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नक्शे पर नहीं दर्ज बुग्यालों की पूरी तस्वीर, एटलस के अभाव में संरक्षण पर सवाल, जानिए पूरा मामला

उत्तराखंड वन विभाग बुग्यालों की एक एटलस तैयार करने की कोशिश कर रहा है.

UTTARAKHAND BUGYAL ATLAS
नक्शे पर नहीं दर्ज बुग्यालों की पूरी तस्वीर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : September 2, 2026 at 8:34 PM IST

4 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड में बुग्याल संरक्षण के दावों के बीच जानकारों ने अबतक बुग्याल से संबंधित कोई एटलस उपलब्ध ना होने पर चिंता जाहिर की है. हिमालई उच्च क्षेत्रों में बुग्यालों पर संकट को लेकर अक्सर जानकर चिंता जाहिर करते रहे हैं, लेकिन बुग्याल संरक्षण दिवस पर इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों ने हैरानी जताते हुए आज तक उसका कोई एटलस ही तैयार नहीं होने की जानकारी दी है.

उत्तराखंड की पहचान माने जाने वाले बुग्याल आज भी एक ऐसे व्यवस्थित और व्यापक मानचित्र का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें प्रदेश के सभी बुग्यालों की पूरी जानकारी एक जगह दर्ज हो. बुग्यालों का एटलस होने का मतलब सिर्फ किसी नक्शे पर उनके नाम दर्ज करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक बुग्याल की सटीक लोकेशन, क्षेत्रफल, ऊंचाई, भौगोलिक सीमाएं, वनस्पतियां, जैव विविधता, जलस्रोत, पहुंच मार्ग और पर्यावरणीय संवेदनशीलता जैसी जानकारियों को वैज्ञानिक तरीके से मैप करना है.

नक्शे पर नहीं दर्ज बुग्यालों की पूरी तस्वीर (ETV Bharat)

दरअसल उत्तराखंड में औली, बेदनी, अली, दयारा, पंवालीकांठा, चोपता समेत बड़ी संख्या में छोटे-बड़े बुग्याल हैं. अलग-अलग विभागों और शोध अध्ययनों में इनके संबंध में जानकारी मिलती है, लेकिन इन सभी को एक समान वैज्ञानिक प्रारूप में जोड़कर राज्य के बुग्यालों का समग्र एटलस तैयार किया जाए तो इससे बुग्यालों की वास्तविक संख्या, उनका कुल क्षेत्रफल और उनकी स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है.

क्या होती है बुग्याल एटलस? बुग्याल एटलस को आसान भाषा में बुग्यालों की पूरी वैज्ञानिक कुंडली कहा जा सकता है. इसमें हर बुग्याल को एक अलग पहचान और स्थान दिया जाता है. GIS और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों की मदद से उसकी सीमा तय की जा सकती है. इसके साथ यह भी दर्ज किया जा सकता है कि बुग्याल समुद्र तल से कितनी ऊंचाई पर है? उसका क्षेत्रफल कितना है? वहां किस तरह की वनस्पतियां पाई जाती है? ये सभी जानकारियां एटलस में होती हैं.

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क्या होतें हैं बुग्याल (ETV Bharat)

एटलस में यह जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी कि कौन सा बुग्याल पर्यटन, धार्मिक यात्रा, चराई, जैव विविधता या जल संरक्षण की दृष्टि से कितना महत्वपूर्ण है. इससे समय के साथ होने वाले बदलावों को भी ट्रैक किया जा सकेगा.

क्यों जरूरी है एटलस? बुग्याल बेहद संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं. पर्यटन और तीर्थाटन बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों पर दबाव भी बढ़ रहा है. ऐसे में यदि किसी बुग्याल का सटीक क्षेत्रफल और उसकी पर्यावरणीय स्थिति ही स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होगी तो उसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक योजना बनाना मुश्किल होगा.

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क्या होती है ट्री लाइन (ETV Bharat)

एटलस तैयार होने के बाद सरकार यह भी देख सकती है कि किन बुग्यालों में पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने की जरूरत है, कहां चराई का दबाव अधिक है और किन क्षेत्रों को संरक्षण की प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

इस मामले में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (USEC) के वैज्ञानिक डॉ गजेंद्र सिंह कहते हैं कि फिलहाल उत्तराखंड में बुग्याल को लेकर कोई एटलस नहीं है, लेकिन विभिन्न संस्थान मिलकर इसे बना सकते हैं, जिससे बुग्यालों की असल तस्वीर सामने आ सकती है.

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क्यों जरूरी हैं बुग्याल (ETV Bharat)

उधर इस मामले में सीसीएफ पर्यावरण सुशांत पटनायक ने बताया वैसे तो वन विभाग के पास बुग्याल के क्षेत्रफल को लेकर आंकड़ा मौजूद है लेकिन इसका और भी रिफाइन डाटा तैयार करने का प्रयास हो रहा है. उन्होंने कहा कोशिश किया जा रही है कि जल्द ही वन विभाग बुग्यालों की एक एटलस तैयार करें.

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