2026 at 8:55 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में आए दिन भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं. यही वजह है कि उत्तराखंड को भूकंप के लिहाज से जोन सिक्स में रखा गया है. पहले उत्तराखंड राज्य को भूकंप की संवेदनशीलता के आधार पर जोन 4 और 5 में रखा गया था. पिछले साल भारतीय मानक ब्यूरो ने देशभर में भूकंप की संवेदनशीलता को देखते हुए नया मैप जारी किया. जिसमें उत्तराखंड को जोन 6 में शामिल किया गया है. इसके बाद राज्य सरकार ने उत्तराखंड बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन करने का निर्णय लिया है. इसके लिए मुख्य सचिव ने सीबीआरआई के निदेशक की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी है.
भूकंप जोन 6 में आया उत्तराखंड, बिल्डिंग बायलाॅज में होगा व्यापक संशोधन: उत्तराखंड की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भवन निर्माण नियमों को अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. भारतीय मानक ब्यूरो ISO 1893-2025 के मुताबिक, पूरे राज्य के भूकंप जोन 6 में शामिल होने के बाद अब बिल्डिंग बायलाॅज में व्यापक संशोधन किया जाएगा.
इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की समीक्षा और संशोधन के लिए सीएसआईआर-सीबीआरआई (वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद/केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान) रुड़की के निदेशक प्रो. आर प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. यूएलएमएमसी यानी उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार को समिति का संयोजक बनाया गया है.

दरअसल, उत्तराखंड में बिल्डिंग बायलाॅज भारतीय मानक ब्यूरो के पुराने संस्करण ISO 1893-2002 पर आधारित है. जिसे अब भारतीय मानक ISO 1893-2025 के आधार पर बिल्डिंग बायलाॅज को संशोधित किया जाना है. इसके लिए समिति गठित की गई है. समिति में सीबीआरआई रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरणों और भू वैज्ञानिक विशेषज्ञों समेत तमाम तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है.

वहीं, समिति वास्तुविदों के साथ ही तमाम अभियंताओं से भी विचार-विमर्श करेगी. समिति का उद्देश्य राज्य के मौजूदा बायलाॅज का गहन अध्ययन करते हुए उन्हें वर्तमान भूकंपीय मानकों, जलवायु परिस्थितियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों के अनुरूप तैयार करना है. ताकि, भूकंप जैसी घटनाओं के दौरान नुकसान को कम से कम किया जा सके.
"उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए भवन निर्माण के नियमों में परिवर्तन किया जा रहा है. राज्य सरकार भवन बायलाॅज को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और आपदा सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है. जिसके लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है."- आनंद बर्धन, मुख्य सचिव
"समिति भवन बायलाॅज को अधिक व्यवहारिक, सुरक्षित और आपदा रोधी बनाने के लिए अपने सुझाव देगी. संशोधित नियमों से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आपदा जोखिम में कमी आएगी."- आनंद बर्धन, मुख्य सचिव
बिल्डिंग बायलाॅज में इस पर दिया जाएगा ध्यान: वहीं, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नियमों में बदलाव करना नहीं, बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है. उन्होंने बताया कि संशोधित बिल्डिंग बायलाॅज में भूकंप रोधी डिजाइन, भू तकनीकी जांच, विंड लोड और स्ट्रक्चरल सेफ्टी से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

इसके अलावा स्थानीय पारंपरिक निर्माण तकनीकों और जलवायु अनुकूल विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे सतत एवं आपदा-सक्षम विकास सुनिश्चित हो सके. प्रदेश में नए बिल्डिंग बायलाॅज लागू होने से भवनों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी, आपदा के दौरान जन-धन की हानि कम होगी और सुरक्षित व टिकाऊ शहरी विकास व निर्माण को नई दिशा मिलेगी.
वहीं, समिति अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आवास विभाग को सौंपेगी. समिति से तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर आवास विभाग की ओर से बायलाॅज में आवश्यक संशोधन एवं कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. समिति की अध्यक्षता सीएसआईआर-सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. आर प्रदीप कुमार करेंगे. जबकि, यूएलएमएमसी देहरादून के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार को संयोजक बनाया गया है.
समिति में इन्हें किया गया शामिल: समिति में डॉ. अजय चैरसिया (मुख्य वैज्ञानिक, सीबीआरआई रुड़की), प्रो. महुआ मुखर्जी (वास्तुकला विभाग, आईआईटी रुड़की), सुश्री मधुरिमा माधव (वैज्ञानिक ब, भारतीय मानक ब्यूरो, नई दिल्ली), डॉ. पीके दास (वरिष्ठ ग्रामीण आवास सलाहकार, यूएनडीपी), आर्किटेक्ट एसके नेगी (पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीबीआरआई शिमला) को शामिल किया गया है.

इसके अलावा उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के नामित प्रतिनिधि, ब्रिडकुल के प्रबंध निदेशक, लोक निर्माण विभाग व सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एवं विभागाध्यक्ष, राज्य के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रतिनिधि, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधियों के साथ भूकंप विशेषज्ञ धर्मेंद्र कुशवाहा एवं भू भौतिक विज्ञानी डॉ. विशाल वत्स सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं.
गठित उच्च स्तरीय समिति के लिए कार्यक्षेत्र किए गए तय-
- उत्तराखंड राज्य के वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की विस्तृत समीक्षा, विश्लेषण एवं मौजूदा तकनीकों का आकलन.
- राज्य में मौजूद भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदा जोखिमों को समाहित करते हुए संशोधित बिल्डिंग बायलाॅज का मसौदा तैयार करना.
- भूकंप-रोधी डिजाइन, नई निर्माण तकनीकों एवं संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को शामिल करना.
- पारंपरिक पहाड़ी निर्माण प्रणालियों को वैज्ञानिक रूप से आधुनिक नियमों में समाहित करना.
- पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल निर्माण के लिए विशेष प्रावधान तैयार करना.
- संशोधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना एवं दिशा-निर्देश प्रस्तुत करना.
- इंजीनियरों, योजनाकारों एवं संबंधित विभागों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के सुझाव देना.
ये भी पढ़ें-

